[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home Rajya उत्तर प्रदेश बरेली की नसरीन बी की कहानी, बेकरी से गांव की महिलाओं की तकदीर बदल दी

बरेली की नसरीन बी की कहानी, बेकरी से गांव की महिलाओं की तकदीर बदल दी

0
बरेली की नसरीन बी की कहानी, बेकरी से गांव की महिलाओं की तकदीर बदल दी
बरेली की नसरीन बी

Govt Schemes : नसरीन बताती हैं कि उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि उनका नाम इतना उभरेगा. लेकिन जब उन्होंने “जनता” स्वयं सहायता समूह से जुड़कर काम शुरू किया, तो उनकी जिंदगी बदल गई. योगी सरकार की मदद से शुरू हुई छोटी सी शुरुआत आज एक सफल बेकरी व्यवसाय बन गई है, जहां रस्क, फैन और क्रीम रोल जैसे उत्पाद बनाए जाते हैं.

लाभार्थी से एंटरप्रेन्योर बनने की प्रेरक कहानी

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) ने नसरीन जैसी हजारों ग्रामीण महिलाओं को नई पहचान दी है. इस योजना के तहत समूह बनाने, बचत और पैसों की मदद के जरिए कई महिलाओं को आगे बढ़ने का मौका मिला. 2022 में उनके समूह को 15,000 रुपये मिले और कुछ ही दिनों बाद 1 लाख रुपये की वित्तीय सहायता भी मिली. इस पैसे ने उनके व्यवसाय को मजबूत आधार दिया. इससे न सिर्फ उनका आत्मविश्वास बढ़ा, बल्कि उन्होंने अपने साथ गांव की 10 अन्य महिलाओं को भी जोड़ लिया. आज यह समूह हर महीने 1 लाख रुपये तक की कमाई कर रहा है.

सरकारी सहायता से बढ़ा कारोबार

सरकार की मदद से नसरीन ने क्रीम रोल बनाने की मशीन लगाई, जिससे उत्पादन बढ़ा. नए रोजगार भी पैदा हुए. नई तकनीक और प्रशिक्षण के जरिए उन्होंने अपने उत्पादों की गुणवत्ता सुधारी और बरेली शहर तक सप्लाई शुरू कर दी. उचित कीमत तय करके और बाजार की मांग के हिसाब से कारोबार बढ़ाते हुए उन्होंने दिखाया कि सरकारी योजनाओं का सही इस्तेमाल छोटे काम को बड़े व्यवसाय में बदल सकता है.

नसरीन की पहल से महिलाओं को मिला रोजगार

नसरीन की सफलता की सबसे प्रेरक बात यह है कि उन्होंने अपनी तरक्की सिर्फ खुद तक सीमित नहीं रखी. उन्होंने 10 महिलाओं को अपने साथ जोड़कर रोजगार और आत्मनिर्भर बनने का मौका दिया. अब उनका समूह सिर्फ बेकरी तक सीमित नहीं है, बल्कि पापड़, मसाले और चिप्स जैसे नए उत्पाद भी बना रहा है. इससे उनकी आय बढ़ी है और बाजार में पहचान भी मजबूत हुई है. समूह की महिलाओं को नियमित ऑर्डर मिल रहे हैं. 

Previous article बिहार के गांवों तक बस सेवा का विस्तार, 800 नए बस स्टॉप बदल देंगे यात्रा का अंदाज
Next article ममता बनर्जी आज जायेंगी भवानीपुर, तृणमूल कार्यकर्ता सम्मेलन में बनेगी चुनावी रणनीति
Avatar Of Amitabh Kumar
अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel