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Home Rajya ओडिशा Rourkela News: एनआइटी की टीम ने साइबर हमलों से माइक्रोग्रिड्स की सुरक्षा के लिए व्हेल-प्रेरित एल्गोरिदम विकसित किया

Rourkela News: एनआइटी की टीम ने साइबर हमलों से माइक्रोग्रिड्स की सुरक्षा के लिए व्हेल-प्रेरित एल्गोरिदम विकसित किया

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Rourkela News: एनआइटी की टीम ने साइबर हमलों से माइक्रोग्रिड्स की सुरक्षा के लिए व्हेल-प्रेरित एल्गोरिदम विकसित किया

Rourkela News: राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआइटी) राउरकेला के शोधकर्ताओं ने माइक्रोग्रिड, यानी स्थानीयकृत पावर सिस्टम की स्थिरता के लिए साइबर लचीलापन को मजबूत करने वाला एक एल्गोरिदम विकसित किया है. एनआइटी राउरकेला के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर एवं विभाग के अध्यक्ष प्रो प्रभात कुमार राय के नेतृत्व में अनुसंधान टीम ने एक संशोधित इम्प्रूव्ड व्हेल ऑप्टिमाइजेशन (एमआइडब्ल्यूओ) एल्गोरिदम विकसित किया है, जो हंपबैक व्हेल की शिकार रणनीतियों से प्रेरित है.

गलत डेटा इंजेक्शन और टाइम-डिले से साइबर हमलों का रहता खतरा

ये व्हेल बबल-नेट फीडिंग का उपयोग करती हैं, जिसमें वे मछलियों के चारों ओर घूमती हैं और बुलबुले छोड़ती हैं, ताकि एक जाल तैयार हो सके, जो उन्हें फंसा ले. माइक्रोग्रिड में स्टोरेज और पारंपरिक जनरेटर के साथ सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा जैसी अक्षय ऊर्जाओं को एकीकृत किया जाता है. यह पूरी दुनिया के ऊर्जा क्षेत्र में बड़े बदलाव के लिए महत्वपूर्ण है. लेकिन चूंकि ये माइक्रोग्रिड डिजिटल संचार पर निर्भर करते हैं, इसलिए गलत डेटा इंजेक्शन और टाइम-डिले के माध्यम से इन पर साइबर हमलों का खतरा रहता है. इस खतरे से बचाव के लिए शोधकर्ताओं ने एक मोडिफाइड इम्प्रूव्ड व्हेल ऑप्टिमाइजेशन-आधारित फ्रैक्शनल ऑर्डर पीआइडी (एमआइडब्ल्यूओ-एफओपीआइडी) कंट्रोलर पेश किया है, जो साइबर हमलों और ऊर्जा भंडारण प्रणालियों में अस्थिरता के दौरान एक मजबूत द्वितीय फ्रिक्वेंसी नियंत्रण सुनिश्चित करता है. एमआइडब्ल्यूओ मूल विधि को उच्च स्तरीय बनाता है, क्योंकि यह अधिक सटीक, तेज और समाधान की तलाश में मिलने वाली स्थानीय त्रुटियों से बेहतर बचाव करता है.

साइबर हमले, रैंडम अटैक और मैलवेयर घुसपैठ को करता है नियंत्रित

शोध के बारे में बात करते हुए प्रो प्रभात कुमार राय (प्रोफेसर एवं प्रमुख-विद्युत अभियांत्रिकी विभाग, एनआइटी राउरकेला) ने कहा कि आधुनिक माइक्रोग्रिड्स में विभिन्न घटकों के बीच सूचना के आदान-प्रदान के लिए संचार नेटवर्क प्राथमिक माध्यम के रूप में कार्य करते हैं, जिससे वे साइबर हमलों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं. इनमें टाइम-डिले अटैक शामिल हैं, जिसमें सेंसर या नियंत्रकों से आने वाली जानकारी को जानबूझकर विलंबित किया जाता है और फॉल्स डेटा इंजेक्शन, जिसमें हमलावर सिस्टम डेटा में हेरफेर कर नियंत्रण क्रियाओं को गुमराह करते हैं, जिससे अस्थिरता उत्पन्न हो सकती है. इन चुनौतियों से निबटने के लिए प्रस्तावित एल्गोरिदम में कई उन्नत सुधार शामिल किये गये हैं, जिनमें गतिशील रूप से समायोजित नियंत्रण पैरामीटर के साथ एक अनुकूली रणनीति और एक बहु-चरणीय शोषण तंत्र शामिल है. ये संशोधन अभिसरण विशेषताओं, समाधान की सटीकता और मजबूती को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाते हैं, और ठहराव तथा स्थानीय फंसाव से संबंधित समस्याओं को कम करते हैं. इस शोध में प्रस्तावित कंट्रोलर विभिन्न साइबर हमलों के परिदृश्यों में, जैसे टाइम-डिले अटैक, फॉल्स डेटा इंजेक्शन (एफडीआइ), ऊर्जा भंडारण प्रणाली (इएसएस) की स्थिति पर हमले, रैंडम अटैक और मैलवेयर घुसपैठ के दौरान, कॉस्ट फंक्शन को अनुकूलित करके फ्रीक्वेंसी विचलनों को न्यूनतम करता है. सिमुलेशन अध्ययन और वास्तविक हार्डवेयर प्रयोग दोनों से यह पुष्टि होती है कि प्रस्तावित दृष्टिकोण माइक्रोग्रिड फ्रीक्वेंसी नियंत्रण को लचीला बनाता है और ऐसे प्रतिकूल परिस्थितियों में प्रणाली की स्थिरता बनाये रखता है.

विकसित एल्गोरिदम की विशिष्ट विशेषताएं

1. यह आधुनिक विद्युत प्रणालियों की सुरक्षा और विश्वसनीयता बढ़ाता है2. यह साइबर हमलों के बावजूद माइक्रोग्रिड के काम में स्थिरता रखता है, जिससे सेवा बाधित होने का खतरा कम होता है3. यह एक विश्वसनीय प्रणाली का कार्य प्रदर्शन सुनिश्चित करते हुए सौर ऊर्जा और बैटरी स्टोरेज जैसे अक्षय ऊर्जा स्रोतों के एकीकरण को आसान बनाता है4. यह महत्वपूर्ण बुनियादी व्यवस्थाओं को डिजिटल खतरों से मजबूत सुरक्षा देता है, जिससे संपूर्ण सुदृढ़़ता बढ़ती है

आइइइइ ट्रांजेक्शन्स ऑन कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स में प्रकाशित हुआ शोध

इस शोध के निष्कर्ष आइइइइ ट्रांजेक्शन्स ऑन कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स नामक प्रतिष्ठित पत्रिका में प्रकाशित किये गये हैं. यह शोध पत्र प्रो प्रभात कुमार राय, रमेश चंद्र खमारी (रिसर्च स्कॉलर, एनआइटी राउरकेला), डॉ मनोज कुमार सेनापति (गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, क्योंझर) और डॉ संजीव कुमार पद्मनाभन (यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ-ईस्टर्न नॉर्वे, नॉर्वे) ने मिलकर लिखा है. यह शोध उपलब्धि न केवल भारत के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों का समर्थन करती है, बल्कि वैश्विक नीति-निर्माताओं, उपयोगिता कंपनियों और उद्योग नेताओं को अधिक स्मार्ट और सुरक्षित ऊर्जा प्रबंधन प्रथाओं को आगे बढ़ाने के लिए एक मजबूत रूपरेखा भी प्रदान करती है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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