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इनोवेशन के लिए जिज्ञासु होना जरूरी : सोनम वांगचुक

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इनोवेशन के लिए जिज्ञासु होना जरूरी : सोनम वांगचुक

कोलकाता.

जेआइएस ग्रुप की ओर से मंगलवार को धनधान्य ऑडिटोरियम में “मेड इन जेआइएस 2025 ” का आयोजन किया गया, जिसमें छात्रों के नवाचार, रचनात्मक उद्यमिता और परिवर्तनकारी नेतृत्व का जीवंत उत्सव मनाया गया. कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि सोनम वांगचुक उपस्थित थे. वांगचुक, जिन्हें बॉलीवुड फिल्म थ्री इडियट्स के किरदार फुनसुख वांगडू के प्रेरणास्रोत के रूप में जाना जाता है. वह एसईसीएमओएल (लद्दाख के छात्रों का शैक्षिक और सांस्कृतिक आंदोलन) के संस्थापक निदेशक हैं. उन्हें शिक्षा की पुनर्कल्पना और पर्वतीय समुदायों के लिए स्थायी समाधान तैयार करने के लिए विश्व स्तर पर जाना जाता है. अपने संबोधन में श्री वांगचुक ने कहा- सच्ची शिक्षा कहीं भी हो सकती है, सिर्फ़ कक्षा की चारदीवारी के भीतर ही नहीं. खुद उनका स्कूल में दाखिला नौ साल की उम्र में करवाया गया. किसानों को देखना, पेड़ों पर चढ़ना, नदियों में कूदना और जीवन की लय में डूब जाना ही असली जीवन है. इन सबसे उन्होंने बहुत कुछ सीखा है. वांगचुक ने उन युवाओं के लिए एक रोडमैप प्रस्तुत किया, जो नवप्रवर्तक और समस्या समाधानकर्ता बनने की आकांक्षा रखते हैं.

उन्होंने कहा कि पहला स्तंभ जिज्ञासा है. “जिज्ञासा अब तक का सबसे अच्छा शिक्षण सॉफ्टवेयर है. यह हार्डवेयर, यानी बच्चे में पहले से ही लोड होता है. बचपन में बहुत सारे प्रश्न पूछने के लिए उपहास का पात्र बनने के बावजूद, वांगचुक ने सीखने और इनोवेशन के लिए जिज्ञासु होने पर जोर दिया. अगर आप 80 साल की उम्र में भी जिज्ञासु हैं, तो आप जवान हैं. अगर 18 साल की उम्र में आपकी जिज्ञासा खत्म हो गयी है, तो आप पहले ही बूढ़े हो चुके हैं. उन्होंने अपनी मां की करुणा से सीखे सबक याद करते हुए कहा कि दूसरों के दर्द को महसूस करना और उनकी समस्याओं का समाधान करने की चाहत ही स्मार्ट बिजनेस व इनोवेशन के लिए प्रेरित करती है.

अनुभव आत्मविश्वास पैदा करता है और आत्मविश्वास सफलता की ओर ले जाता है. कार्यक्रम में फाद कैपिटल के सीईओ आदित्य अरोड़ा, स्नैप-ई कैब्स के संस्थापक और सीईओ मयंक बिंदल का भी स्वागत किया गया. कार्यक्रम में जेआइएस समूह की निदेशक जसप्रीत कौर ने कहा कि सोनम वांगचुक का हमारे बीच होना, एक खास अनुभव जैसा है. शिक्षा, पर्यावरणीय स्थिरता, या समुदाय-आधारित इनोवेशन के क्षेत्र में वांगचुक के कार्य, उन मूल्यों का प्रतीक हैं, जिन्हें हम अपने छात्रों में स्थापित करना चाहते हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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