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Home झारखण्ड पश्चिमी सिंहभूम आस्था के रास्ते पर गंदगी पर गंदगी का अंबार, सूर्यदेव को अर्घ्य देने कैसे जाएंगी नोवामुंडी की छठ व्रतियां?

आस्था के रास्ते पर गंदगी पर गंदगी का अंबार, सूर्यदेव को अर्घ्य देने कैसे जाएंगी नोवामुंडी की छठ व्रतियां?

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आस्था के रास्ते पर गंदगी पर गंदगी का अंबार, सूर्यदेव को अर्घ्य देने कैसे जाएंगी नोवामुंडी की छठ व्रतियां?
गंदगी से भरी नोवामुंडी की सड़क और इनसेट में तालाब, जहां स्नान पूजा करने व्रतियां जाती हैं. फोटो: प्रभात खबर

नोवामुंडी से सुबोध मिश्रा की रिपोर्ट

Noamundi News: एक तरफ लोक आस्था का महापर्व चैती छठ नहाय-खाय के साथ पूरे विधि-विधान से शुरू हो चुका है, वहीं दूसरी तरफ नोवामुंडी में व्रतियों को श्रद्धा से ज्यादा अव्यवस्था का सामना करना पड़ रहा है. जिस रास्ते से होकर श्रद्धालु भगवान सूर्य को अर्घ्य देने जाते हैं, आज वही रास्ता गंदगी और नाली के बहते पानी से पट गया है. चार दिवसीय इस पवित्र पर्व में शुद्धता का विशेष महत्व होता है. व्रती तन-मन की पवित्रता के साथ कठिन नियमों का पालन करते हैं, लेकिन यहां हालात ऐसे हैं कि नहाय-खाय के दिन ही व्रतियों को गंदे पानी से गुजरकर तालाब तक पहुंचना पड़ा. जगह-जगह नालियों का पानी सड़कों पर बह रहा है, जिससे हर कदम पर परेशानी खड़ी हो रही है.

आस्था बनाम अव्यवस्था

छठ केवल एक पर्व नहीं, बल्कि अनुशासन, स्वच्छता और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है. लेकिन, नोवामुंडी में घाटों और तालाबों की अब तक सफाई नहीं होना कई सवाल खड़े करता है. क्या आस्था के इस महापर्व में भी व्रतियों को ऐसी परेशानियों से गुजरना पड़ेगा?

बैठकों में वादे, जमीन पर सन्नाटा

अभी हाल में हुई शांति समिति की बैठक में छठ को लेकर साफ-सफाई का भरोसा दिया गया था. अधिकारियों के सामने मुद्दा उठाया गया. योजनाएं बनीं. लेकिन, हकीकत यह है कि अभी तक न तो घाट साफ हुए और न ही रास्तों की स्थिति सुधरी. वादों और व्यवस्था के बीच की दूरी साफ नजर आ रही है.

अर्घ्य के दिन क्या होगा?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब अभी से यह हाल है, तो अर्घ्य के दिन श्रद्धालु किस तरह इन गंदे और जलजमाव वाले रास्तों से होकर घाट तक पहुंचेंगे? व्रतियों और उनके परिवारों में इसे लेकर गहरी चिंता है.

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प्रशासन से उम्मीद

स्थानीय लोगों और व्रतियों ने प्रशासन से अपील की है कि तुरंत सफाई कार्य शुरू कराया जाए. छठ जैसे पवित्र पर्व में स्वच्छता केवल व्यवस्था नहीं, बल्कि आस्था का हिस्सा है. अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो यह अव्यवस्था श्रद्धालुओं की भावनाओं को आहत कर सकती है. नोवामुंडी आज एक सवाल पूछ रहा है कि क्या आस्था को हर बार इंतजार करना पड़ेगा, या इस बार प्रशासन जागेगा?

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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