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Vinay Pathak Corruption Case: एसटीएफ की जांच के दायरे में प्रो. विनय पाठक के चहेते, होगी पूछताछ

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Vinay Pathak Corruption Case: एसटीएफ की जांच के दायरे में प्रो. विनय पाठक के चहेते, होगी पूछताछ

Lucknow News: भ्रष्टाचार और अनियमितता को लेकर जांच के दायरे में आये छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक के करीबियों पर भी जांच का शिकंजा कसता जा रहा है. प्रो. पाठक जहां भी तैनात रहे हैं, उन सभी संस्थानों में एसटीएफ जांच कर रही है और उनके चहेतों की सूची बनाकर पूछताछ करने की तैयारी में है.

एसटीएफ टीम की जांच के दायरे में अलग-अलग विश्वविद्यालयों के करीब 20 अधिकारी और कर्मचारी आये हैं. इनके राज उगलने से कई और तथ्य सामने आ सकते हैं. इसलिए इनके शहर छोड़कर जाने पर पाबंदी लगा दी गई है. इसके बाद इन लोगों से सम्बन्धित संस्थानों में हड़कम्प मचा हुआ है. कोशिश की जा रही है जांच के दायरे से बचने के लिए फाइलों में गड़बड़ी को सही किया जा सके.

एसटीएफ के मुताबिक जांच के दौरान यह बात सामने आयी है कि प्रो. पाठक ने अपनी तैनाती के दौरान करीबी लोगों को विभिन्न पदों पर तैनात किया. इसके अलावा नियमों को दरकिनार कर कुछ लोगों को दूसरे विश्वविद्यालयों से बुलाकर भी काम सौंपा गया. प्रो. पाठक अपने मन मुताबिक कार्य कर करते है, अब जांच के दौरान ऐसे लोगों की हकीकत सामने आने के बाद उनकी भी मुश्किलें बढ़ सकती हैं. इनसे पूछताछ में कई अहम बातें सामने आने की उम्मीद की जा रही है.

छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय के वर्तमान कुलपति व भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय आगरा के प्रभारी कुलपति प्रो. विनय पाठक उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय हल्द्वानी, कोटा की वर्धमान महावीर ओपन यूनिवर्सिटी, भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय आगरा, छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर, अब्दुल कलाम आजाद टेक्निकल विश्वविद्यालय और लखनऊ की ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय का भी जिम्मा संभाल चुके हैं. इस दौरान उन पर कई आरोप लगे.

प्रो. विनय पाठक की याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खण्डपीठ में 10 नवम्बर को सुनवाई होगी. न्यायालय ने अभी तक कोई भी अंतरिम राहत उन्हें नहीं दी है. याची के अधिवक्ता एलपी मिश्रा ने गुरुवार को न्यायालय से अनुरोध किया कि उन्हें मामले में पूरक हलफनामा दाखिल करने के लिए कुछ समय दिया जाये, वहीं राज्य सरकार की ओर से इसका विरोध किया गया.

राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि यदि याची को समय दिया जाता है तो सरकार को भी जवाबी हलफनामे के लिए समय दिया जाए. इस पर न्यायालय ने दोनों पक्षों के अनुरोध को स्वीकार करते हुए याची को 5 नवम्बर तक पूरक हलफनामा की प्रति राज्य सरकार के अधिवक्ता को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है.

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