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झाड़ग्राम : रास्ते में रिसॉर्ट व होम स्टे से दिशाहीन हो रहे हैं हाथी

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झाड़ग्राम : रास्ते में रिसॉर्ट व होम स्टे से दिशाहीन हो रहे हैं हाथी

जीतेश बोरकर,खड़गपुर

झाड़ग्राम जिले में होम स्टे की संख्या तेजी से बढ़ रही है. वहीं, झाड़ग्राम जिले में कई बार यात्रा पर आयीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद जिले में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अधिक होम स्टे बनाने की बात भी कह चुकी हैं. जंगलमहल में हाथियों के रास्ते में एक के बाद एक होम स्टे और विलेज रिसॉर्ट सामने आ रहे हैं, ऐसे में हाथी-मानव संघर्ष का खतरा बढ़ता जा रहा है.

आरोप है कि ज्यादातर होम स्टे और विलेज रिसॉर्ट नियमों को तोड़ कर हाथी के रास्ते पर ही बनाये जा रहे हैं. जंगल में रियायती जमीन पर अनियोजित निर्माण किये जा रहे हैं. झाड़ग्राम और बेलपहाड़ी ब्लॉक में ऐसे रिसॉर्ट और होम स्टे पहले ही बनाये जा चुके हैं. वन विभाग के सूत्रों के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में मुख्य रूप से पंचायत स्तर पर अनुमति और व्यापार लाइसेंस के साथ होम स्टे या विलेज रिसॉर्ट विकसित किये जा रहे हैं. इस मामले में उनका कोई लेना-देना नहीं है, क्योंकि वे रियायती जमीन पर बने हैं. वनवासियों के एक वर्ग के अनुसार, उत्तर बंगाल में हाथी गलियारों में लगातार मीलों तक जंगल हैं. लेकिन झाड़ग्राम में लंबे समय से जंगल क्षेत्र में टाउनशिप का विकास हो रहा है. झाड़ग्राम जिला बनने के बाद कई जगहों पर आबादी जंगल में चली गयी है. इससे हाथियों की गतिविधियां बाधित हो रही हैं. फिर ऐसे अनियोजित होम स्टे के कारण उनका विचरण बाधित हो रहा है. हाथी अपना प्राकृतिक मार्ग खो रहे हैं.

वहीं, पर्यटन विभाग से मान्यता प्राप्त झाड़ग्राम टूरिज्म से जुड़े लोगों का कहना है कि मुख्यमंत्री के कई बार झाड़ग्राम जिले के दौरे के दौरान पर्यटन को जंगल में बढ़ावा देने की बात कहने के बाद से ही जिले के विभिन्न ग्रामीण इलाकों में कई होम स्टे बनाये जा रहे हैं. इनमें से ज्यादातर वन क्षेत्रों में हैं. स्थानीय निवासियों और पर्यटकों की सुरक्षा के लिए जल्द ही एक मास्टर प्लान तैयार करने की जरूरत है.

वहीं, वन राज्य मंत्री बीरबाहा हांसदा ने कहा : हाथियों की समस्या के समाधान के लिए विभागीय स्तर पर कदम उठाये जा रहे हैं. कुछ मालिकों ने रिसॉर्ट और होमस्टे को हाथियों से बचाने के लिए रिसॉर्ट और होमस्टे के चारों ओर गहरी खाई खोद दी है. पिकनिक का मौसम भी आ गया है. इसे ध्यान में रखते हुए, वन अधिकारी सलाह देते रहे हैं कि सूर्यास्त से पहले पर्यटकों की आवाजाही को नियंत्रित करने की आवश्यकता है. सुबह-सुबह भी जंगल क्षेत्र में घूमना काफी जोखिम भरा होता है. मालूम हो कि खड़गपुर शहर में घने जंगल न होने के बावजूद कुछ दिनों पहले नौ हाथियों का दल शहर में प्रवेश कर गया और करीब 12 घंटे तक खड़गपुर महकमा अस्पताल से सटी झाड़ियों में मौजूद रहा, जिससे खड़गपुर शहरवासियों में दहशत फैल गयी थी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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