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लोस चुनाव में माकपा के दो प्रार्थी ही बचा पाये अपनी लाज

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लोस चुनाव में माकपा के दो प्रार्थी ही बचा पाये अपनी लाज

कोलकाता.

राज्य की 42 लोकसभा सीटों में 23 पर माकपा ने अपने उम्मीदवार उतारे थे, जबकि वाममोर्चा के घटक दलों ने सात सीटों पर अपना उम्मीदवारों को उतारा था. चुनावी नतीजे आने के बाद माकपा के 23 उम्मीदवारों में से मात्र दो प्रत्याशी मुर्शिदाबाद से मोहम्मद सलीम व दमदम से सुजन चक्रवर्ती ही अपनी जमानत बचा सके. बाकी 21 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गयी. माकपा ने कई नये चेहरे को मैदान में उतारा था. इनमें जादवपुर से सृजन भट्टाचार्य व श्रीरामपुर से दीप्सिता धर प्रमुख थीं. तमलुक से सायन बनर्जी को भी उतारा गया था. ये नेता भी अपनी जमानत नहीं बचा पाये. चुनाव आयोग के नियम के मुताबिक जितना वोट पड़ा है, उसके एक-छठवां हिस्सा वोट मिलने पर जमानत बच जाती है. इससे कम मिलने पर जमानत जब्त हो जाती है. चुनाव लड़ने के लिए एकमुश्त 25 हजार रुपये डिपोजिट मनी को भी जमा करना पड़ता है. जमानत जब्त होने पर जमा रुपये लौटाये नहीं जाते हैं. माकपा को इस बाबत पांच लाख 25 हजार रुपये गंवा देने पड़े.

माकपा नेताओं का कहना है कि इसकी समीक्षा जरूरी है कि बार-बार ऐसा क्यों हो रहा है. फिलहाल कुछ कहना उचित नहीं है. यह भी बता दें कि वाममोर्चा के सात घटक दल के उम्मीदवार भी अपनी जमानत नहीं बचा सके. इसमें तीन आरएसपी, दो भाजपा व दो फॉरवर्ड ब्लॉक के उम्मीदवार हैं. वाममोर्चा से इतर पुरुलिया में फाॅरवर्ड ब्लॉक ने उम्मीदवार उतारा था, उनकी जमानत भी जब्त हो गयी. माकपा के राज्य सचिव मो सलीम को पांच लाख 18 हजार वोट मिले. कुल वोटिंग का यह 33.62 फीसदी है. वहीं, दमदम से सुजन चक्रवर्ती को 19.11 फीसदी वोट मिले हैं. पूरे राज्य में मो सलीम एकमात्र ऐसे उम्मीदवार रहे, जो दूसरे स्थान पर रहे. यहां तक कि बशीरहाट से माकपा उम्मीदवार निरापद सरकार को भी अपनी जमानत गंवानी पड़ी. जादवपुर से सृजन भट्टाचार्य को दो लाख 58 हजार 712 वोट मिले. यदि उन्हें दो लाख 61 हजार 85 वोट मिलता, तो उनकी जमानत बच जाती. वहीं, श्रीरामपुर से दीप्सिता को दो लाख 39 हजार 146 वोट मिले. यदि वह दो लाख 46 हजार वोट पातीं, तो उनकी जमानत बच जाती.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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