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मन की अशांति दूर किये बिना वैश्विक शांति की कल्पना असंभव

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मन की अशांति दूर किये बिना वैश्विक शांति की कल्पना असंभव

राउरकेला. हमारा अज्ञान ही हमारे दुखों का कारण है. कोई व्यक्ति अयोग्य नहीं, अच्छाइयां-बुराइयां सबके भीतर हैं. हमें दुर्बलताओं, कठिनाइयों से घबराना नहीं है. उन कठिनाइयों को दूर करने की जो प्रेरणा, जो शक्ति, जो सामर्थ्य है, वह अध्यात्म के आलोक से, स्वर्वेद के स्वर से एक साधक को अवश्य ही प्राप्त होती हैं. क्योंकि हमारे भीतर अंतरात्मा रूप से परमात्मा ही तो विद्यमान हैं. उक्त बातें स्वर्वेद कथामृत के प्रवर्तक सुपूज्य संत प्रवर विज्ञान देव जी महाराज ने संकल्प यात्रा के त्रिशक्ति मंदिर धाम परिसर में आयोजित जय स्वर्वेद कथा एवं ध्यान साधना सत्र में उपस्थित श्रद्धालुओं के बीच व्यक्त की. उन्होंने बताया कि आज मन पर नियंत्रण नहीं होने से समाज में विसंगतियां बढ़ रही हैं. यूनेस्को की एक प्रस्तावना कहती है कि युद्ध की प्राचीरें कुत्सित मन से निकलती हैं. अतः मन पर नियंत्रण आवश्यक है. हमारे मन में असीम शक्ति है. ईश्वर ने हमें बड़ी शक्तियों वाला अन्तःकरण दिया है. मानव के मन में अशांति है और जब तक यह अशांति है, तब तक विश्व में शांति की कल्पना नहीं की जा सकती. मन की अशांति को विहंगम योग की ध्यान साधना के द्वारा दूर किया जा सकता है. भारत की आत्मा का नाम अध्यात्म है. आध्यात्मिक महापुरुषों के बदौलत ही भारत विश्व गुरु था, है और आगे भी रहेगा. उपस्थित श्रद्धालुओं को विहंगम योग के क्रियात्मक योग साधना को सिखाते हुए कहा कि यह खुद से खुद की दूरी मिटाने के लिए है.

स्वर्वेद के दोहों की संगीतमय प्रस्तुति ने मोहा मन

लगभग दो घंटे तक सत्संग चला, जिसमें स्वर्वेद के दोहों की संगीतमय प्रस्तुति से सभी श्रोता मंत्रमुग्ध हो उठे. दिव्यवाणी के पश्चात मुख्य आगंतुकों को संत प्रवर जी के हाथों विहंगम योग का प्रधान सद्ग्रंथ स्वर्वेद भेंट किया गया. आयोजकों ने बताया कि विहंगम योग संत समाज के शताब्दी समारोह महोत्सव एवं 25000 कुंडीय स्वर्वेद ज्ञान महायज्ञ के निमित्त संत प्रवर विज्ञान देव जी महाराज सात जुलाई को संकल्प यात्रा का शुभारंभ कन्याकुमारी से हो चुका है. संकल्प यात्रा के प्रथम चरण में दक्षिण भारत के सभी राज्यों के विभिन्न शहरों के पश्चात महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ के बाद ओडिशा के भुवनेश्वर, पुरी, ब्रह्मपुर, नवरंगपुर , झारसुगुड़ा होते हुए आज राउरकेला पहुंची.

6-7 दिसंबर 2025 को होगा स्वर्वेद ज्ञान महायज्ञ

आयोजकों ने बताया कि 6 एवं 7 दिसंबर, 2025 को विशालतम ध्यान-साधना केंद्र (मेडिटेशन सेंटर) स्वर्वेद महामंदिर, वाराणसी के पावन परिसर में 25000 कुंडीय स्वर्वेद ज्ञान महायज्ञ होना है. इसी क्रम में यह संकल्प यात्रा हो रही है, जिससे अधिक से अधिक लोगों को पूरे भारत वर्ष में लाभ मिले. इस अवसर पर काफी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे.

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