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Home पश्चिम-बंगाल कोलकाता बंगाल पर ‘मॉन्स्टर मानसून’ का खतरा, 72 घंटे में कोलकाता समेत दक्षिण बंगाल में मूसलाधार वर्षा का अलर्ट

बंगाल पर ‘मॉन्स्टर मानसून’ का खतरा, 72 घंटे में कोलकाता समेत दक्षिण बंगाल में मूसलाधार वर्षा का अलर्ट

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बंगाल पर ‘मॉन्स्टर मानसून’ का खतरा, 72 घंटे में कोलकाता समेत दक्षिण बंगाल में मूसलाधार वर्षा का अलर्ट
इसरो सैटेलाइट की तस्वीरें.

Bengal Weather Update: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अत्याधुनिक इनसैट-3डीआर (INSAT-3DR) मौसम उपग्रह ने अंतरिक्ष से एक तस्वीर कैद की है. इन सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा हुआ है कि उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी (Bay of Bengal) के ऊपर एक विशालकाय और बेहद शक्तिशाली चक्रवाती मानसून प्रणाली (Monster Monsoon System) सक्रिय है.

48 से 72 घंटे में मूसलाधार वर्षा का हाई अलर्ट

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस प्रणाली के कारण उत्तर ओडिशा और पश्चिम बंगाल के तटीय क्षेत्रों में एक गहरा डिप्रेशन (कम दबाव का क्षेत्र) विकसित हो चुका है. इसके प्रभाव से कोलकाता सहित पूरे गांगेय पश्चिम बंगाल (Gangetic West Bengal) में अगले 48 से 72 घंटों के भीतर मूसलाधार वर्षा होने का हाई अलर्ट जारी किया गया है.

सैटेलाइट तस्वीरों में दिखे चमकीले सफेद बादल

इसरो द्वारा जारी की इन्फ्रारेड सैटेलाइट तस्वीरों में बंगाल की खाड़ी से लेकर बांग्लादेश और संपूर्ण पश्चिम बंगाल के ऊपर गहरे, घने और अत्यधिक ठंडे क्युमुलोनिम्बस (Cumulonimbus) बादलों का एक विशालकाय सुरक्षा कवच दिखाई दे रहा है.

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समुद्र में मची हुई है भारी उथल-पुथल

इसरो की तस्वीरों में जो चमकीले सफेद बादल दिख रहे हैं, वे इस बात का संकेत दे रहे हैं कि समुद्र के भीतर उथल-पुथल मची हुई है. अत्यधिक नमी के कारण बादलों का वर्टिकल ग्रोथ बहुत तेजी से हुआ है. यह मौसमी ढांचा भीषण गरज-चमक के साथ विनाशकारी और लगातार होने वाली बारिश (Vigorous Thunderstorm Activity) को जन्म दे सकता है.

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Bengal Weather Update: मॉन्स्टर मानसून का बंगाल पर संभावित असर

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, मानसून की इस सक्रिय और उग्र स्थिति से राज्य को निम्नलिखित मोर्चों पर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है.

  1. शहरी बाढ़ और जलभराव (Urban Flooding): कोलकाता, हावड़ा, हुगली और सॉल्टलेक जैसे घनी आबादी वाले महानगरीय इलाकों के निचले हिस्सों में जलभराव और ट्रैफिक जाम की गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है.
  2. तटीय क्षेत्रों में हाई अलर्ट : दीघा, मंदारमणि, सुंदरवन और सागरद्वीप जैसे तटीय पर्यटन और रिहायशी क्षेत्रों में 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और समुद्र में ऊंची लहरें उठने की आशंका है. मछुआरों को समुद्र में न जाने की सख्त हिदायत दी गयी है.
  3. उत्तर बंगाल में भू-स्खलन की आशंका : उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल (दार्जिलिंग, कलिम्पोंग और अलीपुरदुआर) के पहाड़ी इलाकों में मूसलाधार वर्षा के चलते भू-स्खलन (Landslides) का खतरा बढ़ गया है.

बारिश की कमी पूरी, आपदा प्रबंधन मुस्तैद

प्रशासन के लिए राहत की बात यह है कि जून के महीने में मानसून की धीमी शुरुआत के कारण बंगाल में जो बारिश की कमी (Rainfall Deficit) थी, वह तेजी से कम हो रही है. हालांकि, अत्यधिक तीव्र बारिश के खतरे को देखते हुए कोलकाता नगर निगम (KMC) और राज्य आपदा प्रबंधन बल (SDRF) की टीमों को अलर्ट मोड पर रहने के आदेश दिये गये हैं.

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