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Home पश्चिम-बंगाल कोलकाता तृणमूल सरकार के कुप्रबंधन से चरमरायी पश्चिम बंगाल की कृषि व्यवस्था: शमिक

तृणमूल सरकार के कुप्रबंधन से चरमरायी पश्चिम बंगाल की कृषि व्यवस्था: शमिक

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तृणमूल सरकार के कुप्रबंधन से चरमरायी पश्चिम बंगाल की कृषि व्यवस्था: शमिक

कोलकाता. प्रदेश भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने मंगलवार को तृणमूल कांग्रेस सरकार पर राज्य की कृषि व्यवस्था को लेकर तीखा हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार, शोषण और राजनीतिक कब्जे ने बंगाल की कृषि रीढ़ को कमजोर कर दिया है. भाजपा के सॉल्टलेक स्थित कार्यालय में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि कभी ‘भारत का धान का कटोरा’ कहलाने वाला बर्दवान आज धान उत्पादन में उत्तर प्रदेश और तेलंगाना के बाद तीसरे स्थान पर खिसक गया है. इसके पीछे उन्होंने तृणमूल सरकार के वर्षों पुराने कुप्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया. आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए भट्टाचार्य ने दावा किया कि देशभर में नकली उर्वरक आपूर्ति से जुड़े कुल 6,076 मामलों में से 3,177 मामले अकेले पश्चिम बंगाल में दर्ज हुए हैं. उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि यही तृणमूल का असली ‘इगिये बांग्ला’ मॉडल है. मत्स्य पालन के क्षेत्र में भी उन्होंने राज्य सरकार की कड़ी आलोचना की. भट्टाचार्य के अनुसार, जहां राष्ट्रीय मत्स्य विकास दर 26 प्रतिशत है, वहीं बंगाल में यह सिर्फ 15 प्रतिशत रह गयी है. उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल नेताओं के संरक्षण में सक्रिय सिंडिकेट ने कई तालाब व जलाशयों पर अवैध कब्जे कर रखे हैं, जिससे राज्य को आंध्र प्रदेश से मछलियां खरीदने पर मजबूर होना पड़ रहा है. भट्टाचार्य ने कहा कि जहां अन्य राज्यों में किसानों को कृषि उपयोग की बिजली पर सब्सिडी मिलती है, वहीं पश्चिम बंगाल के किसानों को ऐसी कोई सुविधा नहीं दी जाती. उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों से अधिक बिजली शुल्क वसूला जा रहा है.

पीएम-किसान: बंगाल के किसानों को मिला 10,500 करोड़

शमिक भट्टाचार्य ने बताया कि पीएम-किसान योजना की 21वीं किश्त जारी कर दी गयी है, जिसके तहत पश्चिम बंगाल के 46 लाख किसानों को 920 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की देरी के कारण किसान इस योजना की पहली नौ किश्तों से वंचित रह गये थे, लेकिन योजना में शामिल होने के बाद से अब तक उन्हें 11 किश्तें मिल चुकी हैं. कुल मिलाकर बंगाल के किसानों को अब तक 10,500 करोड़ रुपये वितरित किये जा चुके हैं.

दो वर्षों में बर्दवान में 100 से अधिक चावल मिलें बंद

भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि राज्य का हथकरघा उद्योग बुरी तरह प्रभावित है. चावल मिलें बंद हो रही हैं और कृषि भूमि को राजनीतिक रूप से जुड़े रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में बदला जा रहा है. उन्होंने दावा किया कि बर्दवान में केवल दो से तीन वर्षों के भीतर 100 से अधिक चावल मिलें बंद हो गयी हैं. उन्होंने ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की खराब स्थिति का भी उल्लेख किया. उनके अनुसार, चाय व फूलों के बागानों में सर्पदंश से होने वाली मौतें इस बात का प्रमाण हैं कि कई अस्पतालों में एंटी-वेनम और जीवन रक्षक दवाओं का भारी अभाव है.

किसानों को एमएसपी का लाभ नहीं, मंडियों में दलाल सक्रिय

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि राज्य की मंडियों में दलालों का दबदबा है, जिसके कारण किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का पूरा लाभ नहीं मिल पाता. उन्होंने नाबार्ड की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल के किसान, पंजाब के किसानों की तुलना में मुश्किल से एक-तिहाई कमाई करते हैं. उन्होंने कीटनाशकों के दुरुपयोग पर भी चिंता जतायी. निगरानी तंत्र की कमी के कारण ब्राउन प्लांट हॉपर कीट को मारने के लिए इस्तेमाल किये जाने वाले रसायन फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं. भट्टाचार्य ने कहा कि उत्तर बंगाल के आम उत्पादक कोल्ड स्टोरेज की कमी से परेशान हैं, जबकि चाय बागानों के मजदूरों को भविष्य निधि खातों में अनियमितताओं का सामना करना पड़ रहा है. उनका आरोप था कि कृषि से लेकर मत्स्य पालन तक, चाय बागानों से लेकर नदी प्रणालियों तक तृणमूल सरकार ने बंगाल की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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