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आदिवासी युवती की पिटाई मामले में नप गए पुलिसकर्मी, कपाली ओपी प्रभारी समेत तीन सस्पेंड

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आदिवासी युवती की पिटाई मामले में नप गए पुलिसकर्मी, कपाली ओपी प्रभारी समेत तीन सस्पेंड
सस्पेंड किए गए कपाली ओपी के प्रभारी धीरंजन कुमार. फोटो: प्रभात खबर

चांडिल से हिमांशु गोप की रिपोर्ट

Seraikela News: सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल थाना क्षेत्र स्थित कांदरबेड़ा पुनर्वास कॉलोनी की एक आदिवासी युवती के साथ कथित मारपीट और बल प्रयोग के मामले में पुलिस प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ने कपाली ओपी के तीन पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. साथ ही उनके खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गयी है.

15 जून को सामने आया था मामला

जानकारी के अनुसार 15 जून को आदिवासी युवती के साथ कथित मारपीट और बल प्रयोग का मामला सामने आया था. घटना के बाद स्थानीय स्तर पर आक्रोश का माहौल बन गया और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठने लगी. घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ने तत्काल जांच के आदेश दिये.

एसडीपीओ चांडिल को सौंपी गयी जांच

पूरे मामले की जांच के लिए अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) चांडिल को जिम्मेदारी सौंपी गयी. एसडीपीओ द्वारा की गयी प्रारंभिक जांच में कपाली ओपी के तत्कालीन प्रभारी, एक सहायक अवर निरीक्षक (एएसआई) और एक महिला आरक्षी की भूमिका प्रथम दृष्टया संदिग्ध पायी गयी.

ओपी प्रभारी समेत तीन पुलिसकर्मी निलंबित

मंगलवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर कपाली ओपी के तत्कालीन प्रभारी धीरंजन कुमार, सहायक अवर निरीक्षक मोहम्मद मुकलेशुर रहमान तथा महिला आरक्षी संख्या-981 कंचन को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निलंबन के साथ-साथ तीनों के विरुद्ध विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी गयी है. जांच पूरी होने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जायेगी.

जवाबदेही तय करने की दिशा में अहम कदम

पुलिस प्रशासन की इस कार्रवाई को मामले में जवाबदेही तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. आम तौर पर सरकारी फाइलें जिस गति से चलती हैं, उसे देखकर घोंघे भी आत्मविश्वास से भर जाते हैं, लेकिन इस मामले में प्रशासन ने अपेक्षाकृत त्वरित कार्रवाई की है.

आदिवासी संगठनों की नजर आगे की कार्रवाई पर

घटना के बाद क्षेत्र के आदिवासी संगठनों और स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी जा रही है. लोगों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषी पाये जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाना चाहिए. वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जारी है. जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जायेगी. प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि किसी भी स्तर पर दोषियों को संरक्षण नहीं दिया जायेगा.

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निष्पक्ष जांच का भरोसा

पुलिस विभाग का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है. संबंधित अधिकारियों का दावा है कि जांच पूरी होने के बाद तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर नियमानुसार उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जायेगी. फिलहाल तीनों पुलिसकर्मियों के निलंबन के बाद पूरे मामले पर लोगों की नजर बनी हुई है.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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