UP News: उत्तर प्रदेश सरकार किसानों के लिए यूनिक ‘फार्मर आईडी’ (किसान रजिस्ट्री) तैयार कर रही है, जो 12 अंको की होगी. इस डिजिटल आईडी में किसान के जमीन, खतौनी और खेती से जुड़ी सभी जरूरी जानकारी दर्ज होंगे. सरकार के अनुसार, भविष्य में खाद-बीज, पीएम किसान सम्मान निधि, फसल बीमा, किसान क्रेडिट कार्ड, कर्ज माफी समेत कई सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए फार्मर आईडी अनिवार्य होगी. सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से पात्र किसानों तक योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से पहुंचेगा और फर्जीवाड़े पर भी रोक लगेगी.
फार्मर आईडी में दर्ज होगा खेती से जुड़ा पूरा रिकॉर्ड
फार्मर आईडी एक डिजिटल डेटाबेस है, जिसमें किसान का नाम, खतौनी का विवरण, भूमि का रिकॉर्ड और खेत में बोई गई फसल की जानकारी सुरक्षित रहेगी. जब किसान खाद या अन्य कृषि सामग्री लेने जाएगा, तब उसकी फार्मर आईडी स्कैन की जाएगी. इससे सिस्टम को पता चल जाएगा कि किसान के पास कितनी कृषि भूमि है और उसे वास्तव में कितनी मात्रा में खाद की आवश्यकता है. सरकार का मानना है कि इससे जरूरत के अनुसार ही खाद का वितरण होगा और कालाबाजारी पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी. अक्सर खाद की कमी के दौरान यूरिया और डीएपी जैसी उर्वरकों की जमाखोरी की शिकायतें सामने आती हैं. फार्मर आईडी लागू होने के बाद ऐसे मामलों में रोक लगने की उम्मीद है.
पीएम किसान सम्मान निधि समेत कई योजनाओं के लिए होगी जरूरी
राज्य सरकार के अनुसार, प्रदेश के करीब 2.4 करोड़ किसानों में से 1.8 करोड़ से अधिक किसानों की फार्मर आईडी तैयार की जा चुकी है, जो कुल किसानों का लगभग 75 प्रतिशत है. बाकी किसानों को जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है. कृषि विभाग आने वाले समय में खाद, बीज, कीटनाशक और अन्य कृषि योजनाओं में किसान आईडी को अनिवार्य करेगा. लाभार्थियों का चयन भी इसी डिजिटल डेटाबेस के आधार पर किया जाएगा. भविष्य में पीएम किसान सम्मान निधि की किस्त भी केवल उन्हीं किसानों को मिलेगी, जिनकी फार्मर आईडी बनी होगी. इसके अलावा बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन, सहकारिता और गन्ना विकास विभाग की योजनाओं में भी इस आईडी को जरूरी किया जा रहा है.
सरकारी खरीद और किसान क्रेडिट कार्ड की प्रक्रिया होगी आसान
फिलहाल किसानों को धान, गेहूं जैसी फसलों को सरकारी खरीद केंद्रों पर बेचने के लिए हर सीजन नया पंजीकरण कराना पड़ता है. फार्मर आईडी बनने के बाद बार-बार रजिस्ट्रेशन कराने की जरूरत नहीं होगी. आईडी दर्ज करते ही किसान और उसकी जमीन से जुड़ी जानकारी सिस्टम में उपलब्ध हो जाएगी. इसी तरह किसान क्रेडिट कार्ड बनवाने के दौरान जमीन के दस्तावेजों की जांच और सत्यापन में लगने वाला समय भी कम होगा. डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होने से लोन प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक आसान और तेज हो सकेगी.
फार्मर रजिस्ट्री की अंतिम तारीख क्या है?
उत्तर प्रदेश में फार्मर रजिस्ट्री अभियान वर्ष 2024 में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया था. इसके बाद 2025 और 2026 में इसे मिशन मोड में आगे बढ़ाया गया. सरकार ने पहले रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि 30 अप्रैल तय की थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 15 मई 2026 कर दिया गया.
किसी तरह की समस्या होने पर कहां करें संपर्क?
पीएम किसान सम्मान निधि या अन्य कृषि योजनाओं से संबंधित शिकायत के लिए किसान 0522-2317003 पर संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा टोल-फ्री किसान कॉल सेंटर 1800-180-1551 और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है.
किसानों के लिए जरूरी जानकारी
रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया जारी है और सरकार ने नई अंतिम तिथि घोषित नहीं की है. हालांकि, 1 जून 2026 से सरकारी कृषि योजनाओं का लाभ लेने के लिए फार्मर रजिस्ट्री अनिवार्य कर दी गई है .यदि किसान की खतौनी, खसरा नंबर या भूमि रिकॉर्ड में कोई त्रुटि है, तो फार्मर आईडी बनने में परेशानी आ सकती है. ऐसे मामलों में पहले राजस्व विभाग के माध्यम से रिकॉर्ड अपडेट कराना जरूरी होगा.
सरकार के अनुसार फार्मर आईडी बनवाने के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता. हालांकि, अगर किसान कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के माध्यम से आवेदन करता है तो फॉर्म भरने, ऑनलाइन अपलोड करने और e-KYC जैसी सेवाओं के लिए 20 से 50 रुपये तक का सर्विस चार्ज लिया जा सकता है.
जमीन मालिक की सहमति मिलने के बाद बटाईदार (पट्टेदार) किसानों की भी फार्मर आईडी बनाई जा सकती है. इसके लिए दोनों पक्षों का डिजिटल सत्यापन किया जाएगा. रजिस्ट्रेशन पूरा होने के बाद बटाईदार किसान भी MSP पर फसल बेचने के साथ-साथ खाद-बीज सब्सिडी, फसल बीमा और मुआवजे जैसी सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे अपने बैंक खाते में प्राप्त कर सकेंगे.
फार्मर आईडी बनने से जमीन के स्वामित्व में कोई बदलाव नहीं होता. बटाईदार को केवल एक फसल सीजन के लिए अनुमति दी जाती है. जमीन मालिक चाहे तो किसी भी समय अपनी सहमति वापस ले सकता है.
अगर किसी जमीन की खतौनी संयुक्त है, तब भी प्रत्येक खातेदार की अलग-अलग फार्मर आईडी तैयार की जाएगी. यह आईडी आधार और e-KYC से जुड़ी होगी. यदि खतौनी में हिस्सेदारी दर्ज है तो उसी अनुपात में योजनाओं का लाभ मिलेगा. हिस्सेदारी दर्ज न होने की स्थिति में डिजिटल फसल सर्वे और वास्तविक खेती के आधार पर लाभ तय किया जाएगा.
सरकार का कहना है कि किसानों के डेटा की सुरक्षा के लिए एन्क्रिप्शन, सहमति आधारित सिस्टम और सुरक्षित सरकारी सर्वर का इस्तेमाल किया जा रहा है. किसानों को सलाह दी गई है कि वे केवल आधिकारिक पोर्टल या सरकारी माध्यमों से ही अपनी फार्मर आईडी बनवाएं.
ऐसे बनवा सकते हैं फार्मर आईडी
किसान upagripardarshi.gov.in पोर्टल पर जाकर अपनी फार्मर आईडी के लिए आवेदन कर सकते हैं. इसके अलावा नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC), कृषि विभाग के कार्यालय या संबंधित लेखपाल की सहायता से भी किसान रजिस्ट्री कराई जा सकती है.- कोमल अग्रवाल की रिपोर्ट
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