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एयरपोर्ट का शुरू हुआ विस्तारीकरण, खर्च होंगे 5000 करोड़

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एयरपोर्ट का शुरू हुआ विस्तारीकरण, खर्च होंगे 5000 करोड़

अगले छह वर्षों में 1.1 करोड़ यात्री प्रति वर्ष क्षमता वाला नया एकीकृत टर्मिनल होगा तैयार कोलकाता. नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के विस्तारीकरण का काम शुरू हो गया है. इसके लिए कुल लागत 5,000 करोड़ रुपये रखी गयी है. अगले छह वर्षों में यहां 1.1 करोड़ यात्री प्रति वर्ष क्षमता वाला एक नया एकीकृत टर्मिनल बनाया जायेगा. पुराने घरेलू टर्मिनल और मौजूदा हवाई यातायात सेवा (एटीएस) भवन को ध्वस्त करने के साथ ही अगस्त से काम शुरू होने की उम्मीद है. कोलकाता एयरपोर्ट के निदेशक प्रवत रंजन बेउरिया के अनुसार, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआइ) अगले छह वर्षों में विस्तार को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि कोलकाता पूर्व और दक्षिण पूर्व एशिया के लिए उड़ानों के लिए केंद्र के रूप में काम कर सके. निदेशक ने कहा : यात्री वृद्धि अनुमानों से संकेत मिलता है कि मौजूदा टर्मिनल की क्षमता 2030-31 तक संतृप्त हो जायेगी. बावजूद इसके कि मौजूदा टर्मिनल का अंतरिम मॉड्यूलर विस्तार चल रहा है, जिसकी क्षमता 2.6 करोड़ से बढ़ा कर 2.8 करोड़ प्रति वर्ष की जा रही है. यदि कोरोना महामारी ने झटका नहीं दिया होता, तो यह लक्ष्य पहले ही प्राप्त हो गयी होती. 2019-20 में जहां हवाई अड्डे ने लगभग 2.2 करोड़ यात्रियों की सेवा की, वहीं कोविड के बाद रिकवरी के बावजूद 2023-24 में यात्रियों की संख्या केवल 1.9 करोड़ थी. बेउरिया ने कहा कि नये यू-आकार के टर्मिनल में तीन खंड होंगे. एक आयताकार खंड, जो पुराने टर्मिनल के पार्किंग स्थल के स्थान पर बनेगा, उसमें चेक-इन काउंटर, सुरक्षा जांच पोर्टल और सामान संभालने की सुविधाएं होंगी. दोनों छोर से, दो भुजाएं परिचालन क्षेत्र में फैलेंगी. बोर्डिंग गेट और एयरोब्रिज भी होंगे. नये टर्मिनल में बोर्डिंग गेट होंगे. भले ही टर्मिनल का अग्रभाग बहुत लंबा न हो, लेकिन यह पारंपरिक रैखिक टर्मिनल की तुलना में कई अधिक विमानों और यात्रियों को समायोजित करने में सक्षम होगा. नया टर्मिनल दो चरणों में बनाया जायेगा. पहले चरण में मुख्य टर्मिनल भवन के साथ-साथ दक्षिणी छोर से निकलने वाला एक कॉनकोर्स बनाया जायेगा. अगले चरण में टर्मिनल के उत्तरी छोर पर दूसरा कॉनकोर्स बनाया जायेगा. अधिकारी ने कहा : हमें एटीएस भवन को गिराने में देरी करने के लिए इसे चरणों में विकसित करना होगा, क्योंकि नये एटीसी टावर और तकनीकी ब्लॉक में समानांतर संचालन होने तक सेवाएं जारी रखनी होंगी.

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