[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home Rajya ओडिशा Rourkela News: एथलेटिक्स छात्रावास का नहीं हुआ निर्माण, सुविधाओं से वंचित हैं प्रशिक्षु

Rourkela News: एथलेटिक्स छात्रावास का नहीं हुआ निर्माण, सुविधाओं से वंचित हैं प्रशिक्षु

0
Rourkela News: एथलेटिक्स छात्रावास का नहीं हुआ निर्माण, सुविधाओं से वंचित हैं प्रशिक्षु

Rourkela News: ओडिशा ने पिछले एक दशक में खेलों के क्षेत्र में एक महाशक्ति के रूप में उभरने के लिए कई कदम उठाये हैं. राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेलों को प्रायोजित करने से लेकर कई बड़ी प्रतियोगिताओं की सफलतापूर्वक मेजबानी करके राज्य ने अपनी अलग पहचान बनायी है. साथ ही खिलाड़ियों को वित्तीय प्रोत्साहन और नौकरियां प्रदान की जा रही हैं. राज्यभर में खेल बुनियादी ढांचे का विकास करने पर भी महत्व दिया गया है. लेकिन राउरकेला में करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से बने बिरसा मुंडा एथलेटिक्स स्टेडियम का अपेक्षित उपयोग नहीं हो पाया है.

10 मार्च, 2023 को तत्कालीन मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने किया था उद्घाटन

बिसरा चौक स्थित बिरसा मुंडा एथलेटिक्स स्टेडियम का उद्घाटन 10 मार्च, 2023 को तत्कालीन मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने किया था. अब वर्तमान भाजपा की डबल इंजन सरकार में यह स्टेडियम उपेक्षा का दंश झेल रहा है. विदित हो कि इसके समुचित उपयोग के लिए राज्य की पूर्ववर्ती नवीन पटनायक सरकार ने यहां एथलेटिक्स छात्रावास के निर्माण को मंजूरी दी थी, लेकिन इसका निर्माण अभी तक नहीं हो पाया है, हालांकि पिछले साल यहां एथलेटिक्स कोच की नियुक्ति होने के बाद से कुछ युवा एथलीट यहां नियमित रूप से अभ्यास भी कर रहे हैं. लेकिन उन्हें कोई सुविधा नहीं मिलती है. इतनी अनियमितताओं के बावजूद वे खुद को सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी साबित करने का प्रयास जारी रखे हुए हैं.

अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट में क्षेत्र को बताया प्रदूषित, परियोजना ठंडे बस्ते में

पिछले दिन जांच के लिए यहां आये अधिकारियों ने इस क्षेत्र को प्रदूषित करार दिया था. उन्होंने रिपोर्ट दी थी कि यह क्षेत्र धुआं से प्रदूषित है और खेल के छात्रों के लिए अनुपयुक्त है. इस वजह से छात्रावास बनाने का प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चला गया है. सबसे आश्चर्य की बात यह है कि 40 साल पहले यहां एक हॉकी हॉस्टल बनाया गया था, जिसमें से बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी निकले थे और उन्हें कोई प्रदूषण छू भी नहीं पाया. यहां हाॅकी विश्व कप का आयोजन भी हो चुका है. राउरकेला के खिलाड़ी अन्य खेलों में भी राज्य और देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं.

खेल मंत्री ने मामले का संज्ञान लेने का दिया था आश्वासन

कुछ दिन पहले खेल मंत्री सूर्यवंशी सूरज ने स्टेडियम का दौरा किया था. उन्होंने मामले का संज्ञान लेने का आश्वासन दिया है. लेकिन अब तक उनकी तरफ से कोई पहल नहीं हुई है. स्थानीय खेल प्रेमियों का कहना है कि स्टेडियम के निर्माण पर सरकार ने करोड़ों रुपये खर्च किये हैं. यह पश्चिमी ओडिशा का एकमात्र सिंथेटिक-ट्रैक वाला स्टेडियम है. इसलिए इसे खेल छात्र निवास नहीं, बल्कि पश्चिमी ओडिशा के लिए क्षेत्रीय खेल प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए, ताकि इसका सही उपयोग हो सके.

कठिनाइयों के बावजूद बच्चे कर रहे उत्कृष्ट प्रदर्शन : मुख्य कोच

स्कूल के मुख्य कोच शिवप्रसाद मिश्रा कहते हैं कि पिछले साल वे कुछ बच्चों के साथ राउरकेला आये थे और वादा किया था कि यहां खेल छात्रावास खुलवायेंगे. लेकिन दुख की बात यह है कि अब तक ऐसा नहीं हो पाया है. यहां बिना किसी सुविधा के रहने वाले बच्चों ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है और राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीते हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel