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ड्रग एडिक्ट कैदियों का जेल में ही होगा इलाज

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ड्रग एडिक्ट कैदियों का जेल में ही होगा इलाज

शिव कुमार राउत, कोलकाता

राज्य प्रशासनिक सुधार विभाग की ओर से यहां के पांच केंद्रीय कारागार में नशा मुक्ति केंद्र खोले गये हैं, जहां ड्रग एडिक्ट कैदियों का इलाज किया जायेगा. इनमें प्रेसीडेंसी, दमदम, बहरामपुर, बारुईपुर और जलपाईगुड़ी सेंट्रल जेल शामिल हैं. प्रत्येक संशोधनागार में 15 बेडों की व्यवस्था की गयी है, जहां जल्द ही चिकित्सा शुरू होगी. यह जानकारी विभाग के एक अधिकारी ने दी. उन्होंने बताया कि कई अपराधी ऐसे भी होते हैं, जो नशे की लत के साथ जेल पहुंचते हैं. जेल में मादक पदार्थ नहीं मिलने पर कभी-कभार वे हिंसक हो जाते हैं. कई बार खुद को भी चोटिल कर लेते हैं. ऐसे कैदियों का शारीरिक और मानसिक इलाज कराना पड़ता है. इसके लिए उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ता है. कई बार ऐसा भी होता है कि अस्पताल ले जाने में थोड़ी देर हो जाती है. समय पर इलाज नहीं मिल पाने के कारण कुछ मामलों में इस तरह के कैदियों की मौत भी हो जाती है. अब नशा मुक्ति केंद्रों जेल में खुल जाने से ऐसे कैदी को तुरंत चिकित्सा मुहैया करायी जा जायेगी.

अधिकारी ने बताया कि नशा मुक्ति केंद्र के महत्व को समझते हुए विभाग ने राज्य के समाज कल्याण विभाग से संपर्क किया था. आखिरकार समाज कल्याण विभाग की मदद से पांच सेंट्रल जेलों में नशा मुक्त केंद्र खोले गये.

सफल रही पायलट प्रोजेक्ट योजना

विभाग के अधिकारी ने बताया कि केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के नेशनल एक्शन प्लान फॉर ड्रग्स डिमांड रिडक्शन (एनएपीडीडीआर) की मदद से एक पायलट प्रोजेक्ट के तहत पहले बारुईपुर और दमदम सेंट्रल जेल में नशा मुक्ति केंद्र का संचालन किया गया. इसके सफल होने पर अन्य तीन जेलों में यह व्यवस्था की गयी. इस कार्य में एक निजी संगठन भी मदद कर रहा है.

चिकित्साकर्मियों की भर्ती प्रक्रिया शुरू

विभाग के अधिकारी ने बताया कि राज्य में स्थित पांच सेंट्रल जेलों में नशा मुक्ति केंद्र के लिए चिकित्साकर्मियों को नियुक्त करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गयी है. ताकि गंभीर रूप से बीमार और नशे की लत वाले कैदियों का जेल में ही इलाज तत्परता के साथ हो सके. ज्ञात हो कि राज्य में आठ केंद्रीय कारागार सहित कुल 60 संशोधनागार हैं. इन संशोधनागारों में करीब 26000 कैदी रखे गये हैं.

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