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Home पश्चिम-बंगाल कोलकाता टीएमसी में बगावत! काकोली घोष दस्तीदार का इस्तीफा, I-PAC पर फोड़ा हार का ठीकरा, ममता को दी सलाह- ‘भूंइफोड़’ संस्थाओं से बचें

टीएमसी में बगावत! काकोली घोष दस्तीदार का इस्तीफा, I-PAC पर फोड़ा हार का ठीकरा, ममता को दी सलाह- ‘भूंइफोड़’ संस्थाओं से बचें

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टीएमसी में बगावत! काकोली घोष दस्तीदार का इस्तीफा, I-PAC पर फोड़ा हार का ठीकरा, ममता को दी सलाह- ‘भूंइफोड़’ संस्थाओं से बचें

Kakoli Ghosh Dastidar Resignation: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की करारी शिकस्त के बाद अब पार्टी का अंतर्कलह सामने आ गया है. बारासत से सांसद और कद्दावर नेता काकोली घोष दस्तीदार ने बारासत संगठनात्मक जिला अध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे दिया है.

काकोली ने ममता बनर्जी को लिखी चिट्ठी

इस्तीफे के साथ ही उन्होंने पार्टी की चुनावी रणनीति बनाने वाली पेशेवर संस्था आई-पैक (I-PAC) पर सीधा हमला बोला है. काकोली ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को एक चिट्ठी लिखी है, जिसमें साफ-साफ कहा है कि पार्टी को बाहरी ‘भूंइफोड़’ (घर तोड़ने वाली) एजेंसियों की बजाय अपने पुराने और वफादार कार्यकर्ताओं पर भरोसा करना चाहिए.

अनुराग की सजा : 4 दशकों की वफादारी और यह इनाम?

काकोली घोष दस्तीदार का इस्तीफा उस वक्त आया है, जब कुछ दिन पहले ही उन्हें टीएमसी संसदीय दल के मुख्य सचेतक (Chief Whip) के पद से हटा दिया गया था. उनकी जगह कल्याण बनर्जी को यह जिम्मेदारी दी गयी है.

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सोशल मीडिया पर शेयर किया इमोशनल पोस्ट

चीफ ह्विप के पद से हटाये जाने के बाद काकोली ने सोशल मीडिया पर अपना दर्द शेयर करते हुए लिखा- 1976 से पहचान है. 1984 से सफर शुरू हुआ. चार दशकों की वफादारी के लिए आज मुझे पुरस्कृत किया गया. उन्होंने आगे लिखा- बारासत में पार्टी के खराब प्रदर्शन की ‘नैतिक जिम्मेदारी’ लेती हूं. इसलिए जिला अध्यक्ष का पद छोड़ रही हूं.

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दबाव में काम करवाती हैं I-PAC जैसी संस्थाएं

काकोली ने अपने पत्र में बिना नाम लिये आई-पैक (I-PAC) जैसी पेशेवर एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाये हैं. काकोली का आरोप है कि चुनाव के दौरान बाहरी एजेंसियों ने पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर दिया, जिससे जमीन पर पार्टी का संपर्क टूट गया.

भ्रष्टाचार और अपराध पर चिंता जतायी

टीएमसी सांसद ने कहा कि आई-पैक जैसी एजेंसियां कठिन परिस्थितियों में पार्टी का बेड़ा पार नहीं लगा सकतीं. ममता बनर्जी को पुराने साथियों के साथ मिलकर काम करना चाहिए, ताकि पार्टी की छवि उज्ज्वल हो सके. पत्र में उन्होंने बंगाल में बढ़ते अपराध और भ्रष्टाचार की घटनाओं पर भी चिंता जतायी है. उन्होंने कहा कि राजनीति में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी के कारण आम जनता में आशंका पैदा हुई है.

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टीएमसी में ‘पुराने बनाम नये’ की जंग तेज

काकोली घोष दस्तीदार का यह कदम टीएमसी के भीतर पुराने गार्ड (Old Guard) और युवा ब्रिगेड (विशेषकर अभिषेक बनर्जी समर्थित आई-पैक) के बीच चल रही रस्साकशी का नतीजा माना जा रहा है. चुनाव में हार के बाद कई नेता अब खुलकर कह रहे हैं कि डेटा और एल्गोरिदम के चक्कर में पार्टी ने अपनी ‘जमीनी पकड़’ खो दी है.

Kakoli Ghosh Dastidar Resignation: टीएमसी अध्यक्ष ने नहीं दी कोई प्रतिक्रिया

टीएमसी के राज्य अध्यक्ष सुब्रत बख्शी ने फिलहाल इस इस्तीफे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है. लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि बारासत जैसे महत्वपूर्ण जिले में पार्टी के भीतर मची यह खलबली आगामी नगर निकाय चुनावों के लिए खतरे की घंटी है.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
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