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गलत के खिलाफ आवाज उठाना भी गुनाह है?

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गलत के खिलाफ आवाज उठाना भी गुनाह है?

कोलकाता.

कलकत्ता हाइकोर्ट की न्यायाधीश अमृता सिन्हा ने बुधवार को एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि क्या गलत के खिलाफ आवाज उठाना भी गुनाह हो गया है. लोग अब आवाज भी नहीं उठा सकते. न्यायाधीश ने पुलिस की अतिसक्रियता पर भी सवाल उठाया. बुधवार को मामले की सुनवाई करते हुए कलकत्ता उच्च न्यायालय की न्यायाधीश अमृता सिन्हा ने बुधवार को एक शख्स को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया, जिसे हावड़ा में तालाबों को अवैध रूप से भरने के मामले में कथित रूप से सोशल मीडिया पर भड़ास निकालने के बाद पुलिस ने गिरफ्तार किया था. अदालत ने कहा कि सिर्फ इसलिए कि आरोपी ने गलत कामों और भ्रष्टाचार को उजागर करने की कोशिश की, पुलिस को इतना कड़ा कदम नहीं उठाना चाहिए था. न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा ने गिरफ्तारी को पुलिस की ओर से अत्याचारपूर्ण कृत्य करार देते हुए उसे तत्काल रिहा करने का आदेश दिया.

आरोपी इरशाद सुल्तान की पत्नी ने पुलिस पर कठोर कार्रवाई का आरोप लगाते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की. इरशाद सुल्तान को 30 जून को हावड़ा में शिवपुर पुलिस ने कथित तौर पर इसलिए गिरफ्तार कर लिया था, क्योंकि उन्होंने एक जुलाई को जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थित होने के नोटिस की अनदेखी कर दी थी. 28 जून को इरशाद सुल्तान के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गयी थी. इरशाद सुल्तान की पत्नी ने हाइकोर्ट में याचिका दायर कर पुलिस पर अतिसक्रियता का आरोप लगाया था. उन्होंने अपनी याचिका में कहा था कि उनके पति ने हावड़ा में एक अवैध निर्माण को लेकर आवाज उठायी थी और अंतत प्रशासन को वह अवैध निर्माण तोड़ना पड़ा था. जेल से रिहा होने के बाद इरशाद सुल्तान ने संवाददाओं से बातचीत में कहा कि वह आगे भी अन्याय के खिलाफ आवाज उठाते रहेंगे.

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