[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home Rajya ओडिशा सुंदरगढ़ : 388 करोड़ रुपये की मेगा पेयजल परियोजना में महज 53 फीसदी काम हुआ

सुंदरगढ़ : 388 करोड़ रुपये की मेगा पेयजल परियोजना में महज 53 फीसदी काम हुआ

0
सुंदरगढ़ : 388 करोड़ रुपये की मेगा पेयजल परियोजना में महज 53 फीसदी काम हुआ

राउरकेला. सुंदरगढ़ जिला के ग्रामांचल में 24 घंटे शुद्ध पेयजल मुहैया कराने के लिए तत्कालीन बीजद सरकार ने मेगा पेयजल परियोजना की शुरुआत की थी. लेकिन, ग्रामीण जलापूर्ति तथा परिमल विभाग (आरडब्ल्यूएसएस) के इस प्रोजेक्ट का काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है. 388 करोड़ रुपये की इस परियोजना में पिछले साढ़े तीन साल में 53 फीसदी ही काम हो पाया है. बाकी 47 फीसदी काम कब पूरा होगा, इसका स्पष्ट जवाब किसी के पास नहीं है. इस परियोजना का काम पूरा होने से सुंदरगढ़ जिला के बिसरा, बणई, लाठीकटा व लहुणीपाड़ा ब्लाॅक के पांच लाख लोग लाभान्वित होंगे.

मुख्य ठेका कंपनी ने 40-50 ठेकेदारों के बीच बांटा काम

मेगा पेयजल परियोजना का काम कल्पतरु प्रोजेक्ट इंटरनेशनल लिमिटेड नामक ठेका कंपनी को दिया गया है. इसने यह काम खुद न करके 40 से 50 ठेकेदारों के बीच बांट दिया है. काम की जांच व बिल बनाने का जिम्मा आरडब्ल्यूएसएस ने एलएम मालवीय नामक एक ठेका संस्था को सौंपा है. आरोप लगाया जा रहा है कि इसका पूरा फायदा दोनों ठेका कंपनियों तथा बिल बनाने वाली संस्था के अधिकारी उठा रहे हैं.

काम की गुणवत्ता पर असर

स्थानीय लोगों का आरोप है कि अब तक इस परियोजना का जितना काम हो चुका है, उसमें 30 से 40 फीसदी में अनियमितता देखी जा रही है. खासकर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (डब्ल्यूटीपी), नदी तटबंध (इनटेक वाल) तथा पाइप बिछाने के काम में अनियमितता के आरोप लगे हैं. अब तक 80 फीसदी पाइप बिछाने का काम पूरा हो चुका है. पाइप बिछाने के काम में आठ इंच की बजाय चार इंच की ढलाई की गयी है. पाइप बिछाने के बाद बालू डालने का नियम है, लेकिन इस ओर ध्यान नहीं दिया गया. अधिकतर स्थानों पर ओवरहेड टैंकों का निर्माण आधा करने के बाद असुरक्षित हालत में छोड़ दिया गया है.

200 करोड़ रुपये के काम में 30 फीसदी भ्रष्टाचार की शिकायत

प्रोजेक्ट के तहत करीब 200 करोड़ रुपये से 53 फीसदी तक काम हो चुका है. लेकिन इसमें 30 फीसदी भ्रष्टाचार होने की शिकायत विजिलेंस विभाग में पिछले दिनों की गयी है. विजिलेंस विभाग दस्तावेजों की समीक्षा कर रहा है तथा जल्द जांच शुरू किये जाने की बात कही गयी है.

विजिलेंस विभाग जल्द शुरू करे जांच

बीजद नेता बीरेन सेनापति ने कहा कि मेगा पेयजल परियोजना पूरी होने पर चार ब्लाॅक के पांच लाख ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल मिलेगा. लेकिन, यह कार्य भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता जा रहा है. विजिलेंस विभाग को जल्द से जल्द इसकी जांच शुरू करने के साथ ही दोषी व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की जरूरत है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel