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कनजोगा शिव मंदिर परिसर में 1982 से हो रही है पूजा

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कनजोगा शिव मंदिर परिसर में 1982 से हो रही है पूजा

रथिंद्र गुप्ता कोलेबिरा. कनजोगा गांव की दुर्गा पूजा एक गौरवशाली परंपरा है, जो आस्था, भक्ति और सामाजिक एकता का प्रतीक बन चुकी है. यह आयोजन हर वर्ष प्रखंड मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर स्थित शिव मंदिर परिसर में होता है, जो पहाड़ों से घिरा हुआ है. यहां मां जगदंबा की प्रतिमा स्थापित कर विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है. इस पूजा की शुरुआत वर्ष 1982 में गांव के प्रमुख नागरिक लिखो साहू, धनंजय साहू, बलराम साहू, आशुतोष वंशीधर साहू, माधव चरण साहू, कांता प्रसाद, सुरखें साहू, जीतन साहू, भानु सिंगर साहू, महाबल साहू, मधुधन साहू, जखनारायण साहू, मुकेश साहू, मुकुंद मुरारी साहू, सदानंद साहू, झांसी कुमार महतो, वीरेंद्र साहू, सुदर्शन साहू, धर्मराज साहू, बनारसी साहू, कुंवर साहू आदि के सहयोग से हुई थी. प्रारंभ में मूर्ति निर्माण बंगाल के पुरुलिया निवासी मूर्तिकार अनिल सूत्रधार द्वारा किया जाता था, बाद में उनके पुत्र निरंजन सूत्रधार ने यह कार्य संभाला. तिरपाल बांधकर प्रतिमा स्थापित की जाती थी शुरुआत में तिरपाल बांधकर प्रतिमा स्थापित की जाती थी. प्रथम पुरोहित लसिया धनंजय पाठक थे, बाद में मंथन मिश्रा और वर्तमान में बसंत मिश्रा पूजा संपन्न कराते हैं. यजमान की भूमिका विशेश्वर साहू निभाते हैं. पूजा स्थल की भूमि राधेश्याम साहू ने दान दी थी. दुर्गा मंडप के निर्माण के लिए ग्रामीणों ने मुट्ठी भर चावल और चार आना साप्ताहिक योगदान देकर कच्चे भवन की नींव रखी, जिसकी अगुवाई फुलेंद्र साहू ने की। 2016 तक पूजा इसी भवन में होती रही, फिर 2017 में तत्कालीन सांसद कड़िया मुंडा द्वारा सामुदायिक भवन का निर्माण कराया गया, जहां अब पूजा होती है. पहले दो हजार, अब दो लाख होता है खर्च प्रारंभ में पूजा का खर्च लगभग 2000 रुपया था, जो अब दो लाख तक पहुंच चुका है. हर वर्ष नेहरू युवा क्लब और दुर्गा पूजा समिति के सहयोग से आयोजन होता है. इस वर्ष की समिति में कीर्ति राज साहू अध्यक्ष, वीर सेन साहू सचिव, कृष्णा साहू कोषाध्यक्ष बनाए गए हैं, साथ ही कई अन्य सदस्य भी शामिल हैं. विसर्जन के दिन कनजोगा पहाड़ पर रावण दहन होता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु भाग लेते हैं.

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