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Home झारखण्ड सिमडेगा तीन साल से अंधेरे में डूबा है गांव, बरसात में बन जाता है टापू

तीन साल से अंधेरे में डूबा है गांव, बरसात में बन जाता है टापू

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तीन साल से अंधेरे में डूबा है गांव, बरसात में बन जाता है टापू

जलडेगा. जलडेगा प्रखंड की लोंबोई नवाटोली गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है. गांव में बीते तीन वर्षों से विद्युत ट्रांसफाॅर्मर जला पड़ा है, जिससे ग्रामीण लगातार अंधेरे में रहने को मजबूर हैं. लगभग 63 परिवारों वाले इस गांव में गोड़, चीक बड़ाइक व मुंडा आदिवासी समाज के लोग रहते हैं, जिनका प्रमुख आजीविका स्रोत कृषि, जंगल उत्पाद व मजदूरी है. ग्रामीणों के अनुसार, विद्युत ट्रांसफाॅर्मर तीन वर्षों से जला हुआ है. तीन साल से ग्रामीण प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं, पर अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई है. घाघ नाला पर पुल नहीं होने से बरसात के समय नवाटोली गांव अलग-थलग पड़ जाता है. सड़क की हालत खराब है और नाला पार करना जोखिम भरा हो जाता है. गांव के सावन बेसरा, चामू बेसरा, शंकर बेसरा, रंगलाल गोड़, जतरू गोड़, सुखराम गोड़, कष्टी देवी, रंथी देवी समेत अन्य ग्रामीणों ने बताया कि बरसात में गर्भवती महिलाओं और बीमार व्यक्तियों को खाट पर लेटा कर ले जाना पड़ता है. ग्रामीणों ने बताया कि गांव की होनहार हॉकी खिलाड़ी कोमली बेसरा को सांप ने डंस लिया था. बरसात के कारण समय पर अस्पताल नहीं ले जाया जा सका, जिससे उसकी जान चली गयी. यह घटना प्रशासन की लापरवाही और बुनियादी ढांचे की कमी की करुण गाथा बन गयी है. गांव में तीन सोलर जलमीनार लगायी गयी हैं, जिनमें एक पूरी तरह खराब है और दो से बहुत कम पानी निकलता है. कुएं भी सूखने लगे हैं और ग्रामीणों को नदी से पानी लाना पड़ रहा है. लोग दूषित जल पीने को मजबूर हैं. नवाटोली गांव के ग्रामीणों ने पंचायत, प्रखंड व जिला प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द गांव में नया ट्रांसफाॅर्मर लगाया जाये, सड़क की मरम्मत की जाये और घाघ नाला पर पुल का निर्माण कराया जाये. साथ ही पेयजल की समुचित व्यवस्था की जाये, ताकि ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाएं मिल सकें.

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