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सीएम ने कविताओं के माध्यम से किया एसआइआर का विरोध

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सीएम ने कविताओं के माध्यम से किया एसआइआर का विरोध

ममता बनर्जी ने विरोध का एक अनूठा रूप अपनाया और इस मुद्दे पर 26 कविताएं लिखीं

संवाददाता, कोलकाता

मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के खिलाफ जारी राजनीतिक और कानूनी लड़ाई के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विरोध का एक अनूठा रूप अपनाया और इस मुद्दे पर 26 कविताएं लिखीं. ममता बनर्जी ने ‘एसआइआर: 26 इन 26’ नामक एक पुस्तक लिखी है, जिसमें उनकी ‘पैनिक’ (घबराहट), ‘डूम’ (विनाश), ‘मॉकरी’ (उपहास), ‘फाइट’ (लड़ाई), ‘डेमोक्रेसी’ (लोकतंत्र) और ‘हू इज टू बी ब्लेम्ड’ (दोष किसे दें) शीर्षक वाली कविताएं उल्लेखनीय हैं. पुस्तक की प्रस्तावना में ममता बनर्जी ने इसे ‘विनाशकारी खेल में अपनी जान गंवाने वालों’ को समर्पित किया है और आरोप लगाया है कि बंगाल के लोगों पर निरंतर भय का अभियान चलाया गया है. वह लिखती हैं कि ये कविताएं प्रतिरोध की भावना से उत्पन्न होती हैं. ‘डूम’ शीर्षक वाली कविता में वह लिखती हैं : हम कब तक चुप रहेंगे? इस खामोशी का मतलब शांति नहीं है- इसका मतलब है कि जीवन नष्ट हो रहे हैं, धीरे-धीरे लुप्त हो रहे हैं. कविता की अगली पंक्तियों में लिखा है : हमें जवाब चाहिए और जवाब जनता की अदालत में मिलेंगे. ‘मॉर्ग’ (मुर्दाघर) शीर्षक वाली एक अन्य कविता में कहा कि लोकतंत्र को पराजित किया जा रहा है, उसे बुरी तरह से कुचला जा रहा है और दावा किया गया है कि प्रदर्शन स्वयं ‘एजेंसी-राज’ की गिरफ्त में आ गये हैं. यहां संवाददाता सम्मेलन के दौरान पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उन्होंने यात्रा के दौरान तीन दिनों में यह किताब लिखी थी. ममता बनर्जी की 163 पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं. उन्होंने कहा कि वह पूर्व सांसद हैं, लेकिन पेंशन नहीं लेतीं और वह मुख्यमंत्री पद का वेतन भी नहीं लेती हैं. उन्होंने दावा किया कि इन्हीं पुस्तकों और अन्य रचनात्मक कार्यों से मिलने वाली रॉयल्टी से ही उनके निजी खर्च पूरे होते हैं.

तृणमूल ने कहा, अपनी बहुमुखी प्रतिभा के लिए जानी जाती हैं ममता: कांग्रेस की संस्थापक अपनी बहुमुखी रचनात्मक गतिविधियों के लिए जानी जाती हैं. एक लेखिका के रूप में उन्होंने कविता, लघु कथाएं, निबंध और राजनीतिक टिप्पणी सहित विभिन्न विधाओं में लेखन किया है. वह चित्रकार भी हैं, जिनकी कई कृतियों की प्रदर्शनी भारत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगायी जा चुकी हैं. उन्होंने सामाजिक विषयों, प्रकृति से लेकर मानवीय भावनाओं तक विभिन्न विषयों पर गीतों की रचना की है.

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