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घोघड़ेश्वरधाम में श्रावण की तैयारियां पूरी, पहली सोमवार पर कल होगा जलाभिषेक

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घोघड़ेश्वरधाम में श्रावण की तैयारियां पूरी, पहली सोमवार पर कल होगा जलाभिषेक

राजगांगपुर. राजगांगपुर ब्लॉक स्थित घोघड़ धाम में प्रतिवर्ष श्रावण माह धूमधाम से मनाया जाता है. यहां ओडिशा के विभिन्न हिस्सों के अलावा छत्तीसगढ़ व झारखंड से भी हजारों श्रद्धालु महादेव का जलाभिषेक करने पहुंचते हैं. कल 22 जुलाई से श्रावण माह प्रारंभ हो रहा है. 19 अगस्त को इसका समापन होगा. इस वर्ष खास बात यह है कि श्रावण माह सोमवार से प्रारंभ होकर सोमवार को ही समाप्त हो रहा है. जिससे इस बार कुल पांच सोमवारी पड़ेगी. श्रावण माह के दौरान यहां मेला भी आयोजित किया जाता है जिसमें भारी संख्या में लोग पहुंचते हैं इसे देखते प्रशासन तथा घोघड़ धाम ट्रस्ट सभी प्रकार की तैयारियां अंतिम चरण में हैं.

आस्था का प्रतीक है घोघड़ धाम

घोघड़ धाम में महादेव विराजमान हैं जहां साल भर भक्त दर्शन कर अपनी मनोकामना की गुहार लगाते हैं. विशेष कर श्रावण में हर सोमवार हजारों की संख्या में भक्त यहां जलाभिषेक कर अपनी मन्नत मांगते हैं लोगों में आस्था है की महादेव उनकी हर मनोकामना पूर्ण करते हैं

जमीन से स्वत: निकला था शिवलिंग

यहां निर्माण हुए मंदिर को लेकर अलग-अलग किंवदंती सामने आयी है. यूं तो इसका निर्माण करीब 160 साल पहले हुआ था. सुंदरगढ़ रानी को यहां शिवलिंग होने का एक स्वप्न आया था तथा उन्होंने इसे तलाश करने को कहा था. तभी एक गाय रोज जाती थी लेकिन अपना दूध कहीं और छोड़ आती थी. जब राजा के कर्मचारियों ने उसका पीछा किया तो देखा की गाय एक निर्दिष्ट जगह पर रोज अपना दूध निकालती है. उस जगह की खुदाई करने पर वहां एक शिव लिंग नजर आया. राजा ने वहां एक छोटा सा मंदिर बना दिया. बाद में घोघड़ धाम ट्रस्ट बनाया गया जो मंदिर के देख भाल करने लगा तथा सभी के प्रयासों से मंदिर को भव्य रूप दिया गया. पिछले साल राज्य सरकार द्वारा दो करोड़ की राशि घोघड़ धाम के नवीनीकरण के लिए मुहैया करायी गयी जिसका कार्य गत 11 महीनों से चल रहा है काफी कुछ कार्य यहां किया गया है. श्रावण माह शुरू होने को है लेकिन कार्य पूरा नहीं हो पाया है बाकी का काम श्रावण माह के बाद किए जाने की सूचना है

रेल व सड़क मार्ग से पहुंच सकते हैं घोघड़ धाम

राउरकेला स्टेशन से 29 किलोमीटर तथा राजगांगपुर स्टेशन से आठ किलोमीटर दूर स्थित है घोघड़ धाम मंदिर. कांवरिये यहां से करीब 19 किलोमीटर दूर स्थित शिव पीठ से जल उठा कर पैदल यात्रा कर यहां जल अर्पण करते हैं. वेदव्यास जाने के लिए राजगांगपुर तथा राउरकेला दोनों जगह से बस की सुविधा रात 9:00 बजे तक प्राप्त होती है. उसके बाद टेंपो या फिर कार से यहां जाया जाता है. उसी तरह दर्शनार्थियों को घोघड़ मंदिर जाने के लिए राजगांगपुर तथा राउरकेला बस स्टेशन या रेलवे स्टेशन से टेंपो तथा कार उपलब्ध होती है. सोमवार को दिन के समय राजगांगपुर से कई संस्थाओं द्वारा यातायात की निःशुल्क व्यवस्था भी की जाती है

रास्ते में तथा घोघड़ में होती है खान पान की निःशुल्क व्यवस्था

वेदव्यास से घोघड़ तक के रास्ते भर विभिन्न संस्थाओं द्वारा रविवार रात से सोमवार सुबह तक जगह-जगह निःशुल्क खान पान की व्यवस्था की जाती है. कई जगह भजन संध्या का कार्यक्रम भी आयोजित किया जाता है. कांवरियों के विश्राम तथा स्वास्थ्य सेवा भी संस्थाओं द्वारा मुहैया करायी जाती है. उसी तरह रविवार रात तथा सोमवार को घोघड़ धाम में भी निःशुल्क खान पान की व्यवस्था तथा स्वास्थ्य सेवा विभिन्न संस्थाओं द्वारा उपलब्ध करायी जाती है .

मेला का होता है आयोजन

पूरे सावन भर घोघड़ धाम में मेले का आयोजन किया जाता है जिसमें झूलों सहित दूर-दराज से आये दुकानदार यहां अपनी दुकानें लगाते हैं. मेले की जगह खान-पान, खिलौने, घरेलू सामान, मनिहारी की सैकड़ों दुकानें यहां लगायी जाती है वर्षों से कई दुकानदार यहां अपनी दुकानें लगाते आ रहे हैं. आने वाले भक्तों की सुख-सुविधा सहित सुरक्षा-व्यवस्था भीड़ नियंत्रण की लेकर भी पुलिस प्रशासन व घोघड़ धाम ट्रस्ट को सहयोग करने नवयुवक संघ बजरंग दल सहित अन्य कई संस्था अपना सहयोग करती है सुरक्षा व्यवस्था को ले प्रशासन व ट्रस्ट के बीच दो तीन दौर की बातचीत हो चुकी है सारी रूप रेखा तैयार ही चुकी है. किसी भी अप्रिय घटना से निबटने के लिए अग्निशमन विभाग के कर्मचारियों की नियुक्ति भी की जाती है. रविवार रात व सोमवार को खुद पुलिस के बड़े अधिकारी उपस्थित रहकर सुरक्षा व्यवस्था पर अपनी नजर बनाये रखते हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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