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Home Rajya उत्तर प्रदेश गोरखपुर एम्स के अध्ययन ने बढ़ाई चिंता, तेजी से बढ़ रहा ‘सुपरबग’ का खतरा, अब एंटीबायोटिक दवाएं हो रही बेअसर

गोरखपुर एम्स के अध्ययन ने बढ़ाई चिंता, तेजी से बढ़ रहा ‘सुपरबग’ का खतरा, अब एंटीबायोटिक दवाएं हो रही बेअसर

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गोरखपुर एम्स के अध्ययन ने बढ़ाई चिंता, तेजी से बढ़ रहा ‘सुपरबग’ का खतरा, अब एंटीबायोटिक दवाएं हो रही बेअसर
एम्स के माइक्रोबायोलाजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अरुप मोहंती

Gorakhpur AIIMS Study: गोरखपुर एम्स के एक महत्वपूर्ण अध्ययन ने डॉक्टरों और मरीजों दोनों की चिंता बढ़ा दी है. शोध में सामने आया है कि अस्पतालों में संक्रमण फैलाने वाले कई खतरनाक जीवाणु अब सामान्य एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति तेजी से प्रतिरोधी होते जा रहे हैं. इसका असर यह हो रहा है कि संक्रमण का इलाज पहले की तुलना में अधिक कठिन हो रहा है, मरीजों को लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ रहा है और उपचार का खर्च भी बढ़ रहा है.

गोरखपुर एम्स के अध्ययन में हुआ खुलासा

एम्स गोरखपुर के माइक्रोबायोलॉजी विभाग द्वारा किए गए इस अध्ययन में 20 से 80 वर्ष आयु वर्ग के 2300 मरीजों के नमूनों की जांच की गई. इनमें 1311 मरीजों में संक्रमण की पुष्टि हुई. अध्ययन के दौरान पाया गया कि 808 मरीजों यानी करीब 62 प्रतिशत मामलों में एस्केप समूह के छह प्रमुख जीवाणु मौजूद थे. यह अध्ययन इंडियन जर्नल ऑफ डर्मेटोलॉजी में प्रकाशित हुआ है. इस शोध का नेतृत्व माइक्रोबायोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अरुप मोहंती ने किया. अध्ययन में कुमारी नेहा सिंह, क्रति अग्रवाल, पारुल सिंह, अतुल आर. रुधिकर, विवेक हाडा, शिवांगी राणा, अरुनानी राहुल और शैलजा मिश्रा का भी योगदान रहा.

संक्रमण का इलाज हो रहा जटिल

अध्ययन के अनुसार संक्रमण पैदा करने वाले जीवाणुओं में स्टैफिलोकोकस आरियस सबसे अधिक पाया गया, जो 59.5 प्रतिशत नमूनों में मिला, इसके अलावा स्यूडोमोनस एरुगिनोसा 17.8 प्रतिशत, क्लेबसिएला निमोनिया 11.3 प्रतिशत और एसिनेटोबैक्टर बाउमानी 8 प्रतिशत मामलों में पाए गए. विशेषज्ञों के मुताबिक ये जीवाणु त्वचा और कोमल ऊतकों में संक्रमण के साथ-साथ अस्पताल जनित संक्रमण के प्रमुख कारण बनते हैं.

एंटीबायोटिक दवाओं का असर हो रहा कम

डॉ. अरुप मोहंती ने बताया कि पहले जिन एंटीबायोटिक दवाओं से संक्रमण आसानी से नियंत्रित हो जाता था, अब कई मामलों में वे प्रभावी नहीं रह गई हैं. ऐसे में मरीजों के लिए कल्चर जांच के आधार पर सही एंटीबायोटिक का चयन करना पहले से अधिक जरूरी हो गया है. एम्स गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक (मेजर जनरल सेवानिवृत्त) डॉ. विभा दत्ता ने कहा कि यह अध्ययन अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण की रणनीतियों को मजबूत बनाने और गंभीर मरीजों के लिए वैज्ञानिक आधार पर उपयुक्त एंटीबायोटिक चुनने में मददगार साबित होगा.

क्या हैं एस्केप समूह के जीवाणु?

एस्केप समूह में ऐसे खतरनाक जीवाणु शामिल हैं, जो अस्पतालों में होने वाले संक्रमण के प्रमुख कारण माने जाते हैं. ये जीवाणु समय के साथ एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोध विकसित कर लेते हैं, इसलिए इन्हें आम भाषा में ‘सुपरबग’ भी कहा जाता है.

मरीजों के लिए विशेषज्ञों की सलाह

  • डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन न करें.
  • अस्पताल में हाथों की स्वच्छता और संक्रमण नियंत्रण संबंधी नियमों का पालन करें.
  • संक्रमण होने पर कल्चर जांच कराएं और उसी के अनुसार दवा लें.
  • एंटीबायोटिक का कोर्स बीच में न छोड़ें.

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