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Home पश्चिम-बंगाल कोलकाता जंगलमहल से उत्तर बंगाल तक राजनीति के केंद्र में आदिवासी, पद्म श्री कोमली सोरेन से मिले शुभेंदु अधिकारी

जंगलमहल से उत्तर बंगाल तक राजनीति के केंद्र में आदिवासी, पद्म श्री कोमली सोरेन से मिले शुभेंदु अधिकारी

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जंगलमहल से उत्तर बंगाल तक राजनीति के केंद्र में आदिवासी, पद्म श्री कोमली सोरेन से मिले शुभेंदु अधिकारी
पद्म श्री कोमली सोरेन के साथ भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी.

Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले राज्य की राजनीति में आदिवासी समुदाय विमर्श के केंद्र में आ गया है. जंगलमहल से उत्तर बंगाल तक फैले आदिवासी इलाकों में राजनीतिक दलों की सक्रियता बढ़ गयी है. इसी कड़ी में बंगाल विधानसभा के लीडर ऑफ ऑपोजीशन शुभेंदु अधिकारी ने हाल ही में मालदा जिले के गजोले में पद्म श्री कोमली सोरेन से मुलाकात की. भाजपा ने इसे आदिवासी समाज के साथ संवाद और संपर्क बढ़ाने की पहल के रूप में पेश किया है.

भाजपा का आदिवासी आउटरीच अभियान

पद्म श्री कोमली से मुलाकात के दौरान शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि राज्य के कई हिस्सों में आदिवासी समुदाय अब भी विकास और बुनियादी सुविधाओं से वंचित है. उन्होंने कोमली सोरेन को आदिवासी संस्कृति की महत्वपूर्ण प्रतिनिधि बताया. भाजपा इस तरह की बैठकों के जरिये आदिवासी समुदाय के साथ अपने राजनीतिक संपर्क को मजबूत करने की कोशिश कर रही है. पार्टी की नजर खासतौर पर उन जिलों पर है, जहां आदिवासी आबादी निर्णायक भूमिका निभाती है.

इन इलाकों में अहम है आदिवासी वोट

जंगलमहल क्षेत्र, उत्तर बंगाल के कई हिस्से, बीरभूम, बांकुड़ा और पुरुलिया जैसे जिलों में आदिवासी मतदाता बड़ी संख्या में हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन क्षेत्रों में समर्थन हासिल करना 2026 के विधानसभा चुनाव में निर्णायक साबित हो सकता है. इसी वजह से दोनों प्रमुख दल इन इलाकों में अपनी राजनीतिक उपस्थिति बढ़ाने में जुटे हैं.

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दौरे से भी बढ़ी चर्चा

आदिवासी मुद्दों पर हाल ही में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पश्चिम बंगाल दौरे ने भी राजनीतिक बहस को तेज कर दिया. 7 मार्च 2026 को राष्ट्रपति ने सिलीगुड़ी के पास आयोजित अंतरराष्ट्रीय संताल सम्मेलन में हिस्सा लिया. कार्यक्रम सिलीगुड़ी के बिधाननगर में होना था, लेकिन बाद में इसे प्रशासन ने जगह की कमी के कारण इसे करीब 25 किलोमीटर दूर गोसाईंपुर स्थानांतरित कर दिया.

राष्ट्रपति के प्रोटोकॉल पर भी उठा विवाद

राष्ट्रपति के दौरे के दौरान प्रोटोकॉल को लेकर भी सवाल उठे. विपक्ष ने आरोप लगाया कि देश की सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन राष्ट्रपति के स्वागत के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी या राज्य का कोई मंत्री एयरपोर्ट पर नहीं पहुंचा. राष्ट्रपति का स्वागत सिलीगुड़ी के मेयर ने किया. विपक्षी नेताओं ने इसे स्थापित परंपरा से अलग बताया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी इस घटनाक्रम को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है.

पुराने विवाद भी फिर चर्चा में

  • आदिवासी समुदाय से जुड़े कई पुराने विवाद भी चर्चा में आ गये हैं. वर्ष 2022 में तृणमूल कांग्रेस के नेता अखिल गिरि ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पर ऐसी टिप्पणी की थी, जिसकी घोर आलोचना हुई थी.
  • वर्ष 2022 में ही अलीपुरद्वार में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आदिवासी महिलाओं के नृत्य में शामिल होने पर विवाद हुआ था. विपक्ष ने आरोप लगाया था कि कार्यक्रम में शामिल आदिवासी महिलाओं को दस्ताने पहनने के लिए कहा गया था.
  • वर्ष 2023 में बालूरघाट में 3 आदिवासी महिलाओं को कथित तौर पर भाजपा में शामिल होने के कारण दंडवत परिक्रमा करने के लिए मजबूर किये जाने का मामला भी चर्चा में आया था.
  • वर्ष 2025 में भाजपा के आदिवासी सांसद खगेन मुर्मू पर नागराकाटा में हमला भी राजनीतिक विवाद का कारण बना था. इस घटना के बाद उन्हें सर्जरी करानी पड़ी थी.

पीएम मोदी की रैली से पहले अभियान तेज

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 14 मार्च को कोलकाता में प्रस्तावित ब्रिगेड रैली से पहले इन घटनाओं के वीडियो के साथ प्रचार अभियान तेज किया जायेगा. बंगाल चुनाव 2026 में इन मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जायेगा.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
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