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Home झारखण्ड पश्चिमी सिंहभूम नोवामुंडी के मॉडल आंगनबाड़ी केंद्र की हालत खस्ता, जर्जर भवन में पढ़ने को मजबूर मासूम 

नोवामुंडी के मॉडल आंगनबाड़ी केंद्र की हालत खस्ता, जर्जर भवन में पढ़ने को मजबूर मासूम 

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नोवामुंडी के मॉडल आंगनबाड़ी केंद्र की हालत खस्ता, जर्जर भवन में पढ़ने को मजबूर मासूम 
जर्जर हालत में आंगनबाड़ी

नोवामुंडी से सुबोध की रिपोर्ट

Noamundi News: झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम के नोवामुंडी प्रखंड के कोटगढ़ पंचायत अंतर्गत इटर बालजुड़ी गांव स्थित मॉडल आंगनबाड़ी केंद्र की हालत चिंताजनक बनी हुई है. सरकार द्वारा “मॉडल आंगनबाड़ी केंद्र” का दर्जा दिए जाने के बावजूद यहां बच्चों को मूलभूत सुविधाएं तक नसीब नहीं हो पा रही हैं. करीब 15 वर्ष से भी अधिक पुराना यह भवन अब पूरी तरह जर्जर हो चुका है और कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकता है.

बारिश में टपकती छत 

बरसात के दिनों में आंगनबाड़ी केंद्र की छत से जगह-जगह पानी टपकता है, जबकि फर्श कई हिस्सों में टूट चुकी है. बिल्डिंग के चारों ओर बने खिड़कियों के छज्जे पूरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं, जो कभी भी गिर सकते हैं. इतना ही नहीं, केंद्र की बाउंड्री वॉल भी टूट चुकी है, जिससे बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. 

भीषण गर्मी में बिना पंखे के पढ़ रहे बच्चे 

इस भीषण गर्मी में छोटे-छोटे बच्चे पसीने से तरबतर होकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं. केंद्र में बिजली कनेक्शन और पंखे तो लगे हैं, लेकिन बिजली वायरिंग खराब होने और चूहों द्वारा तार काट दिए जाने के कारण करीब एक साल से पंखे बंद पड़े हैं. नतीजतन मासूम बच्चों को उमस भरे माहौल में दिन बिताना पड़ रहा है. 

शौचालय और किचन तक नहीं

मॉडल आंगनबाड़ी केंद्र में शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं है. बच्चों के भोजन बनाने के लिए अलग से किचन भी नहीं बनाया गया है. हालांकि केंद्र में गैस की सुविधा उपलब्ध है और बच्चों को नाश्ता और भोजन दिया जाता है, लेकिन आधारभूत संरचना की भारी कमी साफ दिखाई देती है. 

30 बच्चे नामांकित 

आंगनबाड़ी केंद्र में कुल 30 बच्चे नामांकित हैं. इसके अलावा 15 धात्री माताओं और 6 गर्भवती महिलाओं का नाम भी रजिस्टर में दर्ज है. सभी लाभुकों के बीच राशन का वितरण नियमित रूप से किया जाता है. 

सेविका ने क्या कहा? 

जब इस संबंध में आंगनबाड़ी सेविका योशिला पूर्ति से बात की गई तो उन्होंने बताया कि केंद्र की बदहाल स्थिति की जानकारी पहले ही विभाग और पूर्व सीडीपीओ कार्यालय को दी जा चुकी है. बावजूद इसके अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई. केंद्र में सहायिका के रूप में कैरी लागूरी कार्यरत हैं.  

प्रशासन से ग्रामीणों की मांग

ग्रामीणों और अभिभावकों ने जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग से अविलंब जर्जर भवन की मरम्मत, बिजली व्यवस्था दुरुस्त करने, शौचालय और किचन निर्माण कराने और बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने की मांग की है. लोगों का कहना है कि अगर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है.

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श्वेता वैद्य प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के तौर पर काम करती हैं. उन्हें कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में एक साल से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में श्वेता झारखंड बीट को कवर कर रही हैं, जहां वह राज्य की ताजा खबरें, लोगों की भलाई से जुड़े मुद्दे, सरकारी योजनाओं, स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक विषयों पर आधारित स्टोरीज तैयार करती हैं. श्वेता की हर बार कोशिश यही रहती है कि बात आसान, साफ और सीधे तरीके से लोगों तक पहुंचे, जिससे कि हर कोई उसे बिना दिक्कत के समझ सके. कंटेंट राइटर के तौर पर उनका फोकस होता है कि कंटेंट सिंपल, रिलेटेबल और यूजर-फ्रेंडली हो. झारखंड बीट से पहले उन्होंने लाइफस्टाइल बीट के लिए भी कंटेंट लिखा. इस बीट में उन्होंने रेसिपी, फैशन, ब्यूटी टिप्स, होम डेकोर, किचन टिप्स, गार्डनिंग टिप्स और लेटेस्ट मेहंदी डिजाइन्स जैसे रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर आर्टिकल लिखे.
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