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Home पश्चिम-बंगाल आसनसोल मुख्यमंत्री का वादा फेल, हिंदी, उर्दू और संताली माध्यम के विद्यार्थियों के साथ हो गया खेला

मुख्यमंत्री का वादा फेल, हिंदी, उर्दू और संताली माध्यम के विद्यार्थियों के साथ हो गया खेला

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मुख्यमंत्री का वादा फेल,  हिंदी, उर्दू और संताली माध्यम के विद्यार्थियों के साथ हो गया खेला

कक्षा 10 के 300 नंबरों के सवालों के जवाब देने होंगे बांग्ला भाषा में, पहले हिंदी, उर्दू और संताली भाषा का भी था प्रावधान

आसनसोल. पश्चिम बंगाल सिविल सर्विस (एक्जीक्यूटिव) की परीक्षा में हिंदी, उर्दू और संताली माध्यम के अभ्यर्थियों के बैठने का सपना समाप्त हो गया. राज्य की सबसे प्रतिष्ठित इस परीक्षा के लिए पश्चिम बंगाल पब्लिक सर्विस कमीशन ने सिलेबस जारी कर दिया. 15 मार्च को 2023 को कार्मिक व प्रशासनिक सुधार विभाग ने पैटर्न और सिलेबस में बदलाव से जुड़ी जो संशोधित अधिसूचना जारी की थी, उसी के आधार पर ही नया सिलेबस बना है. पुराने पैटर्न में मेन परीक्षा के कंपल्सरी पेपर-1 में हिंदी/उर्दू/संताली/बांग्ला/नेपाली भाषा में 200 नंबरों के सवालों के जवाब देने होते थे. नये पैटर्न में मेन परीक्षा का पेपर-ए 300 नंबरों का किया गया और इसमें से हिंदी/उर्दू/संताली भाषा को हटाकर सिर्फ बांग्ला/नेपाली भाषा तक ही सीमित कर दिया गया है. नेपाली भाषा का प्रयोग सिर्फ हिल एरिया के नेपाली नागरिक ही कर पायेंगे. अन्य इलाकों में रहनेवाले नेपाली माध्यम के अभ्यर्थियों को भी बांग्ला भाषा में ही यह पेपर देना होगा. कक्षा 10 के सवाल होंगे और न्यूनतम 30 प्रतिशत अंक प्राप्त करना होगा. वर्ष 2025 से डब्ल्यूबीसीएस (एक्जीक्यूटिव) की परीक्षा इसी पैटर्न पर आयोजित होगी. इस नये पैटर्न में हिंदी, उर्दू और संताली माध्यम से पढ़ने वाले विद्यर्थियों के लिए बांग्ला भाषा में कक्षा दस के स्टैंडर्ड के सवालों का जवाब देना लगभग नामुमकिन है. जिसे लेकर वे हताश हो गये हैं.

मुख्यमंत्री का वादा साबित हुआ चुनावी जुमला

राज्य सिविल सर्विस (एक्जीक्यूटिव) परीक्षा को लेकर कार्मिक व प्रशासनिक सुधार विभाग द्वारा 15 मार्च 2023 को संशोधित अधिसूचना जारी हुई. पुराने पैटर्न में 200 नंबर के पेपर-1 को नये सिलेबस पैटर्न में 300 नंबर का पेपर-ए बनाया गया. पुराने पैटर्न में कुल पांच भाषाओं में हिंदी, उर्दू, बांग्ला, संताली और नेपाली में उत्तर लिखने का प्रावधान था, जिसे सिर्फ बांग्ला और नेपाली में सीमित कर दिया गया. इस 300 नंबर के पेपर में लेटर राइटिंग, ड्राफ्टिंग रिपोर्ट, प्रेसी राइटिंग, कम्प्रिहेंसन, लघु निबंध और अंग्रेजी से बांग्ला या नेपाली भाषा मे अनुवाद करना होगा. जिसमें 30 फीसदी अंक लाना अनिवार्य है. एक गैर बांग्ला माध्यम के छात्र के लिए यह लगभग असंभव है. इस नये पैटर्न के अधिसूचना को लेकर राज्यभर में आंदोलन शुरू हुआ. वर्ष 2024 लोकसभा चुनाव को देखते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 11 जनवरी 2024 को नबान्न में आयोजित पत्रकार सम्मेलन में कहा कि राज्य सिविल सर्विस और पुलिस सर्विस परीक्षा में हिंदी, उर्दू और संताली भाषा की शामिल किया गया है. चुनाव समाप्त होते ही 24 जुलाई 2024 को इसपर संशोधित अधिसूचना पुनः जारी हुई, जिसमें हिंदी, उर्दू और संताली भाषा को शामिल नहीं किया गया. मुख्यमंत्री का किया हुआ वादा चुनावी जुमला साबित हुआ. हालांकि इस अधिसूचना को सार्वजनिक नहीं किया गया. प्रभात खबर अखबार को इस अधिसूचना की प्रति मिली, जिसपर आधिकारिक सूत्रों ने इस अधिसूचना की सत्यता की पुष्टि की और कहा कि यह नया पैटर्न 2025 की परीक्षा से लागू होगा. वर्ष 2024 के सिविल सर्विस (एक्जीक्यूटिव) की परीक्षा की तिथि जारी नहीं हुई है, ऐसे में यह अधिसूचना बाहर आते ही 2024 की परीक्षा की तैयारी कर रहे उम्मीदवार भ्रमित हो जायेंगे. इसलिए इसे आधिकारिक वेबसाइट पर बाद में प्रकाशित किया जायेगा. इसपर एक सितंबर को प्रभात खबर ने विस्तृत खबर प्रकाशित की थी. हालांकि तृणमूल के कुछ नेताओं ने मुख्यमंत्री से बात करके इसे पुनः संशोधित करवाने की बात कही थी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ और हिंदी, उर्दू व संताली विद्यार्थियों के लिए घातक यह नया सिलेबस आधिकारिक वेबसाइट पर जारी कर दिया गया.

शत्रुघ्न सिन्हा के प्रयास को लगा बड़ा झटका

सिविल सर्विस (एक्जीक्यूटिव) परीक्षा से हिंदी, उर्दू और संताली भाषा को हटाने को लेकर प्रभात खबर की मुहिम का आसनसोल के सांसद व तृणमूल नेता शत्रुघ्न सिन्हा ने समर्थन किया था और खुद आगे बढ़कर इस मुद्दे पर पार्टी आलाकमान से बात करने की पहल की थी. सिलेबस आधिकारिक वेबसाइट पर जारी होने के बाद सांसद श्री सिन्हा आगे क्या करेंगे? इसे लेकर लोगों की उनसे उम्मीदें जुड़ी हुई है. श्री सिन्हा ने कहा कि वे इसे लेकर पुनः प्रयास करेंगे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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