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Home Rajya ओडिशा Rourkela News: कुड़मी समाज ने मनाया काला दिवस, अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग

Rourkela News: कुड़मी समाज ने मनाया काला दिवस, अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग

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Rourkela News: कुड़मी समाज ने मनाया काला दिवस, अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग

Rourkela News: छह सितंबर, 1950 को कुड़मी जाति को अनुसूचित जनजाति (एसटी) की सूची से अलग कर दिया गया था. इसके प्रतिवाद में तथा कुड़मी जाति को पुन: एसटी की मान्यता प्रदान करने की मांग पर छह सितंबर काे विगत कई वर्षों से काला दिवस मनाया जाता रहा है. इसी कड़ी इस वर्ष भी पानपोष अनुमंडल के अलग-अलग स्थानों पर शनिवार को काला दिवस मनाया गया.

नाग्रा पीढ़ी कुड़मी समाज ने बिसरा में किया प्रदर्शन

राउरकेला कुड़मी समाज की ओर से शनिवार की सुबह सेक्टर-17 स्थित आंबेडकर इनक्लेव में डाॅ बीआर आंबेडकर की प्रतिमा के समक्ष काला दिवस मनाया गया. इस दौरान कुड़मी जाति को पुन: एसटी की मान्यता देने समेत अन्य मांगों के समर्थन में नारेबाजी की गयी. इस प्रदर्शन में कुड़मी समाज के मनोरंजन महांत, जेठु महतो, विष्णु महांत, महेंद्र महतो व अन्य शामिल रहे. इसी प्रकार नाग्रा पीढ़ी कुड़मी समाज की ओर से बिसरा में काला दिवस मनाने के साथ ओडिशा के मुख्यमंत्री के नाम बिसरा बीडीओ को सौंपा गया. इसमें कुड़मी जाति को पुन: एसटी वर्ग में शामिल करने, कुड़माली भाषा को संविधान की आठवीं सूची में शामिल करने, कुड़माली भाषा में पहली से स्नात्तकोत्तर तक शिक्षा प्रदान करने, कुड़मी संप्रदाय को अधिकृत जमीन का पट्टा प्रदान करने (छाेटा नागपुर टेंडेंसी एक्ट लागू करने), कुड़मी विकास परिषद का गठन करने की मांग शामिल है. काला दिवस मनाने व ज्ञापन सौंपने के दौरान नाग्रा कुड़मी पीढ़ी समाज के अध्यक्ष ध्रुवचरण महतो, हरीश महतो, महेंद्र महतो, कृष्ण चंद्र महतो, रोहिन महतो, संगीता महतो व अन्य मौजूद थे.

दिल्ली के जंतर-मंतर पर ओडिशा, झारखंड व बंगाल के कुड़मियों का धरना-प्रदर्शन

टोटेमिक कुड़मी/कुरमी (महतो) समाज के बैनर तले दिल्ली के जंतर-मंतर में समाज के अगुआ शीतल ओहदार की अध्यक्षता में धरना व प्रदर्शन किया गया, जिसमें ओडिशा, झारखंड और बंगाल के कुड़मियों ने हिस्सा लिया. धरना प्रदर्शन के माध्यम से कुड़मियों को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने और कुड़माली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग की गयी. ओडिशा के दिव्या सिंह मोहंता ने कहा कि भारत सरकार का सितंबर 1950 का आदेश यह घोषित करता है कि केवल वे जनजाति जो 1931 की जनगणना प्रतिवेदन में प्रिमिटिव ट्राइब की सूची में शामिल हैं, उन्हें देश के संविधान के अनुच्छेद 342 के तहत महामहिम राष्ट्रपति किसी भी समुदाय को अनुसूचित जनजाति घोषित करेंगे और उन्हें अनुसूचित जनजातियों की सूची में शामिल किया जायेगा. किंतु कुड़मियों को लगातार 75 वर्षों तक संघर्ष करने के बाद भी संवैधानिक अधिकार से वंचित किया गया.

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