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Home पश्चिम-बंगाल कोलकाता अन्नपूर्णा भंडार योजना : 11 पन्ने के फॉर्म से पूरी कुंडली खंगालेगी शुभेंदु सरकार, आवेदन के लिए देने होंगे 30 सवालों के जवाब

अन्नपूर्णा भंडार योजना : 11 पन्ने के फॉर्म से पूरी कुंडली खंगालेगी शुभेंदु सरकार, आवेदन के लिए देने होंगे 30 सवालों के जवाब

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अन्नपूर्णा भंडार योजना : 11 पन्ने के फॉर्म से पूरी कुंडली खंगालेगी शुभेंदु सरकार, आवेदन के लिए देने होंगे 30 सवालों के जवाब

Annapurna Bhandar Yojana: पश्चिम बंगाल की राजनीति में योजनाओं के नाम बदलने और नये सिरे से डेटा संग्रह के मुद्दे पर सियासी पारा चढ़ गया है. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सरकार ने पूर्ववर्ती ममता बनर्जी सरकार की ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना का कायाकल्प करते हुए इसे ‘अन्नपूर्णा भंडार योजना’ के रूप में पेश किया है.

11 पेज का फैमिली लेवल डेटा कलेक्शन फॉर्म

यह सिर्फ नाम बदलना भर नहीं है. सरकार ने इस योजना के लिए 11 पन्नों का एक विस्तृत ‘फैमिली लेवल डेटा कलेक्शन फॉर्म’ जारी किया है, जो लाभार्थियों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति का ‘एक्स-रे’ कर देगा. इस फॉर्म में मांगी गयी जानकारियां इतनी विस्तृत हैं कि अब केवल नाममात्र के आवेदन से काम नहीं चलेगा.

महा-फॉर्म में क्या-क्या पूछा जा रहा?

अन्नपूर्णा भंडार योजना के आवेदन पत्र में परिवार के हर सदस्य की विस्तृत जानकारी मांगी गयी है. इसे 6 मुख्य वर्गों में बांटा गया है. इसमें पारिवारिक पहचान, आवास और जमीन का ब्योरा, आर्थिक स्थिति और संपत्ति के साथ-साथ आय के स्रोत शामिल हैं.

  • पारिवारिक पहचान (Family Identity): राशन कार्ड नंबर, मतदाता पहचान पत्र (Voter ID) और परिवार के मुखिया की जानकारी देनी होगी.
  • आवास और जमीन का ब्योरा : आपके पास अपना घर है या नहीं? घर कच्चा है या पक्का? आपके नाम पर कितनी खेती की जमीन है? इन सबका विवरण देना होगा.
  • आर्थिक स्थिति और संपत्ति : फॉर्म में पूछा जा रहा है कि क्या परिवार के पास चार पहिया वाहन, ट्रैक्टर या मछली पकड़ने वाली नाव है? क्या घर में रेफ्रिजरेटर, वाशिंग मशीन या एयर कंडीशनर (AC) है?
  • आय के स्रोत : परिवार का कोई सदस्य सरकारी नौकरी में है या नहीं? क्या परिवार की मासिक आय 15,000 रुपए से अधिक है? इसके अलावा, क्या परिवार का कोई सदस्य आयकर (Income Tax) भरता है?

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पेंशन और बैंक की पूरी ‘कुंडली’

शुभेंदु अधिकारी की सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि योजना का लाभ केवल जरूरतमंदों को मिले. इसलिए जरूरी जनकारी आवेदन करने वालों से मांग रही है, जो इस प्रकार है.

  • पिछली योजनाओं का डेटा : फॉर्म में पूछा गया है कि क्या लाभार्थी को पहले से ‘लक्ष्मी भंडार’, ‘वृद्धावस्था पेंशन’ या ‘विधवा पेंशन’ मिल रही है?
  • बैंक अकाउंट और डीबीटी : बैंक का नाम, ब्रांच, आईएफएससी कोड और बैंक अकाउंट से मोबाइल नंबर लिंक होने की जानकारी मांगी गयी है.
  • शिक्षा और स्वास्थ्य : परिवार के बच्चों की शिक्षा और सदस्यों की पुरानी बीमारियों का डेटा भी इस 11 पन्ने के फॉर्म का हिस्सा है.

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Annapurna Bhandar Yojana: क्यों खास है यह फॉर्म?

पिछली सरकार की तुलना में यह योजना अधिक डेटा-संचालित (Data-driven) है. क्यों खास है यह फॉर्म, यहां जानें.

  • फिल्टरेशन प्रोसेस : 11 पन्नों की इस जानकारी के जरिये सरकार उन अपात्र लोगों को बाहर करेगी, जो आर्थिक रूप से संपन्न होने के बावजूद सरकारी मदद ले रहे थे.
  • डिजिटल मैपिंग : इस फॉर्म के डेटा को सीधे राज्य के मुख्य सर्वर से जोड़ा जायेगा, ताकि भविष्य में जरूरतमंद लोगों को अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ देना आसान होगा.
  • सत्यापन की सख्ती : फॉर्म के अंत में एक घोषणा पत्र है, जिसमें गलत जानकारी देने पर कानूनी कार्रवाई और दी गयी सहायता राशि की वसूली का प्रावधान है.

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कैसे और कहां जमा होगा आवेदन?

अधिकारियों के मुताबिक, यह फॉर्म पंचायत और नगरपालिका स्तर पर आयोजित होने वाले विशेष कैंपों में मिलेगा.

आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज

  1. राशन कार्ड
  2. वोटर आईडी
  3. बैंक पासबुक की फोटोकॉपी

हेल्पलाइन नंबर

सरकार जल्द ही एक टोल-फ्री नंबर जारी करेगी, जहां आवेदन प्रक्रिया से जुड़ी समस्याओं का समाधान किया जायेगा.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
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