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बंगाल के पूर्व पर्यटन मंत्री इंद्रनील सेन ने यूनेस्को के नाम पर की करोड़ों की ठगी!

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बंगाल के पूर्व पर्यटन मंत्री इंद्रनील सेन ने यूनेस्को के नाम पर की करोड़ों की ठगी!
पश्चिम बंगाल के पूर्व पर्यटन मंत्री इंद्रनील सेन और कोलकाता की दुर्गा पूजा.

Indranil Sen UNESCO Controversy: पश्चिम बंगाल में सत्ता बदलने के बाद पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार के मंत्रियों और उनके करीबियों के रसूख का किला एक-एक कर ढहता जा रहा है. अब राज्य की सबसे बड़ी आस्था यानी कोलकाता की दुर्गा पूजा को भी सिंडिकेट और वित्तीय अनियमितताओं के खेल में घसीटने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है.

दुर्गा पूजा में प्रिव्यू शो का रैकेट चलाने के आरोप

राज्य के पूर्व पर्यटन और सांस्कृतिक मामलों के मंत्री इंद्रनील सेन (Indranil Sen) और उनकी पत्नी मधुछंदा सेन के खिलाफ कोलकाता पुलिस में एक लिखित शिकायत दर्ज करायी गयी है. उन पर आरोप है कि उन्होंने यूनेस्को (UNESCO) का ‘फर्जी आधिकारिक पार्टनर’ होने का ढोंग रचा और कोलकाता की प्रसिद्ध दुर्गा पूजा के नाम पर प्रिव्यू शो (Preview Show) का एक बड़ा रैकेट चलाकर आम जनता और विदेशी पर्यटकों से करोड़ों रुपए की ठगी की.

‘सिंडिकेट को प्राप्त था ममता बनर्जी सरकार का संरक्षण’

आरोप है कि बंगाल की ममता बनर्जी सरकार के संरक्षण में चल रहे इस कथित वीआईपी पास सिंडिकेट ने कोलकाता की सार्वजनिक दुर्गा पूजा को आम जनता के लिए प्रतिबंधित कर निजी व्यावसायिक जोन में तब्दील कर दिया.

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क्या है 4,000 रुपए के वीआईपी टिकट का विवाद?

कोलकाता पुलिस कमिश्नर, राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) और बहूबाजार थाने में यह शिकायत कोलकाता के ही एक अंतरराष्ट्रीय ट्रैवल कंसल्टेंट जयदीप मुखर्जी ने दर्ज करायी है. इसमें कई गंभीर आरोप लगाये गये हैं.

  1. फर्जी संस्था का गठन : पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन, उनकी पत्नी मधुछंदा सेन, ध्रुवज्योति बोस, सायंतन मैत्रा और रंजना चटर्जी ने मिलकर 24 जून 2022 को ‘महानिर्वाण रोड मास आर्ट सोसाइटी’ (MassArt) नाम से एक संस्था रजिस्टर्ड करायी थी.
  2. यूनेस्को के नाम का गलत इस्तेमाल : इस संस्था ने खुद को यूनेस्को का आधिकारिक सहयोगी बताया, जबकि वास्तव में उनका यूनेस्को से ऐसा कोई सीधा व्यावसायिक नाता नहीं था.
  3. बेचे गये वीआईपी टिकट और पास : इस संस्था ने कोलकाता की 24 चुनिंदा सबसे बड़ी और प्रसिद्ध दुर्गा पूजा कमेटियों के पंडालों में आम जनता की एंट्री से पहले ‘प्रिव्यू शो’ दिखाने के नाम पर 4,000 रुपए प्रति व्यक्ति के हिसाब से वीआईपी टिकट और पास बेचे.

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टीएमसी सरकार के रसूख के कारण दबा था मामला

शिकायतकर्ता जयदीप मुखर्जी, जो खुद वर्ष 2010 से विदेशों में बंगाल की दुर्गा पूजा को प्रमोट कर रहे हैं और यूरोप व अमेरिका में 66 से अधिक रोड शो कर चुके हैं, उन्होंने इस खेल को उजागर किया है.

  • जयदीप का आरोप है कि इस 4,000 रुपए वाले वीआईपी टिकट रैकेट के कारण कोलकाता के भव्य पूजा पंडालों को आम लोगों के लिए बंद कर दिया जाता था. वहां केवल महंगे टिकट धारकों को ही विशेष एंट्री दी जाती थी, जिससे कई पंडालों के बाहर स्थानीय लोगों और सुरक्षाकर्मियों के बीच भारी विवाद और तनाव की स्थिति पैदा होती थी.
  • शिकायत में कहा गया है कि यूनेस्को की कोई भी आधिकारिक टीम इन प्रिव्यू शो में शामिल होने कभी नहीं आयी. यह सब केवल पैसे ऐंठने का एक सिंडिकेट था, जिसे पूर्ववर्ती तृणमूल सरकार का पूरा प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त था. रसूखदार होने के कारण तब उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो सकी थी.

मास आर्ट की सफाई – हमारे पास हैं यूनेस्को के सारे दस्तावेज

  • मास आर्ट सोसाइटी (MassArt) के ध्रुवज्योति बोस ने आरोपों को राजनीति से प्रेरित और बेबुनियाद बताया है. उनका कहना है कि उनके पास यूनेस्को की भागीदारी और पूजा कमेटियों व स्थानीय कलाकारों को दी गयी वित्तीय सहायता के सभी कागजात हैं.
  • ध्रुवज्योति का दावा है कि उत्सव से पहले 4 दिनों के इस विशेष प्रिव्यू शो के दौरान संयुक्त राष्ट्र (UN) के प्रतिनिधियों ने कोलकाता के दर्जनों सामुदायिक पूजा पंडालों का दौरा किया था. ये आरोप केवल संस्था की छवि खराब करने के लिए लगाये जा रहे हैं.

Indranil Sen UNESCO Controversy: बहूबाजार थाना की पुलिस ने शुरू की जांच

बहूबाजार थाना की पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद मामले की प्राथमिक जांच शुरू कर दी है. यह पता करने की कोशिश की जा रही है कि प्रिव्यू शो के टिकटों से जुटाये गये करोड़ों रुपए आखिर किस-किस खाते में ट्रांसफर किये गये. इस हाई-प्रोफाइल मामले ने बंगाल के सांस्कृतिक और राजनीतिक गलियारों में एक नया भूचाल ला दिया है.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
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