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बांग्ला को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने पर की सराहना

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बांग्ला को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने पर की सराहना

कोलकाता. पश्चिम बंगाल सहित देश के कुछ जानी-मानी हस्तियों के एक समूह ने गुरुवार को बांग्ला को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने के केंद्र सरकार के फैसले की सराहना करते हुए इसे सभी बंगालियों और बंगालीभाषी लोगों के लिए एक ऐतिहासिक पल बताया. हस्तियों ने बयान में कहा कि एक हजार वर्ष से भी अधिक पुरानी बंगाली भाषा अनेक विचारकों द्वारा लंबे समय तक किये गये ईमानदार प्रयासों के कारण विकसित और समृद्ध हुई है.

बयान पर हस्ताक्षर करने वाले 90 लोगों में अर्थशास्त्री बिबेक देबरॉय, इतिहासकार और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एमरेटस, दिलीप कुमार चक्रवर्ती, अर्थशास्त्री और भाजपा विधायक अशोक कुमार लाहिड़ी, पूर्व आइएफएस अधिकारी भास्वती मुखर्जी के अलावा कई विद्वान और शिक्षाविद शामिल थे. बंगाली को एक जीवंत भाषा बताते हुए उन्होंने कहा कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय, ईश्वर चंद्र विद्यासागर, रवींद्रनाथ टैगोर, काजी नजरूल इस्लाम और अनगिनत अन्य रचनात्मक दिमागों और विचारकों ने इस भाषा को समृद्ध और प्रचारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है.

बयान में कहा गया है कि हमारा राष्ट्रगान भी बंगाली भाषा में रचा गया है. बंगाली साहित्य ने सदियों से अनगिनत लोगों को प्रेरित किया है. इस भाषा की मिठास हमारे दिलों को छूती है. समय के साथ बंगाली भाषा ने अन्य भाषाओं के आयामों को भी अपने भीतर समाहित कर लिया है. उन्होंने कहा कि दुनिया भर के बंगाली सरकार के इस ऐतिहासिक निर्णय से खुश हैं और उन्होंने इस निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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