[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home झारखण्ड सिमडेगा डायन-बिसाही के शक में हत्या करने वाले को आजीवन कारावास, 26 हजार रुपये का जुर्माना

डायन-बिसाही के शक में हत्या करने वाले को आजीवन कारावास, 26 हजार रुपये का जुर्माना

0
डायन-बिसाही के शक में हत्या करने वाले को आजीवन कारावास, 26 हजार रुपये का जुर्माना
प्रतीकात्मक फोटो.

सिमडेगा से रविकांत साहू की रिपोर्ट

Simdega News: झारखंड के सिमडेगा जिले में डायन-बिसाही के आरोप में एक महिला की हत्या करने के मामले में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. अदालत ने आरोपी पर 26 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है. करीब चार वर्ष पुराने इस चर्चित मामले में फैसला आने के बाद पीड़ित परिवार को न्याय मिला है.

पाकरटांड़ थाना क्षेत्र का है मामला

जानकारी के अनुसार पाकरटांड़ थाना कांड संख्या 16/22, 30 जुलाई 2022 के तहत भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 201 के साथ-साथ डायन प्रथा प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3 और 4 के तहत मामला दर्ज किया गया था. इस मामले में रेंगारपानी गांव निवासी विश्राम बिंझिया उर्फ चिल्ली को आरोपी बनाया गया था. आरोपी के पिता का नाम सहरू बिंझिया है. न्यायालय ने सभी तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई. इसके साथ ही उस पर 26 हजार रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया गया.

वैज्ञानिक अनुसंधान और प्रभावी पैरवी से मिला न्याय

मामले में सिमडेगा पुलिस की ओर से वैज्ञानिक तरीके से अनुसंधान किया गया. साथ ही अभियोजन पक्ष ने प्रभावी ढंग से अदालत में अपना पक्ष रखा. सभी गवाहों को समय पर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जिससे मामले की सुनवाई में महत्वपूर्ण मदद मिली. अभियोजन पक्ष की ओर से लोक अभियोजक श्रीमती निशी कच्छप ने पैरवी की. वहीं इस मामले के अनुसंधानकर्ता पुलिस अवर निरीक्षक हेमकिशोर गुप्ता थे. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने आरोपी के खिलाफ फैसला सुनाया.

29 जुलाई 2022 को दर्ज कराई गई थी शिकायत

इस मामले की शुरुआत 29 जुलाई 2022 को हुई थी. मृतका की पुत्री किरण कुमारी उर्फ फिरनी कुमारी ने पाकरटांड़ थाना में शिकायत दर्ज कराई थी. शिकायत में उसने आरोप लगाया था कि उसकी मां नंदा देवी को विश्राम बिंझिया ने डायन-बिसाही का आरोप लगाकर बुरी तरह पीटा था. बताया गया कि आरोपी ने टांगी से नंदा देवी के चेहरे और सिर पर कई वार किए थे, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई थीं. गंभीर चोटों के कारण उनकी मौत हो गई थी. घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी.

चार साल बाद मिला पीड़ित परिवार को न्याय

करीब चार वर्ष तक चले इस मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाया. न्यायालय के निर्णय से मृतका के परिजनों को राहत मिली है. ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी अंधविश्वास के कारण होने वाली घटनाएं समाज के सामने गंभीर चुनौती बनी हुई हैं. विज्ञान और आधुनिक सोच के दौर में भी डायन-बिसाही जैसी कुप्रथाओं के कारण निर्दोष लोगों की जान जाना समाज के लिए चिंता का विषय है.

इसे भी पढ़ें: सोन नदी पार करने के दौरान डूबे किसान का 20 घंटे बाद भी नहीं मिला शव, तलाश में जुटे गोताखोर

सिमडेगा पुलिस ने फैसले को बताया बड़ी सफलता

सिमडेगा पुलिस ने अदालत के इस फैसले को वैज्ञानिक अनुसंधान और प्रभावी अभियोजन की सफलता बताया है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गंभीर मामलों में मजबूत साक्ष्य और समय पर गवाहों की उपस्थिति न्याय दिलाने में अहम भूमिका निभाती है. अदालत के इस फैसले को डायन प्रथा जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ एक कड़ा संदेश माना जा रहा है. इससे ऐसे मामलों में कानून के प्रति लोगों का विश्वास और मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है.

इसे भी पढ़ें: पलामू के सिक्का में शरीर सूजने के बाद बाप-बेटी की मौत, परिवार के चार लोगों की हालत गंभीर

Previous article बिहार में जमीन ट्रांसफर के नियमों में बड़ा बदलाव, डीएम और कमिश्नर की पावर बढ़ी, देखें नया आदेश
Next article नीट यूजी का री-एग्जाम 21 जून को, व्हाट्सऐप पर मिलेगी पुख्ता जानकारी; प्रशासन मुस्तैद
Avatar Of Kumarvishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel