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बंगाल चुनाव 2026: अफसरों के तबादले पर हाईकोर्ट में भिड़े चुनाव आयोग और सरकार के वकील

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बंगाल चुनाव 2026: अफसरों के तबादले पर हाईकोर्ट में भिड़े चुनाव आयोग और सरकार के वकील

Election Commission on Officers Transfers in Bengal : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की घोषणा के बाद राज्य के टॉप लेवल के 79 अफसरों की ट्रांसफर-पोस्टिंग का मामला अब कोर्ट पहुंच चुका है. सोमवार को हाईकोर्ट में में इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया (ECI) ने इन तबादलों के खिलाफ दायर जनहित याचिका (PIL) की पोषणीयता (Maintainability) पर ही गंभीर सवाल उठा दिये.

चुनाव आयोग ने कहा- निष्पक्ष चुनाव कराना पवित्र कर्तव्य

आयोग ने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना उसका ‘पवित्र कर्तव्य’ है. तबादले इसी प्रक्रिया का हिस्सा हैं. दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद चीफ जस्टिस सुजॉय पॉल की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की अगली सुनवाई बुधवार तक स्थगित कर दी.

79 अफसरों के ट्रांसफर से राज्य में प्रशासनिक शून्यता – सरकारी वकील

याचिकाकर्ता, जो पेशे से वकील हैं, उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने कोर्ट में पक्ष रखा. उन्होंने आरोप लगाया कि 15 मार्च को चुनाव की घोषणा के बाद से आयोग ने अब तक 63 पुलिस अधिकारियों और 16 प्रशासनिक अधिकारियों समेत कुल 79 अधिकारियों का तबादला कर दिया है. मुख्य सचिव और गृह सचिव जैसे शीर्ष पदों पर अचानक बदलाव से राज्य की शासन व्यवस्था चरमरा गयी है. आयोग ‘मनमाने’ ढंग से अपनी पसंद के अफसरों को बैठा रहा है. राज्य के महाधिवक्ता किशोर दत्ता ने भी इन दलीलों का समर्थन किया.

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आयोग का पलटवार : पद वही रहते हैं, चेहरा बदलता है

निर्वाचन आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डीएस नायडू ने याचिकाकर्ता की इन दलीलों का विरोध किया. उन्होंने कड़ा रुख अपनाते हुए याचिकाकर्ता की साख पर सवाल उठाये.

  • निजी स्वार्थ का आरोप : याचिकाकर्ता खुद एक पूर्णकालिक सरकारी वकील हैं. ऐसे में वे ‘जनता के हितैषी’ होने का दावा कर जनहित याचिका कैसे दाखिल कर सकते हैं?
  • भेदभाव से इनकार : चुनाव आयोग ने बंगाल के साथ भेदभाव के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश और झारखंड में भी चुनावों के दौरान इसी तरह बड़े पैमाने पर तबादले किये गये थे.
  • शून्यता का खंडन : इलेक्शन कमीशन के वकील ने साफ किया कि अधिकारी बदलने से व्यवस्था नहीं रुकती. पद और प्रक्रिया निरंतर बनी रहती है. इसलिए शासन में शून्यता का दावा निराधार है.

बुधवार को होगी निर्णायक बहस

कलकत्ता हाईकोर्ट की पीठ अब बुधवार (25 मार्च) को इस मामले पर आगे की दलीलें सुनेगी. इसी दिन तय होगा कि चुनाव आयोग के पास तबादलों की शक्तियां हैं या राज्य सरकार की दलीलें भारी पड़ेंगी? बंगाल के प्रशासनिक और सियासी हलकों की नजरें अब अदालत के फैसले पर टिकी हैं.

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