[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home झारखण्ड सरायकेला-खरसावाँ PHOTOS: मत्स्य के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेगा झारखंड, 4.10 लाख मीट्रिक टन मछली उत्पादन का लक्ष्य

PHOTOS: मत्स्य के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेगा झारखंड, 4.10 लाख मीट्रिक टन मछली उत्पादन का लक्ष्य

0
PHOTOS: मत्स्य के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेगा झारखंड, 4.10 लाख मीट्रिक टन मछली उत्पादन का लक्ष्य
झारखंड की नीली क्रांति और कोल्हान का केज कल्चर. फोटो : प्रभात खबर

Fish Farming jharkhand| सरायकेला-खरसावां, शचिंद्र कुमार दाश : मछली उत्पादन में झारखंड आत्मनिर्भर बनेगा. इस योजना पर काम शुरू हो गया है. मत्स्य निदेशालय ने इस वर्ष राज्य में 4.10 लाख मीट्रिक टन मछली उत्पादन का लक्ष्य रखा है. यह पिछले वर्ष की तुलना में 38 मीट्रिक टन अधिक है. पिछले वर्ष राज्य में 3.73 लाख टन मछली उत्पादन का लक्ष्य था.

Fish Farming In Kolhan Jharkhand News Today
मछली पालन के लिए जलाशयों में बनाये गये केज. फोटो : प्रभात खबर

कोल्हान में 70,500 मीट्रिक टन मछली उत्पादन का लक्ष्य

कोल्हान प्रमंडल के 3 जिलों सरायकेला-खरसावां, पश्चिमी सिंहभूम और पूर्वी सिंहभूम जिले में इस वर्ष 70.5 हजार मीट्रिक टन मछली उत्पादन की योजना है. सरायकेला-खरसावां में 29 हजार मीट्रिक टन, पूर्वी सिंहभूम में 21,500 मीट्रिक टन और पश्चिमी सिंहभूम जिले में 20 हजार मीट्रिक टन मछली उत्पादन का लक्ष्य है.

Fish Farming In Kolhan Jharkhand Update News
जलाशय के केज में मछली का जीरा डालने जाते मत्स्यपालन करने वाले किसान. फोटो : प्रभात खबर

सर्वाधिक मत्स्य पालन का लक्ष्य सरायकेला-खरसावां को

पिछले एक दशक से मत्स्य पालन के क्षेत्र में सरायकेला-खरसावां जिला पूरे राज्य में अव्वल रहा है. इस वर्ष भी राज्य के 24 जिलों में से सर्वाधिक मत्स्य उत्पादन का लक्ष्य सरायकेला-खरसावां जिले को ही दिया गया है. जिले में साल-दर-साल मत्स्य उत्पादन में वृद्धि हो रही है. चांडिल डैम में केज कल्चर से हो रहा मत्स्य पालन पूरे देश के लिए रोल मॉडल बन गया है. देश के अलग-अलग राज्यों से भी बड़ी संख्या में मछली पालन करने वाले किसान और विशेषज्ञ यहां मत्स्य पालन की जानकारी लेने आते हैं.

झारखंड की ताजा खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

Fish Farming: कोल्हान के 11 बड़े जलाशयों में मत्स्य पालन

सरायकेला-खरसावां जिले के 5 बड़े जलाशयों के साथ-साथ करीब 5,400 छोटे-बडे सरकारी और निजी तालाब में मत्स्य पालन होता है. चांडिल डैम में समितियों की ओर से केज कल्चर पालन किया जा रहा है. इसमें विस्थापित परिवारों के सदस्य मत्स्य पालन से जुड़े हैं. इसी तरह पश्चिमी सिंहभूम के 6 बड़े जलाशय समेत करीब 7,750 छोटे-बड़े सरकारी और निजी तालाबों में मत्स्य पालन किया जाता है.

