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सरायकेला-खरसावां: डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन पर कार्यशाला, 38 युवाओं की रही भागीदारी

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सरायकेला-खरसावां: डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन पर कार्यशाला, 38 युवाओं की रही भागीदारी
सरायकेला-खरसावां में कार्यशाला

 सरायकेला खरसावां से शचिंद्र कुमार दाश की रिपोर्ट

Seraikela Kharsawan News: झारखंड के खरसावां में ‘डिजिटल तरीके से कहानी को दस्तावेज करने’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में लगभग 38 प्रतिभागियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया. कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से सम्मानित शुभम कुमार पति ने डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि किस प्रकार समुदाय अपनी पहचान, संस्कृति और इतिहास को डिजिटल माध्यम से सुरक्षित रख सकता है. 

इन लोगों ने कार्यक्रम में दी जानकारी

रामचंद्र सोय ने खरसावां गोलीकांड पर चल रहे अपने अनुसंधान के बारे में जानकारी दी और इसके ऐतिहासिक पहलुओं को साझा किया. मार्शल मुर्मू ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि यह आम जनता को सशक्त बनाने का एक प्रभावी माध्यम है. मोनिका भूमिज ने युवाओं को मातृभाषा को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया, जबकि मनोज कुमार सोय ने पेसा कानून की विस्तृत जानकारी देते हुए आदिवासी क्षेत्रों में इसके महत्व को समझाया. 

अलग-अलग विषयों पर प्रशिक्षण 

कार्यशाला में कम्युनिटी रिसर्च, डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन, डेटा कलेक्शन, डेटा मैनेजमेंट, लेखन, डेटा स्टोरेज एवं शेयरिंग, डिजाइन एवं प्रेजेंटेशन और डिजिटल नोट-टेकिंग जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया. कार्यक्रम का सफल संचालन नरेंद्र सिजुई, रिपंजल लकड़ा एवं सुखराम सोय द्वारा किया गया. कार्यशाला के अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र दिए गए. 

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