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Home Rajya उत्तर प्रदेश चार दोस्त, एक बाइक… और जिंदगी की आखिरी राइड, चारों की मौत से गांव में पसरा सन्नाटा

चार दोस्त, एक बाइक… और जिंदगी की आखिरी राइड, चारों की मौत से गांव में पसरा सन्नाटा

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चार दोस्त, एक बाइक… और जिंदगी की आखिरी राइड, चारों की मौत से गांव में पसरा सन्नाटा

UP Accident: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर-वाराणसी हाईवे पर बीते शनिवार को एक ऐसा दर्दनाक हादसा हुआ, जिसने न केवल चार जिंदगियों को निगल लिया, बल्कि एक पूरे गांव की खुशियां भी छीन लीं. गोरखपुर से करीब 60 किलोमीटर दूर सिधुआपार गरथौली गांव के चार दोस्त प्रद्युन उर्फ प्रदीप (22), सुनील (22), अरविंद (23) और राहुल (22) एक ही बाइक पर सवार होकर निकले थे. मगर लौटकर वे चारों ताबूत में आए.

हादसे की खबर जब गांव पहुंची, तो मातम पसर गया. चारों युवकों की अंतिम यात्रा शनिवार आधी रात को पूरे गांव की आंखों में आंसू छोड़कर निकली. इस हादसे ने न केवल चार परिवारों की जिंदगी उजाड़ दी, बल्कि पूरे गांव को स्तब्ध कर दिया.

तीन बड़ी लापरवाहियां बनीं हादसे की वजह

परिवार और ग्रामीणों से बातचीत में मौत की जो वजहें सामने आईं, वो बेहद चिंताजनक हैं:

  1. रॉन्ग साइड से चढ़ना: चारों दोस्त सिधुआपार से हाईवे पर गलत दिशा में चढ़े थे.
  2. बिना हेलमेट: चारों में से किसी ने भी हेलमेट नहीं पहना था.
  3. ओवर स्पीड और गलत ओवरटेक: हाईवे पर तेज रफ्तार में चलते हुए उन्होंने एक ट्रैक्टर-ट्राली को ओवरटेक किया, तभी सामने से आ रही कार दिखाई नहीं दी और सीधा भिड़ंत हो गई.

हादसा इतना भीषण था कि एक युवक की बॉडी 20 फीट दूर जा गिरी, जबकि दो की लाशें कार के साथ घसीटती हुई 100 मीटर तक चली गईं. गांव के लोग बताते हैं कि हादसे की गूंज अभी भी उनके कानों में है.

गांव में सन्नाटा, घरों के चूल्हे नहीं जले

चारों दोस्तों के घर गांव में मात्र 50 मीटर के दायरे में हैं. गांव के सोनू बताते हैं, “हादसे के बाद किसी घर में चूल्हा नहीं जला. पूरा गांव सिर्फ इन चार घरों के पास जमा था. ऐसा लग रहा था जैसे पूरा गांव एक साथ शोक मना रहा हो.”

गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि जब चारों दोस्त एक ही बाइक पर जा रहे थे, तब उन्हें लोगों ने रोका भी था. मगर उन्होंने बात नहीं मानी. कई ग्रामीणों की यही टीस है कि अगर थोड़ा सा भी संभलकर चलते, तो शायद आज चारों ज़िंदा होते.

हर घर की अपनी पीड़ा

राहुल, छह बहनों का इकलौता भाई था. उसकी मां सोमारी देवी रोते-रोते बेसुध हो गईं. पिता करमचंद का कहना है, “कल तक वो हमारे साथ था, आज फोटो में दिख रहा है. उसकी शादी तय हुई थी, अगले हफ्ते तिलक की तारीख फिक्स होनी थी.”

राहुल की बहन करीना बताती हैं, “उसे बाहर काम पर जाना था, उसने मुझसे बैग पैक करवाया था. मगर अब वो हमेशा के लिए चला गया.”

प्रद्युन (प्रदीप), छह भाइयों में सबसे जिम्मेदार बेटा था. मां इंद्रावती कहती हैं, “सुबह 7:30 बजे कहा कि जल्दी लौट आएगा, लेकिन 11 बजे हादसे की खबर मिली. वो सऊदी नौकरी के लिए जाने वाला था, पासपोर्ट के लिए आवेदन कर रखा था.”

अरविंद, बेंगलुरु में पेंटिंग का काम करता था. छुट्टी लेकर गांव आया था. मां मालती कहती हैं, “सुबह सुनील और राहुल के साथ निकला, फोन कॉल पर बात नहीं हो पाई. शाम को पता चला कि बेटा अब कभी नहीं लौटेगा.”

सुनील, चारों में सिर्फ शादीशुदा था. उसकी पत्नी खुशबू तीन महीने की गर्भवती है. दो छोटी बेटियां—अनुष्का (4) और मेहरा (3)—अब बिन पिता के रह गई हैं. सुनील डीजे चलाने का काम करता था और घर का एकमात्र कमाने वाला था. उसकी मां कहती हैं, “उस दिन वह रोज की तुलना में जल्दी निकल गया. जाते वक्त पत्नी से भी नहीं मिल पाया.”

अब सवाल- कौन जिम्मेदार?

पुलिस जांच में पता चला है कि हादसे में शामिल कार सिद्धार्थनगर के शोहरतगढ़ निवासी निवेदिता शुक्ला के नाम रजिस्टर्ड है, जो चंद्रप्रकाश शुक्ला की पत्नी हैं. पुलिस अब दंपती से संपर्क कर रही है.

परिजनों का कहना है कि अब वे पुलिस से कार्रवाई की मांग करेंगे ताकि हादसे के जिम्मेदार को सजा मिल सके.

सबक जो यह हादसा दे गया

इस हादसे ने फिर से यह साबित कर दिया है कि थोड़ी सी लापरवाही, एक पल की तेजी और नियमों की अनदेखी, चार जिंदगियों को लील सकती है. हेलमेट पहनना, ट्रैफिक नियमों का पालन और जिम्मेदार ड्राइविंग सिर्फ कानून नहीं, जीवन की सुरक्षा के मूल मंत्र हैं.

गरथौली गांव के लोग आज भी गहरे सदमे में हैं. हर कोई यही कह रहा हैकाश वो थोड़ा रुक जाते, काश हेलमेट लगा लेते, काश… ये काश अब हमेशा के लिए रह गया.

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