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Home झारखण्ड सिमडेगा आत्मचिंतन, आत्मसुधार व प्रायश्चित की प्रेरणा देती है श्रीमद्भागवत कथा : आचार्य

आत्मचिंतन, आत्मसुधार व प्रायश्चित की प्रेरणा देती है श्रीमद्भागवत कथा : आचार्य

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आत्मचिंतन, आत्मसुधार व प्रायश्चित की प्रेरणा देती है श्रीमद्भागवत कथा : आचार्य

सिमडेगा. आनंद भवन धर्मशाला में मारवाड़ी महिला मंडल के तत्वावधान में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन बुधवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. कथा वाचक आचार्य वासुदेव गौतम ने व्यासपीठ से भगवान की महिमा का विस्तारपूर्वक वर्णन करते हुए नारद जी के पूर्व जन्म, शुकदेव जी के आगमन तथा ध्रुव के अटूट भक्ति भाव से जुड़े प्रसंगों को भावपूर्ण शैली में प्रस्तुत किया. उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन केवल सांसारिक सुख-सुविधाओं के उपभोग के लिए नहीं है, बल्कि इसका वास्तविक उद्देश्य प्रभु भक्ति, सत्कर्म और आत्मकल्याण है, जो व्यक्ति ईश्वर के चरणों में मन लगाता है, उसे सच्चा सुख और मानसिक शांति प्राप्त होती है. ध्रुव चरित्र का उल्लेख करते हुए आचार्य ने बताया कि दृढ़ संकल्प, समर्पण और सच्ची भक्ति के बल पर कोई भी भक्त भगवान की कृपा प्राप्त कर सकता है. बालक ध्रुव ने कठिन तपस्या और अटूट विश्वास के माध्यम से भगवान विष्णु के दर्शन किये, जो आज भी भक्तों के लिए प्रेरणास्रोत हैं. नारद जी के पूर्व जन्म प्रसंग के माध्यम से उन्होंने सत्संग और संत सेवा के महत्व को रेखांकित किया, जबकि शुकदेव जी के आगमन की कथा से ज्ञान, वैराग्य और आध्यात्मिक चेतना का संदेश दिया. आचार्य ने यह भी कहा कि गृहस्थ जीवन में रहते हुए भी यदि व्यक्ति नियमित रूप से प्रभु स्मरण, गुणगान और सत्कर्म करता रहे, तो उसका जीवन सफल हो जाता है. श्रीमद्भागवत कथा आत्मचिंतन, आत्मसुधार व प्रायश्चित की प्रेरणा देती है. कथा के समापन पर मुख्य यजमानों व श्रद्धालुओं ने सामूहिक महाआरती में भाग लिया, जिसके बाद प्रसाद वितरण किया गया. पूरे वातावरण में भक्ति और श्रद्धा का गहरा प्रभाव देखने को मिला. कार्यक्रम के सफल संचालन में मारवाड़ी महिला मंडल की पदाधिकारियों व सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही.

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