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स्कूलों में अब भी रह रहे सीएपीएफ के जवान

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स्कूलों में अब भी रह रहे सीएपीएफ के जवान

छात्रों की पढ़ाई हो रही प्रभावित : हाइकोर्ट

संवाददाता, कोलकाता

लोकसभा चुनाव खत्म होने के बावजूद राज्य में कई स्कूल अब भी नहीं खुल सके हैं, क्योंकि चुनाव आयोग के निर्देश पर केंद्रीय सुरक्षा बल यानी सीएपीएफ के जवान अभी भी यहां मौजूद हैं. इसे लेकर कलकत्ता हाइकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी. इससे पहले, हाइकोर्ट के न्यायाधीश हरीश टंडन व न्यायाधीश हिरण्मय भट्टाचार्य की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा था कि इस प्रकार से बच्चों की पढ़ाई बाधित नहीं की जा सकती है. उन्होंने राज्य सरकार को वैकल्पिक व्यवस्था करने का निर्देश दिया था. लेकिन आरोप है कि अब तक कई स्कूलों में सीएपीएफ जवान रह रहे हैं, जिससे वहां अब तक पढ़ाई शुरू नहीं हो पायी है. इस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. अदालत ने राज्य सरकार से पूछा है कि ऐसे कितने स्कूल हैं, जहां सीएपीएफ जवान रह रहे हैं. उनके लिए कहां रहने की व्यवस्था की गयी है. इसकी पूरी जानकारी 18 जून को मामले की सुनवाई के दिन राज्य सरकार को देनी होगी. गौरतलब है कि राज्य में चुनाव बाद की हिंसा को रोकने के लिए निर्वाचन आयोग ने केंद्रीय बलों को कुछ हफ्तों तक यहां रखने का सुझाव दिया है. चुनाव आयोग ने कहा है कि केंद्रीय बल 19 जून तक राज्य के संवेदनशील इलाकों में रहेंगे. लेकिन अब हाइकोर्ट ने इसे दो दिन और बढ़ा कर 21 जून तक कर दिया है. माना जा रहा है कि 21 जून तक सीएपीएफ जवान यहां रहेंगे, तो क्या तब तक स्कूल बंद रहेंगे. इस पर चिंता जाहिर करते हुए हाइकोर्ट ने राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी है.

हालांकि, इसे लेकर राज्य सरकार ने भी स्कूलों को जल्द से जल्द खाली करने का निर्देश दिया है. इसे लेकर राज्य सचिवालय ने संबंधित जिलाधिकारियों को सीएपीएफ जवानों के रहने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने का निर्देश दिया है. लेकिन आरोप है कि अभी भी कई जगहाें पर स्कूलों में केंद्रीय बल के जवान रह रहे हैं.छात्रों की पढ़ाई हो रही प्रभावित : हाइकोर्ट

संवाददाता, कोलकाता

लोकसभा चुनाव खत्म होने के बावजूद राज्य में कई स्कूल अब भी नहीं खुल सके हैं, क्योंकि चुनाव आयोग के निर्देश पर केंद्रीय सुरक्षा बल यानी सीएपीएफ के जवान अभी भी यहां मौजूद हैं. इसे लेकर कलकत्ता हाइकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी. इससे पहले, हाइकोर्ट के न्यायाधीश हरीश टंडन व न्यायाधीश हिरण्मय भट्टाचार्य की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा था कि इस प्रकार से बच्चों की पढ़ाई बाधित नहीं की जा सकती है. उन्होंने राज्य सरकार को वैकल्पिक व्यवस्था करने का निर्देश दिया था. लेकिन आरोप है कि अब तक कई स्कूलों में सीएपीएफ जवान रह रहे हैं, जिससे वहां अब तक पढ़ाई शुरू नहीं हो पायी है. इस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. अदालत ने राज्य सरकार से पूछा है कि ऐसे कितने स्कूल हैं, जहां सीएपीएफ जवान रह रहे हैं. उनके लिए कहां रहने की व्यवस्था की गयी है. इसकी पूरी जानकारी 18 जून को मामले की सुनवाई के दिन राज्य सरकार को देनी होगी. गौरतलब है कि राज्य में चुनाव बाद की हिंसा को रोकने के लिए निर्वाचन आयोग ने केंद्रीय बलों को कुछ हफ्तों तक यहां रखने का सुझाव दिया है. चुनाव आयोग ने कहा है कि केंद्रीय बल 19 जून तक राज्य के संवेदनशील इलाकों में रहेंगे. लेकिन अब हाइकोर्ट ने इसे दो दिन और बढ़ा कर 21 जून तक कर दिया है. माना जा रहा है कि 21 जून तक सीएपीएफ जवान यहां रहेंगे, तो क्या तब तक स्कूल बंद रहेंगे. इस पर चिंता जाहिर करते हुए हाइकोर्ट ने राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी है.

हालांकि, इसे लेकर राज्य सरकार ने भी स्कूलों को जल्द से जल्द खाली करने का निर्देश दिया है. इसे लेकर राज्य सचिवालय ने संबंधित जिलाधिकारियों को सीएपीएफ जवानों के रहने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने का निर्देश दिया है. लेकिन आरोप है कि अभी भी कई जगहाें पर स्कूलों में केंद्रीय बल के जवान रह रहे हैं.

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