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Seraikela Kharsawan News : जयदा धाम से जुड़ीं हैं वनवासकाल की स्मृतियां

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Seraikela Kharsawan News : जयदा धाम से जुड़ीं हैं वनवासकाल की स्मृतियां

खरसावां/चांडिल.

सरायकेला जिला मुख्यालय से 45 किमी दूर टाटा-रांची हाइ-वे पर सुवर्णरेखा नदी के तट पर प्राचीन जयदा बूढ़ा बाबा शिव मंदिर है. भगवान शिव का यह मंदिर चांडिल ही नहीं बल्कि पूरे कोल्हान के लोगों के लिए आस्था का केंद्र है. मंदिर परिसर में प्राचीन शिवलिंग के अलावा मां पार्वती, हनुमान, नंदी के मंदिर भी हैं. पूरा सावन माह दूर-दराज से लोग आकर जलार्पण करते हैं. चांडिल के पास स्थित जयदा बूढ़ा बाबा मंदिर प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिकता का अनोखा संगम है. मंदिर के पीछे हरा-भरा जंगल और पहाड़ी इसे और भी मनमोहक बनाते हैं.

पौराणिक मान्यता

कहा जाता है कि 14 वर्ष के वनवास के दौरान प्रभु श्रीराम, लक्ष्मण और सीता माता यहां सुवर्णरेखा नदी किनारे कुछ समय के लिए रुके थे. पत्थरों पर उनके घुटनों के निशान आज भी देखे जा सकते हैं. 18वीं-19वीं शताब्दी में खरसावां के राजा जयदेव सिंह शिकार के दौरान इस क्षेत्र में आये थे, जहां उन्हें बूढ़ा बाबा की कृपा प्राप्त हुई. इसके बाद उन्होंने ईचागढ़ के राजा विक्रमादित्य देव को यह जानकारी दी और उन्हीं की देखरेख में मंदिर की नींव रखी गयी. 1966 में महंत ब्रह्मानंद सरस्वती जी यहां तपस्या के लिए पहुंचे. उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर बाबा ने उन्हें मंदिर निर्माण का स्वप्नादेश दिया. इसके बाद 1971 में मंदिर निर्माण का कार्य शुरू हुआ, जो आज भी जारी है.

जयदा से बाड़ेदा तक कांवरियों की आस्था की यात्रा

टाटा-रांची मार्ग (एनएच-33) पर स्थित यह मंदिर सुवर्णरेखा नदी के किनारे पहाड़ी की गोद में स्थित है. यहां हजारों कांवरिये भोलेनाथ को जल अर्पित करते हैं. इसके बाद कांवर में सुवर्णरेखा का जल भरकर बंगाल के पुरुलिया जिले स्थित ाड़ेदा शिव मंदिर (बाड़ेदा बाबा) के लिए रवाना होते हैं. विशेषकर शनिवार और रविवार को बड़ी संख्या में कांवरिये यहां से जल लेकर निकलते हैं. मानसून में नदी के तेज बहाव को देखते हुए तट पर बैरिकेडिंग की गयी है. मंदिर परिसर में दूरदराज से आये श्रद्धालुओं के ठहराव की भी व्यवस्था है. पूजा-पंक्ति की सुचारू व्यवस्था के लिए जूना अखाड़ा और स्थानीय ग्रामीणों के सैकड़ों स्वयंसेवक तैनात रहते हैं.

जयदा शिव मंदिर कैसे पहुंचें

टाटा-रांची मुख्य मार्ग एनएच-33 जमशेदपुर से लगभग 45 किमी और रांची से 100 किमी दूर पर्वत की गोद में प्राचीन जयदा शिव मंदिर है. जमशेदपुर से आने के दौरान चांडिल गोलचक्कर पार करने बाद महज 4 किमी और रांची से आने के क्रम में चौका पार करने बाद 6 किमी पर जयदा शिव मंदिर है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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