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Home Rajya पश्चिम-बंगाल बुद्धदेव की स्मृति सभा में भी गूंजा ”जस्टिस फॉर आरजी कर”

बुद्धदेव की स्मृति सभा में भी गूंजा ”जस्टिस फॉर आरजी कर”

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बुद्धदेव की स्मृति सभा में भी गूंजा ”जस्टिस फॉर आरजी कर”

सभा में मौजूद रहे सौरभ गांगुली व स्नेहाशीष गांगुली सहित विभिन्न दलों के नेता कोलकाता. नेताजी इंडोर स्टेडियम में गुरुवार को दिवंगत मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य को लेकर जितनी गूंज सुनायी दी, उतनी ही गूंज आरजी कर की घटना को लेकर भी सुनायी पड़ी. ””””जस्टिस फॉर आरजी कर”””” के स्लोगन से पूरा नेताजी इंडोर स्टेडियम गूंज उठा. बता दें कि माकपा की ओर से दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य को लेकर यहां स्मरण सभा का आयोजन किया गया था. सभा के अंत में भी आरजी कर की ही गूंज सुनायी पड़ी. सभा की शुरुआत में बुद्धदेव के राजनीतिक जीवन पर एक वीडियो का प्रसारण किया गया. इस दौरान उनकी पत्नी मीरा भट्टाचार्य ने कहा कि इस्ट इंडिया कंपनी विषय पर उनके पति ने एक उपन्यास लिखना शुरू किया था. लेकिन बीमार रहने के कारण वह उसे पूरा नहीं कर पाये. इस स्मरण सभा में लोगों की काफी भीड़ देखी गयी. बुद्धदेव भट्टाचार्य के पुत्र सुचेतन भी मौजूद रहे. मौके पर माकपा के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने बुद्धदेव भट्टाचार्य के राजनीतिक जीवन पर प्रकाश डाला. बिमान बसु से लेकर सूर्यकांत मिश्रा ने भी अपनी बातें रखीं. कार्यक्रम में पार्टी के महासचिव सीताराम येचुरी के आने की बात थी, लेकिन अस्पताल में भर्ती होने के कारण वह नहीं पहुंच सके. उन्होंने अस्पताल से ही एक वीडियो वार्ता भेजा था. बिमान बसु ने बुद्धदेव भट्टाचार्य के सांस्कृतिक मूल्यबोध व राजनीतिक से जुड़ीं बातों का उल्लेख किया. वहीं, सूर्यकांत मिश्रा ने कहा कि जब बुद्धदेव दा को पहली बार अस्पताल में भर्ती कराया गया था, तो वह राज्य सचिव थे. उस समय किसी काम से वह बाहर थे. थोड़ा ठीक होने पर वह अस्पताल में नहीं रहना चाहते थे. बाद में वह स्वयं अस्पताल गये. उन्हें देखते ही बुद्ध बाबू ने साफ कहा कि माइ लाइफ इज माइ लाइफ. तब मैंने उनसे कहा था कि यूओर लाइफ इज नॉट यूओर लाइफ. यह आपकी संपत्ति नहीं है. यह पार्टी की संपत्ति नहीं है. इसके बाद वह कुछ नरम पड़े थे. सभा में वाममोर्चा के नेताओं सहित कांग्रेस नेता प्रदीप भट्टाचार्य, कांग्रेस नेता अब्दुल मन्नान, पूर्व नक्सल नेता असीम चट्टोपाध्याय भी पहुंचे थे. बंगाल के एनसीपी व राजद के नेता भी मौजूद रहे. इसके अलावा एसयूसीआइ के राज्य सचिव चंडीदास भट्टाचार्य, आरएसपी से मनोज भट्टाचार्य, भाकपा, फाॅरवर्ड ब्लॉक, समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधियों ने भी मौके पर पहुंच कर बुद्धदेव भट्टाचार्य को श्रद्धांजलि दी. माकपा के आमंत्रण पर भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरभ गांगुली व स्नेहाशीष गांगुली भी स्मरण सभा में उपस्थित थे. अंतिम वक्ता के रूप में मो सलीम ने कहा कि सभी व्यक्ति में कुछ दोष व गुण होते हैं. कोई 100 फीसदी ठीक नहीं हो सकता, लेकिन बुद्धदेव भट्टाचार्य ने जो सपना दिखाया था, उसमें कहीं असत्य नहीं था. उनका एक ही उद्देश्य था, नये बंगाल का निर्माण करना, ताकि नयी पीढ़ी अपने पैरों पर खड़ी हो सके. 2015 में ब्रिगेड रैली में बुद्धदेव भट्टाचार्य ने अंतिम भाषण दिया था. उन्होंने कहा था कि यह लड़ाई लड़नी होगी. हमें लड़ाई जीतनी होगी. मो सलीम ने भी इसी बात को दोहराया. इस सभा में तृणमूल कांग्रेस को छोड़ कर सभी दलों को आमंत्रण भेजा गया था. इस बारे में माकपा नेता रोबिन देब ने कहा कि पार्टी की ओर से किसी को खास तौर से आमंत्रण नहीं भेजा गया था. जो भी लोग यहां पहुंचे थे, वह व्यक्तिगत रूप से आये थे. सभी नेताओं ने बुद्धदेव भट्टाचार्य को श्रद्धांजलि अर्पित की.

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