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Rourkela News: नौ लाख की आबादी वाले राउरकेला में 22 वर्षों में एक भी आवासीय परियोजना नहीं हुई पूरी

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Rourkela News: नौ लाख की आबादी वाले राउरकेला में 22 वर्षों में एक भी आवासीय परियोजना नहीं हुई पूरी

Rourkela News: स्मार्ट सिटी राउरकेला की लगभग नौ लाख की आबादी के लिए आवास बड़ी समस्या के रूप में उभरा है. राउरकेला विकास प्राधिकरण (आरडीए) और राज्य हाउसिंग बोर्ड के द्वारा पिछले 22 वर्षों में एक भी आवासीय परियोजना पूरी नहीं की जा सकी है. आरडीए के तत्कालीन चेयरमैन ने करीब 20 हजार हाउसिंग प्रोजेक्ट की घोषणा की थी. लेकिन, बीजद सरकार या आरडीए पिछले 24 वर्ष के दौरान परियोजना के लिए एक भी ईंट नहीं रखी. छेंड कॉलोनी में आवास परियोजना के लिए आरडीए को लगभग 104 एकड़ भूमि आवंटित की गयी है. उस स्थान पर कुछ ही प्रधानमंत्री आवास निर्माणाधीन हैं. आज तक एक भी आवासीय परियोजना पूरी नहीं हुई. अब प्रदेश में सरकार बदल गयी है. नयी सरकार से प्रस्तावित आवास को क्रियान्वित करने की उम्मीद है.

छेंड और बसंती कॉलोनी में 5193 आवास किये गये थे आवंटित

हाउस बिल्डिंग कंपनी के पास जितनी जमीन है, उसके मुकाबले हाउसिंग प्रोजेक्ट शून्य है. अब इसे लेकर नयी सरकार की घोषणा का इंतजार है. इसके अलावा कई दिनों से यह चर्चा चल रही है कि इमारत में दो चार मंजिला अपार्टमेंट में 300 से अधिक आवासीय इकाइयां और भूतल पर वाणिज्यिक प्रतिष्ठान होंगे. वहीं छेंड कॉलोनी व बसंती कॉलोनी में इस संस्था ने 5193 मकान बनाकर आवंटित किया था. छेंड कॉलोनी मे ईसीआर, एमआइसीआर, एल1, एल2, एमआइजी, एचआइजी, डुप्लेक्स आदि ब्लॉकों में 2817 आवासों का निर्माण एवं आवंटन किया जा चुका है. बसंती कॉलोनी एल, बीएल, सीएल, डीएल, डीई, एफई, इडब्ल्यूएस प्लॉट, एम, बीएम, सीएम, डीएम, इएम, एफएम, जीएम, इसीआर ब्लॉक में कुल 2376 आवास हैं. वहीं सुंदरगढ़ में लगभग 250 घरों का निर्माण किया गया है. बाद में एक भी मकान नहीं बना.

आरडीए ने नहीं भेजी है डीपीआर

राउरकेला विकास प्राधिकरण (आरडीए) के पास 104 एकड़ जमीन होने के बावजूद विभाग के अधिकारी मौन हैं. डीपीआर तैयार कर शासन को नहीं भेजी गयी है. जिसे लेकर कई बार राजनीतिक दलों ने आंदोलन किया है. हाल ही में आरडीए के एक डिवीजनल अधिकारी ने कहा था कि सरकार की अनुमति मिलते ही प्रोजेक्ट शुरू हो जायेगा. सरकार बदलने के बाद विभाग ने कहा कि नयी सरकार से अनुमति नहीं मिलने के कारण प्रोजेक्ट पर काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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