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एसआइआर प्रक्रिया से संतुष्ट नहीं अभिषेक, कहा-थोपा गया

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एसआइआर प्रक्रिया से संतुष्ट नहीं अभिषेक, कहा-थोपा गया

कोलकाता.

गत मंगलवार को निर्वाचन आयोग द्वारा विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के तहत मंगलवार को राज्य की मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित की गयी है. मसौदा मतदाता सूची के मुद्दे पर सांसद व तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने बुधवार को पत्रकारों से कहा कि यह केवल एक ड्राफ्ट लिस्ट है, अंतिम सूची नहीं. दो महीने तक दावा और आपत्ति की प्रक्रिया चलेगी. राज्य में एसआइआर के क्रियान्वयन से वह संतुष्ट नहीं हैं. उनका आरोप है कि केंद्र सरकार यह प्रक्रिया दो साल में कर सकती थी, लेकिन इसे दो महीने में एक तरह से थोप दिया गया. बीएलओ की नियुक्ति चुनाव आयोग करता है, न कि तृणमूल या राज्य सरकार. उन्होंने इसे अव्यवस्थित और त्रुटिपूर्ण प्रक्रिया बताया. सीएए के मुद्दे पर भी बनर्जी ने भाजपा पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि भाजपा समाज को बांटने की राजनीति करती है. उन्होंने सवाल किया कि 2019 से अब तक कितने लोगों को नागरिकता दी गयी, इसकी सूची भाजपा सार्वजनिक करे.

असम में एनआरसी के दौरान कितने लोगों के नाम कटे और वे अब कहां हैं, इसका जवाब भी भाजपा दे. उन्होंने आरोप लगाया कि देश के नागरिकों को बांग्लादेश भेजा गया और बाद में अदालत के निर्देश पर वापस लाया गया. मसौदा मतदाता सूची में हुगली के डानकुनी के वार्ड नंबर 18 के एक जीवित पार्षद को मृत घोषित कर दिया गया, जो चुनाव आयोग की गंभीर चूक को दर्शाता है. बनर्जी ने भाजपा को चुनौती देते हुए कहा कि तृणमूल अपना वोट प्रतिशत और वोट शेयर बढ़ायेगी, चाहे भाजपा जो भी करे. अगर तृणमूल का वोट शेयर बढ़ता है, तो भाजपा को बंगाल के दो लाख करोड़ रुपये के बकाया फंड जारी करने होंगे और राज्य की जनता से माफी मांगनी होगी.

उन्होंने कहा कि डर भाजपा को है, तृणमूल को नहीं. इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि मनरेगा को लेकर तृणमूल कांग्रेस की लड़ाई जारी रहेगी. इस मुद्दे को संसद में उठाया जायेगा. हाइकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद केंद्र सरकार ने अब तक बंगाल का बकाया भुगतान नहीं किया है. जनता के हक के लिए यह संघर्ष जारी रहेगा.कांग्रेस से गठबंधन पर तोड़ी चुप्पी, कहा बंगाल में पार्टी के पास ऐसा कुछ नहीं है, जिसकी तृणमूल को जरूरत होकोलकाता. तृणमूल कांग्रेस सांसद व पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने बुधवार को पत्रकारों से बातचीत में अगले वर्ष पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से गठबंधन को लेकर चुप्पी तोड़ी है. उन्होंने कहा : फिलहाल बंगाल में कांग्रेस के पास ऐसा कुछ नहीं है, जिसकी तृणमूल को जरूरत हो या जो वह दे सके. 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के पास दो सीटें थीं. तृणमूल ने उन्हें प्रस्ताव दिया था, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया और नतीजा सबके सामने है. दो से घटकर वे शून्य हो गये. आगे क्या होगा, यह पूरी तरह मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के फैसले पर निर्भर करेगा. उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल में चुनाव में तृणमूल को जीतने के लिए कांग्रेस की जरूरत नहीं है. पार्टी ने 2014, 2016, 2019, 2021 और 2024 में अपने दम पर चुनाव लड़ा और जीता है और हर चुनाव के साथ और मजबूत हुई है. तृणमूल किसी पर निर्भर नहीं करती और अकेले जीतने में सक्षम है. पार्टी का फोकस बंगाल में विकास की रिपोर्ट हर घर तक पहुंचाने पर है.बनर्जी ने आरोप लगाया कि केंद्र में भाजपा के पिछले 10 वर्षों के शासन में बंगाल को योजनाबद्ध तरीके से कमजोर किया गया और उसके हक से वंचित रखा गया.

दिल्ली का पानी संभवत: ठीक नहीं, तृणमूल सांसदों की बैठक में अनुशासन को लेकर पार्टी महासचिव की सख्त चेतावनी

कोलकाता. अगले वर्ष राज्य में होने वाले विधानसभा चुनाव पर नजर रखते हुए तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव व सांसद अभिषेक बनर्जी ने नयी दिल्ली में पार्टी सांसदों के लिए सख्त अनुशासनात्मक संदेश दिया है. बुधवार को उन्होंने लोकसभा और राज्यसभा के तृणमूल सांसदों के साथ बैठक कर ‘आचरण संहिता’ की याद दिलायी और तीन अहम निर्देश जारी किये. बनर्जी ने पहला संदेश देते हुए कहा कि दिल्ली का पानी संभवत: अच्छा नहीं है.’ उनका इशारा था कि संसद सत्र समाप्त होने के बाद सांसदों को अपने आवास पर लौटकर पार्टी के संगठनात्मक काम में लग जाना चाहिए. हाल के दिनों में कुछ सांसदों को लेकर दिल्ली में ‘नाइट पार्टी’ से जुड़ी चर्चाओं के चलते यह सख्त चेतावनी दी गयी है. दूसरे निर्देश में बनर्जी ने साफ कहा कि कोई भी सांसद पार्टी को बताये बिना किसी केंद्रीय मंत्री से मुलाकात नहीं करेगा. हाल ही में कुछ तृणमूल सांसदों पर पार्टी नेतृत्व को जानकारी दिये बिना रेल मंत्री समेत कई केंद्रीय मंत्रियों से मिलने के आरोप लगे थे. तीसरे और सबसे कड़े निर्देश में लोकसभा में उपस्थिति को लेकर बनर्जी ने नाराजगी जाहिर की. उन्होंने कहा कि कुछ सांसद केवल हस्ताक्षर करके संसद से चले जाते हैं. बैठक समाप्त होने के बाद बनर्जी ने अलग से जादवपुर की सांसद सायनी घोष से भी बातचीत की.

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