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बलिया के ‘तवायफ’ गांव की कहानी: आज भी लड़कियों की शादी नहीं होती

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बलिया के ‘तवायफ’ गांव की कहानी: आज भी लड़कियों की शादी नहीं होती
तवायफ गांव की कहानी

UP News: बलिया. वक्त बदला, हुकूमतें बदलीं और आजादी के बाद देश की तस्वीर भी बदल गई, लेकिन उत्तर प्रदेश के बलिया जिले का एक गांव आज भी इतिहास की एक ऐसी बेड़ी में जकड़ा है, जो उसकी नई पीढ़ी का भविष्य निगल रही है. सिकंदरपुर तहसील के पंदह ब्लॉक के अंतर्गत आने वाली खड़सरा ग्राम पंचायत का ‘रुपवार तवायफ’ गांव आज अपने नाम के कारण सामाजिक दंश झेलने को मजबूर है. गांव के नाम के साथ जुड़े एक अपमानजनक शब्द के कारण यहां की बेटियों और बेटों के हाथ पीले होना एक बहुत बड़ी चुनौती बन चुका है.

गांव का नाम बदलने की मांग

​स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्हें समाज में या गांव से बाहर कहीं भी अपने गांव का नाम बताने में बेहद शर्मिंदगी और मानसिक पीड़ा का सामना करना पड़ता है. इस नाम की वजह से बाहरी लोग पूरे गांव को हीन भावना से देखते हैं, जिसका सीधा असर यहां के युवाओं के विवाह और सामाजिक रिश्तों पर पड़ रहा है. ग्रामीण लंबे समय से इस नाम को बदलकर ‘देवपुर’ करने की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन शासन-प्रशासन के स्तर पर अब तक सिर्फ आश्वासन ही हाथ लगा है. ​उत्तर प्रदेश में जहां फैजाबाद का नाम अयोध्या और इलाहाबाद का नाम प्रयागराज करके बड़े बदलाव किए गए, वहीं बलिया के इस छोटे से गांव के निवासियों की सम्मान से जीने की आस आज भी अधूरी है.

देवपुर’ नाम के लिए लामबंद हुए ग्रामीण, लंबे समय से उठ रही मांग

​बलिया जनपद का संभवतः इकलौता ऐसा गांव है, जहां के लोग अपने पते और पहचान पर बात करने से भी कतराते हैं. ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि वर्तमान नाम में शामिल ‘तवायफ’ शब्द उनके लिए किसी सामाजिक अभिशाप से कम नहीं है. इस नाम से उपजी मानसिक प्रताड़ना से मुक्ति पाने के लिए पूरे गांव ने एक सुर में इसे ‘देवपुर’ नाम देने की मांग तेज कर दी है ताकि आने वाली पीढ़ी को इस सामाजिक अपमान का सामना न करना पड़े.

महामहिम से लेकर जिला प्रशासन तक लगाई गुहार, पर सुनवाई का इंतजार

​गांव के लोग अपनी अस्मिता की इस लड़ाई को लेकर देश के शीर्ष नेतृत्व का दरवाजा भी खटखटा चुके हैं. ग्रामीणों द्वारा राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल से लेकर स्थानीय कमिश्नर और जिला प्रशासन तक को कई बार प्रार्थना पत्र भेजे जा चुके हैं.

  • ​8 मार्च 2025: ग्रामवासियों ने महामहिम राष्ट्रपति को पत्र भेजकर अपनी पीड़ा बयां की थी.
  • ​2023 और 2024: इससे पहले 25 मई 2023, 30 नवंबर 2023 और 3 फरवरी 2024 को प्रधानमंत्री और राज्यपाल को भी आवेदन सौंपे गए थे.
  • ​वर्ष 2026: हाल ही में ग्रामीणों ने जिलाधिकारी बलिया और उपजिलाधिकारी सिकंदरपुर को भी दोबारा ज्ञापन सौंपकर इस नाम को जल्द से जल्द बदलने की भावुक अपील की है.

नोट- अब देखना यह है कि प्रशासन कब फाइलों से बाहर निकलकर इस गांव की सुध लेता है और कब रुपवार तवायफ को ‘देवपुर’ के रूप में एक नया और सम्मानित नाम मिलता है.

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