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Home Rajya पश्चिम-बंगाल 31 कच्चे घरों पर चला बुलडोजर, नहीं हुआ विरोध

31 कच्चे घरों पर चला बुलडोजर, नहीं हुआ विरोध

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31 कच्चे घरों पर चला बुलडोजर, नहीं हुआ विरोध

आसनसोल/रूपनारायणपुर.

चित्तरंजन रेल इंजन कारखाना (चिरेका) प्रशासन ने अपने रेल नगरी चित्तरंजन को अतिक्रमणमुक्त बनाने के तहत गुरुवार को केंद्रीय विद्यालय संलग्न स्थित बस्ती में बने सारे अवैध निर्माणों को ध्वस्त कर दिया. गत 17 जून को नोटिस देकर प्रबंधन ने बस्ती में रहनेवाले सभी को आवास खाली कर देने के लिए कहा था. अन्यथा 18 जुलाई को प्रबंधन खुद इस बस्ती को हटाने की प्रक्रिया अपनायेगा. प्रबंधन के रवैये को देखते हुए सभी लोग पहले ही आवास खाली कर चुके थे. गुरुवार अपनी आंखों के सामने दशकों से बसे आशियाने को टूटने का उन्होंने नजारा देखा. प्रबंधन को किसी प्रकार के कोई विरोध का सामना नहीं करना पड़ा. इसके बाद फतेहपुर इलाके में अतिक्रमणमुक्त अभियान चलेगा. यहां भी अवैध निर्माणों को हटाने के लिए 15 जुलाई तक का समय दिया गया था. सूत्रों के अनुसार 25 जुलाई को यहां दो बस्तियों में बने करीब 50 आवास, वैध दुकानों के साथ अवैध रूप से निर्मित ढांचे और पूर्णरूप से अवैध दुकानों को तोड़ने का कार्य हो सकता है. फतेहपुर बाजार के लोगों ने चिरेका के उप महाप्रबंधक से मुलाकात कर बरसात बाद तक का समय देने की अपील की. प्रबंधन किसी प्रकार की कोई रियायत देने के मूड में नहीं है. लोगों को निराश लौटना पड़ा. गौरतलब है कि चिरेका प्रशासन अपने नगरी को अतिक्रमणमुक्त बनाने का अभियान समय-समय पर चलाता है. काफी हद तक सफलता मिलती है. फिर मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है. इस बार लोकसभा चुनाव के बाद से प्रबंधन के अतिक्रमणमुक्त अभियान से अतिक्रमणकारियों में डर पैदा हो गया है. पिछले साल भी कुछ अभियान चला था. फिर यह बंद हो गया था. इसबार चरणबद्ध तरीके से यह आंदोलन शुरू हुआ है. पिछले माह में सिमजूड़ी बाजार इलाके में 26 अवैध निर्माणों में तोड़ा गया था. जिसमें अवैध निर्मित दुकानों के साथ वैध दुकानों के साथ अतिक्रमण करके बनाये गये अवैध निर्माणों को भी तोड़ा गया. चित्तरंजन रेल नगरी में स्थित बाजारों में अधिकांश वैध दुकानों के मालिकों ने कुछ जमीन का अतिक्रमण किया है. जिसमें कई बड़े-बड़े दुकानदार शामिल हैं, जिनकी सूची तैयार है और उन्हें नोटिस भेजा जा रहा है. इसी कड़ी में गुरुवार को केंद्रीय विद्यालय संलग्न बस्ती में 31 अवैध निर्माणों को तोड़ दिया गया. भारी सुरक्षा व्यवस्था के साथ प्रबंधन के अधिकारी वहां पहुंचे और लोगों को वहां से हटने के लिए कहा. जिसके बाद जेसीबी लगाकर सारे मकानों को ध्वस्त कर दिया गया. इन घरों में गरीब तबके के लोग रहते थे. दिहाड़ी श्रमिक, लोगों के घरों में काम करनेवालों से लेकर रिक्शाचालक, ठेलाचालक आदि करीब 20 वर्षों से अधिक समय से यहां रह रहे थे. यही इनके बच्चे रेल नगरी के विभिन्न स्कूलों में भी पढ़ते हैं.

इन सभी की परेशानी बढ़ गयी है.

सरकार के अतिक्रमण रोधी अभियान से रेलवे को हुआ है लाभ चिरेका प्रबंधन ने जब भी अवैध निर्माणों को तोड़ने को लेकर नोटिस जारी किया है, इसके तुरंत बाद ही राजनीतिक हस्तक्षेप शुरू हो जाता था. स्थानीय विधायक विधान उपाध्याय कई बार चिरेका के महाप्रबंधक के साथ बैठक करके लोगों के लिए कुछ मोहलत निकलवाते थे. फिलहाल राज्य सरकार ही अतिक्रमणमुक्त अभियान शुरू किये हुए है, ऐसे में स्थानीय राजनीति का इस अभियान में कोई हस्तक्षेप नहीं होने से प्रबंधन का काम आसानी से हो रहा है. बौमार्केट इलाके में एक दो दिग्गजों पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं कि प्रबंधन उनके साथ क्या करता है?

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