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Home झारखण्ड सरायकेला-खरसावाँ Seraikela Kharsawan News : फाइलेरिया मुक्त सरायकेला को लेकर सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम शुरू

Seraikela Kharsawan News : फाइलेरिया मुक्त सरायकेला को लेकर सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम शुरू

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Seraikela Kharsawan News : फाइलेरिया मुक्त सरायकेला को लेकर सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम शुरू

सरायकेला.

सरायकेला जिला में फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर रविवार को सदर अस्पताल से सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया. कार्यक्रम के उद्घाटन उपविकास आयुक्त रीना हांसदा व सीएस डॉ सरयू प्रसाद सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया. डीडीसी व सीएस ने पहले दवा का सेवन कर इसका शुभांरभ किया. डीडीसी ने कहा कि फाइलेरिया एक लाइलाज बीमारी है. इसके उन्मूलन के लिए सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम चलाया जा रहा है. सहियाओं को संबोधित करते हुए कहा कि इस कार्यक्रम को अभियान मोड में चलाने की जरूरत है. इसके लिए जिले के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में भी डोर टू डोर जाकर सभी लोगों को फाइलेरिया की दवा खिलाना जरूरी है. कहा कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2030 तक देश को फाइलेरिया मुक्त राष्ट्र बनाने का लक्ष्य रखा है. कहा कि कार्यक्रम को जन आंदोलन में बदलना है ताकि एक भी व्यक्ति दवा खाने से वंचित ना रहे. डीडीसी ने 10 सहियाओं में सहिया किट का वितरण किया.

पहले दिन बूथों पर खिलायी गयी दवा

: सिविल सर्जन ने कहा कि राज्य में फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर वर्ष 2018 से कार्यक्रम चलाया जा रहा है. लेकिन पिछले दो -तीन वर्षों से इसपर विशेष ध्यान दिया गया है. कहा कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शत प्रतिशत लोगों को फाइलेरिया की दवा खिलाना है. कार्यक्रम 10 अगस्त शुरू हुआ है, जो 25 अगस्त तक चलेगा. 11 से 25 अगस्त तक डोर टू डोर जाकर दवा खिलायी जायेगी. सीएस ने बताया कि जिले की कुल जनसंख्या 13 लाख 3 हजार 39 है. इसमें से 11 लाख 81 हजार 856 लोगों को दवा खिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. कहा कि लक्ष्य की प्राप्ति के लिए जिले में 1752 बूथ बनाये गये हैं. इसके लिए 3504 टीम (ड्रग एडमिनिस्ट्रेटर) और 214 सुपरवाइजर को नियुक्त किया गया है. प्रत्येक टीम में तीन सदस्य होंगे, जो डोर टू डोर विजित करेंगे.

फाइलेरिया के लक्षण सामने आने में लग सकते हैं 15 वर्ष

सीएस ने कहा कि फाइलेरिया बीमारी क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होता है. जब यह मच्छर किसी फाइलेरिया प्रभावित इंसान को काटता है तो वह अपने साथ फाइलेरिया के कीटाणु को साथ ले लेता है और स्वस्थ इंसान को काटने के क्रम में कीटाणु को उसके शरीर के अंदर छोड़ देता है. उन्होंने कहा कि फाइलेरिया बीमारी के लक्षण सामने आने में 5 से 15 वर्ष या कभी-कभी इससे अधिक का समय भी लग सकते हैं.

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