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मैनपावर में नंबर वन, उत्पादन में नीचे 28 कोयला खदानों पर बंद होने का खतरा

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मैनपावर में नंबर वन, उत्पादन में नीचे 28 कोयला खदानों पर बंद होने का खतरा

कोल इंडिया की कोयला उत्पादन करनेवाली आठ सब्सिडरी में कुल कर्मचारियों की संख्या 2,11,570 में से 45,453 (21.48 फीसदी) हैं इसीएल में एक अप्रैल 2025 से 31 जनवरी 2026 तक कोल इंडिया में कुल उत्पादन 612.1 मिलियन टन कोयले में इसीएल का योगदान मात्र 37.5 मिलियन टन (6.12 फीसदी) का

शिवशंकर ठाकुर, आसनसोल

देश में ऊर्जा का प्रमुख स्रोत कोयला है और बिजली उत्पादन में 50 से 56 फीसदी की भागीदारी कोयले की है. देश के कुल कोयला उत्पादन में 82 फीसदी की भागीदारी कोल इंडिया लिमिटेड (सीआइएल) की है और इसके अधीन कोयला उत्पादन करनेवाली आठ सब्सिडियरी कंपनियों में सबसे ज्यादा मैनपावर इसीएल में होने के बावजूद कोयला उत्पादन में इसकी भागीदारी मात्र 6.12 फीसदी की है. मैनपावर और उत्पादन के बीच सही तालमेल नहीं होने का असर कंपनी पर पड़ रहा है, बीते वर्ष दिसंबर माह में कंपनी अपने कर्मचारियों को वेतन भुगतान करने में नाकाम रही. जिसपर यूनियन आंदोलन पर उतरे. समस्या टली है लेकिन समाप्त नहीं हुई. इसके कारण कई हैं, फिर भी कोयला बिक्री का ग्रोथ रेट जनवरी माह में 11.1 फीसदी नेगेटिव रहना, कंपनी के लिए परेशानी पैदा कर रहा है. इस पूरे प्रकरण को लेकर इसीएल के सीएमडी सतीश झा से बातचीत में जो बातें उभरकर सामने आयी, उसमें कुछ तथ्य कड़वें लेकिन सच हैं.

जनवरी माह के दौरान इसीएल में उत्पादन और बिक्री दोनों हैं नेगेटिव ग्रोथ में

जनवरी 2026 के दौरान इसीएल में कुल 5.5 मिलियन टन कोयले का उत्पादन हुआ और बिक्री 4.2 मिलियन टन हुई. पिछले साल इस अवधि में 5.6 मिलियन टन उत्पादन हुआ और बिक्री 4.7 मिलियन टन हुई. पिछले साल जनवरी माह के मुकाबले इसबार उत्पादन में 1.8 फीसदी और बिक्री में 11.1 फीसदी की नेगेटिव ग्रोथ दर्ज हुआ. तनख्वाह नहीं हो सकती कम, अतिरिक्त खर्च पर अंकुश लगाने की तैयारी : सीएमडी: इसीएल के सीएमडी श्री झा ने कहा कि कोयले की गुणवत्ता के साथ उसकी सही कीमत से बाजार में मांग बढ़ती है. इसीएल में मैनपावर ज्यादा है, जिसका पूरा खर्च कोयला पर पड़ता है और उस आधार पर उत्पादन नहीं हो रहा है. जिससे बहुत सारी परियोजनाएं अनवायबल हो रही हैं, धीरे-धीरे जिसका असर पड़ रहा है. इससे उबरने के लिए अनेकों प्रक्रिया में सुधार करना है ताकि आज की दौर में हम प्रासंगिक रह पाएं और प्रतिस्पर्धी बाजार में मजबूती से टिके रहे. कर्मचारी के तनख्वाह तो कम नहीं कर सकते, इसे स्वायत्त रखते हुए उत्पादकता के साथ काम करना होगा, फिजूलखर्ची को जो अबतक नजरअंदाज किया जा रहा था, उसपर अंकुश लगाने की जरूरत है, जिसपर कार्य शुरू किया गया है.

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