[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home पश्चिम-बंगाल आसनसोल सीएमओएच से एडीएम ने 10 दिनों में मांगा जवाब

सीएमओएच से एडीएम ने 10 दिनों में मांगा जवाब

0
सीएमओएच से एडीएम ने 10 दिनों में मांगा जवाब

आसनसोल.

सालानपुर प्रखंड के देंदुआ ग्राम पंचायत क्षेत्र के बराभुईं गांव के निवासी सुबल राय (29) की मौत के बाद जिले में हलचल है. मृतक के परिजनों ने सालानपुर ब्लॉक प्रायमरी हेल्थ सेंटर पिठाकियारी में सिलिकोसिस रोग के गलत इलाज का आरोप लगा कर अतिरिक्त जिलाधिकारी (जनरल) सुभाषिनी ई को ज्ञापन दिया है, जिसके बाद वह तुरंत हरकत में आ गयीं और जिला मुख्य स्वास्थ्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओएच) को पत्र लिख कर 10 दिनों के अंदर मामले की जांच कर रिपोर्ट जमा देने को लेकर पत्र लिखा है. परिजनों का आरोप है कि 24 अप्रैल 2024 को सुबल राय की कफ जांच रिपोर्ट में एमटीवी पॉजिटिव नहीं होने के बावजूद भी उसे टीवी का दवा चालू किया गया. जबकि उसे प्राणघातक सिलिकोसिस बीमारी था. जिसकी पुष्टि अपोलो अस्पताल चेन्नई और दुर्गापुर के हेल्थ वर्ल्ड अस्पताल में भी हुई.

सिलिकोसिस बीमारी की पुष्टि होने पर मृतक के आश्रित को भारी रकम मुआवजा में मिलने का प्रावधान है, जो नहीं मिल पा रहा है. गलत इलाज के कारण मरीज की हालत बिगड़ी और मृत्यु का कारण प्रमाणपत्र में सिलिकोसिस बीमारी नहीं होने से मुआवजा भी नहीं मिल रहा है. जिसे लेकर परिजन हर दरवाजे पर जा रहे है. यह मामला राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) में भी चल रहा है. वहां से भी जिलाधिकारी से रिपोर्ट मांगा गया है.

कथित तौर पर सिलिकोसिस बीमारी के कारण सुबल राय की मौत के बाद जिला में हलचल मची हुई है. वह एक रैमिंगमास इंडस्ट्री (क्वार्ज पत्थर डस्ट करने का कारखाना) में काम करता था. इन उद्योगों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं होने और प्रदूषण विभाग के नियमों की अनदेखी करके कारखाना चलाने से अनेकों श्रमिकों को सिलिकोसिस बीमारी होने का आरोप लगाकर सालानपुर इलाके से एनएचआरसी में दो मामला दर्ज हुआ है. जिसकी जांच चल रही है और जिन दो श्रमिको को लेकर मामला हुआ है, दोनों की मौत हो चुकी है. जिसमें से जगन्नाथ राय (30) की मौत कुछ माह पहले हुई थी और सुबल राय की मौत 20 दिसम्बर 2024 को हुई.

मामला प्रकाश में आते ही पांच सदस्यीय मेडिकल टीम मृतक के आवास पर पहुंची और उनके बीमारी से संबंधित सारे रिपोर्ट का निरीक्षण किया. टीम में जिला तपेदिक अधिकारी (डीटीओ) डॉ. अभिषेक राय, सालानपुर के प्रखंड स्वास्थ्य चिकित्सा अधिकारी (बीएमओएच) डॉ. सुब्रत सीट, जिला तपेदिक सेंटर (डीटीसी) की चिकित्सा अधिकारी (एमओ) डॉ. स्वाति बनर्जी, वरिष्ठ इलाज सुपरवाइजर (एसटीएस) रथिन राय और स्थानीय आशा कर्मी लेखनी हांसदा शामिल थी. अधिकारियों ने मृतक के परिजनों को कहा कि इस मामले को लेकर छह और आठ जनवरी के बीच बोर्ड बैठाई जाएगी.

तीन जनवरी को गांव में लगेगा कैंप, संदिग्ध रोगियों की होगी जांच

सुबल राय की मौत के बाद हरकत में आयी प्रशासन ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सालानपुर प्रखंड के बराभुईं गांव में तीन जनवरी को एक शिविर का आयोजन करेगी. जहां कथित तौर पर सिलिकोसिस बीमारी के संदिग्ध मरीजों की प्राथमिक जांच होगी और थोड़ा सा भी संदेह होने पर उसे अस्पताल में ले जाकर पूरी तरह से जांच की जयेगी. जिसे लेकर प्रशासन की ओर से गांववालों को सूचित किया गया है. सिलिकोसिस के मामले को लेकर एनएचआरसी में शिकायत करनेवाले स्थानीय रामडी गांव के युवक अमरनाथ महतो ने कहा कि सिलिकोसिस के अनेकों संदिग्ध मरीज है, जिनका इलाज टीवी के रूप में किया जा रहा है. सही तरीके से जांच होने पर इसकी पुष्टि होगी और इससे सैकड़ो मरीजों की जान बच सकती है. रैमिंगमास उद्योगों को लेकर सरकार की लचर व्यवस्था के कारण भारी संख्या में श्रमिक इस बीमारी से आक्रांत होकर नियमित अपनी जान गंवा रहे हैं और उनका परिवार सड़कों पर चला आ रहा है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel