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मौसीबाड़ी से मुख्य मंदिर लौटे भगवान जगन्नाथ

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मौसीबाड़ी से मुख्य मंदिर लौटे भगवान जगन्नाथ

सिमडेगा. कुरडेग प्रखंड के कुटमाकच्छार में शनिवार को श्री जगन्नाथ स्वामी की घुरती रथ यात्रा संपन्न हुई. द्वितीया तिथि से भगवान जगन्नाथ मौसीबाड़ी में विराजमान भक्तों को दर्शन दे रहे थे. आज दशमी तिथि को वह वापस मुख्य मंदिर पहुंच कर विराजमान हुए. श्री जगन्नाथ स्वामी, माता सुभद्रा और श्री बलभद्र के विग्रहों को रथ पर सवार कर भक्तों के द्वारा जयकारे और गाजे-बाजे के साथ रथ खींचकर मुख्य मंदिर ले जाया गया. घुरती रथ यात्रा उत्सव में बीरुगढ़ के युवराज कौशल राज सिंह देव मुख्य रूप से उपस्थित थे. उन्होंने महाप्रभु जगन्नाथ स्वामी से सभी के लिए सुख, शांति, समृद्धि और सभी में सद्भावना के संचार की कामना की. इससे पूर्व मौसीबाड़ी में भगवान जगन्नाथ, माता सुभद्रा, भैया बलभद्र की महाआरती की गयी और प्रसाद वितरण किया गया. मौके पर लोगों ने मेले का आनंद उठाया.

आशा की तीर्थयात्रा में शामिल लोगों का हुआ स्वागत

ठेठईटांगर. ठेठईटांगर बेलाटोली में आशा के तीर्थ यात्रा में शामिल लोगों का स्वागत किया गया. कार्यक्रम के मौके पर उपस्थित कुसुमबेड़ा पल्ली पुरोहित फादर मरियानुस एक्का ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आशा की तीर्थयात्रा निकालने का मुख्य उद्देश्य है कि पूरे विश्व में अमन-चैन कायम रहे. फादर मरियानुस ने कहा कि प्रभु यीशु खुद दंडित होकर, अपमान सह कर, क्रूस पर अपनी बलिदान दे दिया और मुक्तिदाता बन गये. आज हमें प्रभु यीशु के जैसे बनने की आवश्यकता है. एक-दूसरे के लिए जीने की आवश्यकता है, तभी परिवार, समाज, देश में अमन चैन कायम रहेगा. कहा कि आज सभी अंहकार में डूब कर बड़ा बनने के चक्कर में तृतीय विश्व युद्ध की ओर बढ़ रहे हैं, जिसे रोकने की जरूरत है. बता दें कि सिमडेगा सामटोली से पिछले दिनों निकाली गयी आशा की तीर्थ यात्रा शनिवार को ठेठईटांगर प्रखंड के कुसुमबेड़ा पल्ली पहुंची.

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