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महीनों से खराब पड़ा वर्षा मापी यंत्र, नहीं मिल रहा डेटा

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महीनों से खराब पड़ा वर्षा मापी यंत्र, नहीं मिल रहा डेटा

खरसावां.

जिले में वर्षापात की निगरानी और सटीक आंकड़ों के संकलन के लिए सभी प्रखंडों में ऑटोमैटिक रेन गेज (वर्षा मापी यंत्र) लगाए गए हैं. इन यंत्रों के माध्यम से प्रत्येक प्रखंड में होने वाली बारिश का दैनिक रिकॉर्ड तैयार किया जाता है, जो कृषि, जल संसाधन प्रबंधन और मौसम संबंधी आकलन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. लेकिन दूसरी ओर, जिले के महत्वपूर्ण कुचाई प्रखंड में लगा वर्षा मापी यंत्र पिछले कई महीनों से खराब पड़ा हुआ है, जिससे यहां होने वाली बारिश की सही माप नहीं हो पा रही है.

पहाड़ी और वनाच्छादित क्षेत्र होने के बावजूद उपेक्षा

जानकारी के अनुसार, कुचाई प्रखंड जिले के उन क्षेत्रों में शामिल है जहां सामान्यतः अच्छी वर्षा होती है. पहाड़ी और वनाच्छादित होने के कारण मौसम की दृष्टि से भी यह इलाका बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण माना जाता है. बावजूद इसके, वर्षा मापी यंत्र खराब रहने से प्रखंड में वास्तविक वर्षापात का कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं हो पा रहा है. मई में हुई रिकॉर्ड तोड़ बारिश, लेकिन कुचाई का डेटा गायब : जिले में इस वर्ष मई माह में औसत से कहीं अधिक वर्षा दर्ज की गयी है. जिले का मई माह का सामान्य औसत वर्षापात जहां 33.7 मिमी है, वहीं इस वर्ष मई में 139.5 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गयी. ऐसे रिकॉर्ड तोड़ मौसम के समय में कुचाई जैसे महत्वपूर्ण प्रखंड में वर्षा मापन न हो पाना प्रबंधन पर बड़े सवाल खड़े करता है.

विभाग को दी गयी है सूचना

कुचाई के कृषि विभाग की ओर से वर्षामापी यंत्र के खराब होने की लिखित जानकारी जिला मुख्यालय को काफी पहले ही दे दी गयी है, परंतु अब तक इसे ठीक करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया है. स्थानीय लोगों और किसानों ने संबंधित उच्च अधिकारियों से जल्द से जल्द वर्षा मापी यंत्र को दुरुस्त कराने की मांग की है, ताकि प्रखंड में होने वाली वर्षा का सही रिकॉर्ड उपलब्ध हो सके.

जल संरक्षण के लिए सटीक आंकड़े जरूरी

कृषि विशेषज्ञों का साफ कहना है कि वर्षा के सटीक आंकड़े खेती की योजना बनाने, फसल प्रबंधन तथा जल संरक्षण संबंधी रणनीतियां तैयार करने में मुख्य भूमिका निभाते हैं. स्थानीय लोगों के मुताबिक, यंत्र लंबे समय से खराब है, लेकिन अब तक इसकी मरम्मत या इसे बदलने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गयी है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मानसून के पूरी तरह सक्रिय होने से पहले इस यंत्र को दुरुस्त कर लिया जाए, तो आगामी खरीफ मौसम के दौरान वर्षापात का सटीक आकलन संभव हो सकेगा.

कृषि प्रधान क्षेत्र के किसानों में चिंता

कृषि कार्यों के दृष्टिकोण से कुचाई प्रखंड का विशेष महत्व है और यहां के अधिकतर किसान पूरी तरह से वर्षा आधारित खेती पर निर्भर हैं. ऐसे में वर्षा के वास्तविक आंकड़ों का अभाव कृषि विभाग और किसानों दोनों के लिए मुसीबत बन सकता है.

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