Fish Farming In Kolhan Jharkhand Today News
कोल्हान के 11 बड़े जलाशयों में हो रहा है मछली पालन. फोटो : प्रभात खबर

पनसुंआ और नकटी जलाशय में भी हो रहा मछली पालन

इसके अलावा पनसुंआ और नकटी जलाशय एवं खदानों के गड्डों में भी केज कल्चर से मछली की खेती होती है. अधिकांश तालाबों में मछली का जीरा छोड़ा दिया गया है. इस वर्ष मानसून की बारिश समय पर होने की वजह से जलाशय पानी से लबालब हैं. ऐसे में मछली का अच्छा उत्पादन होने की संभावना जतायी जा रही है.

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के झारखंड आगमन से पहले धनबाद में आइजी ने की सुरक्षा की समीक्षा

मत्स्य पालन कर स्वावलंबी बन रहे किसान

करीब 2 दशक पूर्व कोल्हान में काफी कम मात्रा में मत्स्य पालन होता था. अब यहां बड़े पैमाने पर मछली पालन हो रहा है. हाल के वर्षों में सरकार की ओर से मिलने वाले प्रोत्साहन की वजह से बड़ी संख्या में किसानों ने मत्स्य पालन की ओर रुख किया है. मत्स्य पालन में नये-नये प्रयोग हो रहे हैं. इससे किसानों की आमदनी बढ़ रही है और वे स्वावलंबी और आत्मनिर्भर भी हो रहे हैं. पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला खरसावां जिले के बंद पड़े खदानों में भी मत्स्य पालन हो रहा है.

Fish Farming In Kolhan Jharkhand
मछली की प्रगति देखने के लिए पहुंचे किसान और मत्स्य विभाग के अधिकारी. फोटो : प्रभात खबर

मत्स्य पालन कर स्वावलंबी बन रहे किसान

पिछले वर्ष 2024-25 में कोल्हान में कुल 61,200 मीट्रिक टन मछली का उत्पादन हुआ था. सरायकेला-खरसावां में 24,200 मीट्रिक टन, पूर्वी सिंहभूम में 19,500 मीट्रिक टन और पश्चिमी सिंहभूम जिले में 17,500 मीट्रिक टन मछली का उत्पादन हुआ.

सरायकेला-खरसावां : 7 वर्ष में मछली उत्पादन के आंकड़े

वर्षमछली उत्पादन
2018-1918,500 मीट्रिक टन
2019-2019,200 मीट्रिक टन
2020-2119,700 मीट्रिक टन
2021-2221,000 मीट्रिक टन
2022-2323,600 मीट्रिक टन
2023-2423,900 मीट्रिक टन
2024-2524,200 मीट्रिक टन
Fish Farming In Kolhan Jharkhand Update News Today
जलाशय के किनारे जीरा के साथ तैयार मछली पालन करने वाले किसान. फोटो : प्रभात खबर

पश्चिमी सिंहभूम : 7 वर्ष में मछली उत्पादन के आंकड़े

वर्षमछली का उत्पादन
2018-1910,670 मीट्रिक टन
2019-2010,800 मीट्रिक टन
2020-2111,500 मीट्रिक टन
2021-2212,800 मीट्रिक टन
2022-2313,800 मीट्रिक टन
2023-2416,500 मीट्रिक टन
2024-2517,500 मीट्रिक टन

इसे भी पढ़ें

रांची से अपहृत बच्ची को पटना ले जाना चाहते थे अपहर्ता, एनकाउंटर के डर से छात्रा को छोड़कर भागे

Crime News: गुमला में पुत्र ने टांगी से काटकर पिता को मार डाला, गांव में सनसनी

रांची के चुटिया से दिन-दहाड़े स्कूली छात्रा का अपहरण, रामगढ़ के इस इलाके से हुई बरामद

Shravani Mela 2025: बोल बम के नारे से गुंजायमान बाबाधाम, 20वें दिन श्रद्धालु कर रहे जलार्पण

Previous article ब्रह्मपुत्र पर बांध के चीनी मंसूबे पर नजर रहे, पढ़ें राजीव रंजन का लेख
Next article Heavy Rain Alert : दिल्ली में होगी भारी बारिश, अगले 7 दिन के लिए IMD ने जारी किया अलर्ट
Avatar Of Mithilesh Jha
मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel