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Home Rajya ओडिशा 388 करोड़ रुपये की मेगा पेयजल परियोजना में भ्रष्टाचार की जांच करेगा विजिलेंस विभाग

388 करोड़ रुपये की मेगा पेयजल परियोजना में भ्रष्टाचार की जांच करेगा विजिलेंस विभाग

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388 करोड़ रुपये की मेगा पेयजल परियोजना में भ्रष्टाचार की जांच करेगा विजिलेंस विभाग

राउरकेला. सुंदरगढ़ जिले के ग्रामांचल में 24 घंटे पेयजल प्रदान करने के लिए पूर्व सरकार के कार्यकाल में 388 करोड़ रुपये की लागत से मेगा पेयजल परियोजना शुरू की गयी थी. लेकिन विगत साढ़े तीन साल में इसका 53 फीसदी काम ही पूरा हो पाया है. बाकी 47 फीसदी काम कब खत्म होगा, इसका जवाब किसी के पास नहीं है. इसका काम ग्रामीण जलापूर्ति व परिमल विभाग (आरडबल्यूएसएस) की ओर से किया जा रहा है. विदित हो कि सुंदरगढ़ जिला के बिसरा, बणई, लाठीकटा व लहुणीपाड़ा ब्लाक के कुछ अंचल के पांच लाख लोग इसे उपकृत होंगे,ऐसा विभाग का कहना है. लेकिन जल्द से जल्द इसका लाभ ग्रामांचल के लोगों को मिल पायेगा, इसमें संदेह है क्योंकि इसका काम कछुआ की गति से चल रहा है. यह काम लेनेवाली ठेका संस्था कल्पतरु प्रोजेक्ट इंटरनेशनल लिमिटेड ने यह काम खुद न कर 40 से 50 ठेकेदारों के बीच बांट दिया है. इसमें आश्चर्य की बात यह है कि इस काम की देखरेख तथा बिल करने का काम ग्रामीण जलापूर्ति व परिमल विभाग खुद न कर एलएम मालवीय नामक संस्था को दिया गया है. जिससे इसका लाभ ठेका संस्था व बिल करने वाले संस्था के अधिकारी उठा रहे हैं. आरडब्ल्यूएसएस की ओर से इसके प्रति ध्यान न देना आश्चर्य का विषय बना है. वहीं जितना काम खत्म हुआ, उसमें से 30 से 40 फीसदी काम में व्यापक अनियमितता हुई है.

नियमों का नहीं हुआ पालन, गुणवत्ता की हुई अनदेखी

स्थानीय लोगों का कहना है कि अब तक पाइप बिछाने का काम 80 फीसदी तक खत्म हो चुका है. पाइप बिछाने में आठ इंच ढलाई के स्थान पर चार इंच की ढलाई की गयी है. पाइप बिछाने के बाद बालू देने का नियम है. लेकिन इसका पालन नहीं किया जा रहा है. जो पाइप इस्तेमाल हो रहा है, उसकी गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा जा रहा है. अधिकांश स्थानों पर ओवरहेड टैंक का काम आधा करने के बाद असुरक्षित हालत में छोड़ दिया गया है. अब तक 200 करोड़ रुपये के काम में 30 फीसदी तक भ्रष्टाचार हाेने की शिकायत राउरकेला विजिलेंस विभाग में की गयी है.

आइएस कोड के अनुसार किया गया काम : अधीक्षण अभियंता

आरडब्ल्यूएसएस की अधीक्षण अभियंता प्रज्ञा परमिता नायक का कहना है कि काम में भ्रष्टाचार होने को लेकर विजिलेंस विभाग में हुई शिकायत गलत है. सभी काम आइएस कोड के अनुसार किया गया है. यह प्रोजेक्ट 2021 में शुरू हुआ और अगस्त 2023 तक पूरा करने का लक्ष्य था. लेकिन रास्ता, जमीन व स्थान की वजह से समस्या हो रही है. वहीं विजिलेंस विभाग के अतिरिक्त एसपी सत्यवान महानंद का कहना है कि भ्रष्टाचार से संंबंधित दस्तावेज हमारे पास पहुंचे हैं. इनकी जांच की जा रही है. बहुत जल्द इसे लेकर कार्रवाई होगी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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