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सेल प्रबंधन के पूर्व महाप्रबंधक के खिलाफ हीरापुर थाना में दर्ज कराया जालसाजी का मामला

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सेल प्रबंधन के पूर्व महाप्रबंधक के खिलाफ हीरापुर थाना में दर्ज कराया जालसाजी का मामला

आसनसोल. सेल आइएसपी बर्नपुर के अतिरिक्त महाप्रबंधक (लॉ) शुभमय सरकार ने कंपनी के पूर्व महाप्रबंधक राजीव कुमार के खिलाफ हीरापुर थाना में अवैध दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करके जालसाजी/धोखाधड़ी करने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज करायी. शिकायत के आधार पर हीरापुर थाने में कांड संख्या 203/24 में आइपीसी की धारा 465/468/471/420 के तहत प्राथमिकी दर्ज हुई है. पुलिस इस मामले की जांच में जुट गयी है.

इसमें काफी बड़े-बड़े लोगों के जुड़े होने की संभावना जतायी जा रही है. राजीव कुमार फरवरी 2024 में रिटायर हुए हैं. प्रबंधन का उनसे कोई संपर्क नहीं हो रहा है. जिसके उपरांत ही प्राथमिकी दर्ज करायी गयी.

शिकायत में हस्ताक्षर की फॉरेंसिक जांच की मांग की है अधिकारी ने ःश्री सरकार ने अपनी शिकायत में राजीव कुमार को पूरा ब्यौरा देते हुए लिखा है कि उन्हें पकड़ कर पूछताछ करें कि क्या उन्होंने इन कागजातों पर हस्ताक्षर किया है? या सभी पत्रों पर दिखाई देनेवाले उनके हस्ताक्षर जाली हैं. इस्को बर्नपुर, इस्को कुल्टी और इस्को डीएसपी के रिकॉर्ड से राजीव कुमार के हस्ताक्षर के नमूनों को लेकर उचित फॉरेंसिक विश्लेषण किया जाये.

क्या उन्होंने वास्तव में कंपनी के खिलाफ अपराध किया है या फिर उनके फर्जी हस्ताक्षर का उपयोग किया गया है. इसकी जानकारी कंपनी को मुहैया कराने की अपील की गयी है.

सूत्रों के अनुसार यह मामला काफी हाई प्रोफाइल है. पुलिस पर भी जांच को लेकर दबाव बन सकता है.

राजीव कुमार पर लगा पहला आरोप

अतिरिक्त महाप्रबंधक (लॉ) श्री सरकार ने अपनी शिकायत में लिखा कि सेल इस्को ने सेल कुल्टी टाउनशिप में क्वार्टरों के आवंटन के लिए एक परिपत्र लाया था. जिसके तहत चार जनवरी 2014 को कृष्ण कुमार तिवारी को स्टेशन रोड कुल्टी में बंगला नंबर दो का आवंटन दो साल के लिए बढ़ा दिया गया. पत्र पर सेल जीडब्ल्यू के वरिष्ठ प्रबंधक (पीएंडए) राजीव कुमार द्वारा हस्ताक्षर किया गया था. जिसका प्रतिधारण 2016 में समाप्त हो गया. श्री तिवारी ने रिटेंशन के लिए पुनः कभी आवेदन नहीं किया. कानून के तहत क्वार्टरों पर अनाधिकृत कब्जे को लेकर सेल आइएसपी ने स्टेट कोर्ट में श्री तिवारी के खिलाफ बेदखली की कार्रवाई शुरू की. जिसके बाद श्री तिवारी ने एक और ऑर्डर लेटर का खुलासा किया जिसपर चार जनवरी 2014 को ही राजीव कुमार का ही हस्ताक्षर है. जिसमें आवास को खाली करने की कोई समय अवधि नहीं दी गयी. श्री तिवारी को अनिश्चितकाल के लिए बंगले पर कब्जा बनाये रखने की अनुमति दी गयी है. यह पत्र 28 मार्च 2024 को प्रबंधन को प्राप्त हुआ. इस पत्र की कोई प्रति प्रबंधन के पास नहीं है. ऐसा प्रतीत होता है कि यह कंपनी की जानकारी और अनुमति के बगैर किया गया है. संदेह है कि राजीव कुमार ने कंपनी के खिलाफ जालसाजी की है. जिसमें कंपनी के अनुमति के बगैर श्री तिवारी को अवैध रूप से बंगला सौंपने के लिए नियम व शर्तों को बदलते हुए दूसरे दस्तावेज पर हस्ताक्षर किया गया है. जो अनिश्चित काल के लिए है.

राजीव कुमार पर लगा दूसरा आरोप

अतिरिक्त महाप्रबंधक (लॉ) श्री सरकार ने राजीव कुमार पर दूसरा यह आरोप लगाया कि डब्ल्यूबीएसइडीसीएल (बराकर सीसीसी) के सहायक अभियंता और स्टेशन प्रबंधक के माध्यम से ईमेल पर चार जुलाई 2024 को एक पत्र प्राप्त हुआ. जिसमें प्रियदर्शिनी पब्लिक स्कूल को भूमि प्रदान करने का राजीव कुमार द्वारा हस्ताक्षरित अनापत्ति प्रमाण पत्र है. स्कूल प्रबंधन ने सेल कुल्टी के टाउनशिप परिसर में डब्ल्यूबीएसइडीसीएल के माध्यम के अलग बिजली कनेक्शन प्राप्त करने के लिए बिजली विभाग से संपर्क किया था और 28 अप्रैल 2014 को सेल से राजीव कुमार का हस्ताक्षर किया हुआ एनओसी उन्हें मिला था. इस्को के आधिकारिक रिकॉर्ड की जांच की गयी और ऐसा कोई पत्र नहीं मिला है. राजीव कुमार द्वारा प्रियदर्शिनी स्कूल को जारी किया गया एनओसी का इस्को में कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं है. इस तरह का एनओसी जारी करने का कोई आदेश भी राजीव कुमार को नहीं दिया गया था. हस्ताक्षर अस्पष्ट और नकली प्रतीत होता है. राजीव कुमार सेल डीएसपी से 29 फरवरी 2024 को रिटायर हुए. उनसे संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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